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बीमार बकरी खरीदने का भंडाफोड़
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Sun, 07 Jun 2015 11:41 PM IST
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बुंदेलखंड विकास पैकेज से पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने पशुपालकों को
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बीमार बकरियां खरीदकर वितरित कर दीं। इसे लेकर विभागीय जिम्मेदार बकरियों
का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र तक देने में पीछे हट रहे हैं। अभी सात दिन पूर्व
सेवानिवृत्त हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.नेमीचंद्र ने जिलाधिकारी को
भेजे जवाब में इस बंदरबांट का खुलासा किया है। वहीं डिप्टी सीवीओ ने इस
आरोप को बेबुनियाद बताया है।
बुंदेलखंड विकास पैकेज अधिकारियों की खाऊ कमाऊ नीति का एक हिस्सा बनता जा रहा है। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने पैकेज के जरिए मोटी रकम झटकी। न्याय पंचायत स्तर पर सांड़ दिए गए तो बीपीएल परिवारों को रोजगार के लिए बकरियां बांटीं गईं। पिछले वर्षों में बांटी गई बकरियों की जांच मंडल स्तर से कराई जा चुकी है।
लेकिन इसका खुलासा नहीं हुआ है। वहीं वित्तीय वर्ष 2014-15 में 32 लाख 71 हजार रुपये का पैकेज पशुपालन विभाग को मिला। जिले के सभी सातों विकासखंडों में 117 यूनिट बकरियों में ब्लाक कुरारा, मुस्करा, गोहांड व सुमेरपुर में 16-16, मौदहा व सरीला में 18-18 व राठ ब्लॉक में 17 यूनिट बकरियां बांटी गई है।
इसके तहत प्रत्येक किसान को 31 हजार रुपये कीमत से पांच बकरी और एक बकरा पशुपालन विभाग ने खरीदकर दिया है। इस मामले पर अमर उजाला ने 1 मई 2015 को बुंदेलखंड पैकेज से मिलीं बीमार बकरियां शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया तो प्रशासन में हलचल मच गई।
बीते दिनों हुई खरीफ गोष्ठी में भी जिलाधिकारी ने बीमार बकरियों के मामले में जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की घोषणा की। इसी प्रकरण पर मुख्य चिकित्साधिकारी डा.नेमीचंद ने जिलाधिकारी को पत्र भेज खुद को पाक साफ बताया है। सीवीओ ने 29 मई को भेजे पत्र में कहा है कि जिलास्तर पर डिप्टी सीवीओ डा.रघुवीर सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया।
आगे कहा कि खरीदी गई बकरियों के न तो स्वास्थ्य प्रमाण पत्र निर्गत किए गए और न ही योजना के क्रियान्वयन में कोई सहयोग किया गया। साथ ही कहा है कि विभागीय लेखाकार व उनके खिलाफ दुष्प्रचार कर क्रय से संबंधित सभी उपमुुख्य पशु चिकित्साधिकारियों ने भ्रमित करने का कार्य किया है।
क्रय की गई बकरियों के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र न तो इन्होंने बनाने दिए और न ही संबंधित अधिकारियों ने बनाए। ऐेसे में क्रय की गई बकरियों का बीमा कराने में अनावश्यक विलंब हुआ। यदि किसी इकाई का बीमा नहीं हो पाता है और बकरियां मर जाती हैं और क्लेम नहीं मिलता है तो इसका उत्तरदायित्व नोडल अधिकारी डा.रघुवीर सिंह का होगा।
डिप्टी कमिश्नर एनआरएलएम ज्ञानेश्वर तिवारी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है। अन्य सदस्यों में डिप्टी सीवीओ डा.रघुवीर सिंह व उप मुख्यचिकित्साधिकारी डा.राकेश कुमार गुप्ता शामिल हैं।
सीडीओ अवधेश बहादुर सिंह ने कहा कि
प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.रघुवीर सिंह ने कहा कि बकरियों की खरीद से कुछ भी लेना-देना नहीं है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बकरी खरीदने के समय उन्हें सूचना तक नहीं दी। कहा कि सिर्फ कागजों पर नोडल अधिकारी जरूर बना दिया। कहा कि सेवानिवृत्त होने पर अब वह बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
बुंदेलखंड विकास पैकेज अधिकारियों की खाऊ कमाऊ नीति का एक हिस्सा बनता जा रहा है। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने पैकेज के जरिए मोटी रकम झटकी। न्याय पंचायत स्तर पर सांड़ दिए गए तो बीपीएल परिवारों को रोजगार के लिए बकरियां बांटीं गईं। पिछले वर्षों में बांटी गई बकरियों की जांच मंडल स्तर से कराई जा चुकी है।
लेकिन इसका खुलासा नहीं हुआ है। वहीं वित्तीय वर्ष 2014-15 में 32 लाख 71 हजार रुपये का पैकेज पशुपालन विभाग को मिला। जिले के सभी सातों विकासखंडों में 117 यूनिट बकरियों में ब्लाक कुरारा, मुस्करा, गोहांड व सुमेरपुर में 16-16, मौदहा व सरीला में 18-18 व राठ ब्लॉक में 17 यूनिट बकरियां बांटी गई है।
इसके तहत प्रत्येक किसान को 31 हजार रुपये कीमत से पांच बकरी और एक बकरा पशुपालन विभाग ने खरीदकर दिया है। इस मामले पर अमर उजाला ने 1 मई 2015 को बुंदेलखंड पैकेज से मिलीं बीमार बकरियां शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया तो प्रशासन में हलचल मच गई।
बीते दिनों हुई खरीफ गोष्ठी में भी जिलाधिकारी ने बीमार बकरियों के मामले में जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की घोषणा की। इसी प्रकरण पर मुख्य चिकित्साधिकारी डा.नेमीचंद ने जिलाधिकारी को पत्र भेज खुद को पाक साफ बताया है। सीवीओ ने 29 मई को भेजे पत्र में कहा है कि जिलास्तर पर डिप्टी सीवीओ डा.रघुवीर सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया।
आगे कहा कि खरीदी गई बकरियों के न तो स्वास्थ्य प्रमाण पत्र निर्गत किए गए और न ही योजना के क्रियान्वयन में कोई सहयोग किया गया। साथ ही कहा है कि विभागीय लेखाकार व उनके खिलाफ दुष्प्रचार कर क्रय से संबंधित सभी उपमुुख्य पशु चिकित्साधिकारियों ने भ्रमित करने का कार्य किया है।
क्रय की गई बकरियों के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र न तो इन्होंने बनाने दिए और न ही संबंधित अधिकारियों ने बनाए। ऐेसे में क्रय की गई बकरियों का बीमा कराने में अनावश्यक विलंब हुआ। यदि किसी इकाई का बीमा नहीं हो पाता है और बकरियां मर जाती हैं और क्लेम नहीं मिलता है तो इसका उत्तरदायित्व नोडल अधिकारी डा.रघुवीर सिंह का होगा।
डिप्टी कमिश्नर एनआरएलएम ज्ञानेश्वर तिवारी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है। अन्य सदस्यों में डिप्टी सीवीओ डा.रघुवीर सिंह व उप मुख्यचिकित्साधिकारी डा.राकेश कुमार गुप्ता शामिल हैं।
सीडीओ अवधेश बहादुर सिंह ने कहा कि
प्रभारी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.रघुवीर सिंह ने कहा कि बकरियों की खरीद से कुछ भी लेना-देना नहीं है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बकरी खरीदने के समय उन्हें सूचना तक नहीं दी। कहा कि सिर्फ कागजों पर नोडल अधिकारी जरूर बना दिया। कहा कि सेवानिवृत्त होने पर अब वह बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।