{"_id":"99568c0899f955900014cb2151578237","slug":"vasuki-snake-worship-on-nagapanchami-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वासुकी सर्प का दर्शन व तक्षक सर्प की पूजा करें ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
वासुकी सर्प का दर्शन व तक्षक सर्प की पूजा करें
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Wed, 19 Aug 2015 12:17 AM IST
विज्ञापन
नाग पंचमी आज है। नागों को जबरदस्ती बंद करना, पकड़ना
विज्ञापन
और धन अर्जन के लिए प्रदर्शन करना पाप समान है। सर्प को दूध पिलाने के लिए
बांबी में दूध डाला जा सकता है, या दरवाजे में नाग स्थापित कर पूजन करने
के बाद दूध छिड़ककर पुण्य प्राप्त किया जा सकता है। वासुकी सर्प का दर्शन व
तक्षक सर्प की पूजा करनी चाहिए।
ज्योतिषाचार्य पंडित दिनेश दुबे ने बताया कि मनुष्य के जीवन में सर्पों का गहरा संबंध है। पुराणों के अनुसार शेषनाग के फन पर पृथ्वी का भार रखा है। धर्म सम्राट महाराज परीक्षित की तक्षक के काटने से मृत्यु हुई थी।
जिस कारण आज के दिन नागपंचमी पर तक्षक सर्प का पूजन किया जाता है। समुद्र मंथन में भी रस्सी के रुप में वासुकी नामक सर्प का प्रयोग हुआ था। नागिन अपने बच्चों का भी मनुष्य के हित में भक्षण करती है।
क्योंकि उसके ऐसा न करने पर पृथ्वी में सर्पों की संख्या बढ़ जाती और मनुष्य का जीवन संकट में पड़ जाता। बताया कि शास्त्रों में भी सांप को बंदकर दूध पिलाने का कोई प्रमाण नहीं है।
बेहतर होगा कि इस दिन भगवान शिव और भगवान शेषनाग की पूजा करें। कहा कि कालसर्प योग का अशुभ प्रभाव है वे ऊं कुरुकल्ये हुं फट स्वाहा मंत्र का जाप करें, शांति मिलेगी।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता कहे जाते हैं और नागों के देवता शेषनाग ने पूरी पृथ्वी संभाल रखी है, इसलिए इस दिन धरती, खेत और कुआं खोदना वर्जित माना जाता है।
बताया कि मंदिर व घर में मन ही मन नाग देवता का स्मरण कर बाबा भोलेनाथ के नाग स्वरूप को खीर का भोग लगाएं और घर की दहलीज के दोनों ओर बाहर की तरफ गाय के गोबर, गेरु या शुद्ध देसी घी से नाग देवता का जोड़ा बनाएं और भीत्यादि, गोमयादि नागों का नाम लिखकर ऊं नाग देवतभ्यो नम: लिख मंत्र से पूजन करना चाहिए। इसके बाद खीर या मीठा दूध दही, उबले गेहूं का भोग लगाएं और नाग देवता का स्मरण करें।
ज्योतिषाचार्य पंड़ित दिनेश दुबे ने बताया कि नाग पंचमी का पूजन 10:53 बजे से दोपहर 12 बजे श्रेष्ठ मुहूर्त है। बुधवार को हस्त नक्षत्र में सांध्य योग पड़ने के कारण मानव जीवन के कल्याण के लिए शुभ सूचक है।
कहा कि किसी जातक की कुंडली में काल सर्प योग है तो दो चांदी के सर्प लेकर गंगाजल से स्नान कर सिंदूर का तिलक, पुष्प चढ़ाकर नारियल को कलावा बांधकर नागपंचमी के दिन पूजन करें, साथ ही जातक को चांदी के सर्पों सहित पूजा सामग्री पावन नदी में प्रवाहित करनी चाहिए। जिससे जन्म पत्रिका में दोष नष्ट होता है।
डीएफओ एपी त्रिपाठी ने कहा कि सांपों का प्रदर्शन करना गलत है। इसे रोकने के लिए टीम गठित की है, जो जगह-जगह निरीक्षण करेगी। अगर कोई व्यक्ति सांपों के ऐसे प्रदर्शन के विषय में शिकायत करना चाहता है तो जिला वनाधिकारी कार्यालय पर दर्ज करा सकता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित दिनेश दुबे ने बताया कि मनुष्य के जीवन में सर्पों का गहरा संबंध है। पुराणों के अनुसार शेषनाग के फन पर पृथ्वी का भार रखा है। धर्म सम्राट महाराज परीक्षित की तक्षक के काटने से मृत्यु हुई थी।
जिस कारण आज के दिन नागपंचमी पर तक्षक सर्प का पूजन किया जाता है। समुद्र मंथन में भी रस्सी के रुप में वासुकी नामक सर्प का प्रयोग हुआ था। नागिन अपने बच्चों का भी मनुष्य के हित में भक्षण करती है।
क्योंकि उसके ऐसा न करने पर पृथ्वी में सर्पों की संख्या बढ़ जाती और मनुष्य का जीवन संकट में पड़ जाता। बताया कि शास्त्रों में भी सांप को बंदकर दूध पिलाने का कोई प्रमाण नहीं है।
बेहतर होगा कि इस दिन भगवान शिव और भगवान शेषनाग की पूजा करें। कहा कि कालसर्प योग का अशुभ प्रभाव है वे ऊं कुरुकल्ये हुं फट स्वाहा मंत्र का जाप करें, शांति मिलेगी।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता कहे जाते हैं और नागों के देवता शेषनाग ने पूरी पृथ्वी संभाल रखी है, इसलिए इस दिन धरती, खेत और कुआं खोदना वर्जित माना जाता है।
बताया कि मंदिर व घर में मन ही मन नाग देवता का स्मरण कर बाबा भोलेनाथ के नाग स्वरूप को खीर का भोग लगाएं और घर की दहलीज के दोनों ओर बाहर की तरफ गाय के गोबर, गेरु या शुद्ध देसी घी से नाग देवता का जोड़ा बनाएं और भीत्यादि, गोमयादि नागों का नाम लिखकर ऊं नाग देवतभ्यो नम: लिख मंत्र से पूजन करना चाहिए। इसके बाद खीर या मीठा दूध दही, उबले गेहूं का भोग लगाएं और नाग देवता का स्मरण करें।
ज्योतिषाचार्य पंड़ित दिनेश दुबे ने बताया कि नाग पंचमी का पूजन 10:53 बजे से दोपहर 12 बजे श्रेष्ठ मुहूर्त है। बुधवार को हस्त नक्षत्र में सांध्य योग पड़ने के कारण मानव जीवन के कल्याण के लिए शुभ सूचक है।
कहा कि किसी जातक की कुंडली में काल सर्प योग है तो दो चांदी के सर्प लेकर गंगाजल से स्नान कर सिंदूर का तिलक, पुष्प चढ़ाकर नारियल को कलावा बांधकर नागपंचमी के दिन पूजन करें, साथ ही जातक को चांदी के सर्पों सहित पूजा सामग्री पावन नदी में प्रवाहित करनी चाहिए। जिससे जन्म पत्रिका में दोष नष्ट होता है।
डीएफओ एपी त्रिपाठी ने कहा कि सांपों का प्रदर्शन करना गलत है। इसे रोकने के लिए टीम गठित की है, जो जगह-जगह निरीक्षण करेगी। अगर कोई व्यक्ति सांपों के ऐसे प्रदर्शन के विषय में शिकायत करना चाहता है तो जिला वनाधिकारी कार्यालय पर दर्ज करा सकता है।