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स्कूलों के अग्निशमन यंत्र बेकार

Wed, 13 May 2015 11:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर Updated Wed, 13 May 2015 11:46 PM IST
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Schools extinguishers waste

बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय स्कूलों में आग बुझाने

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को अग्निशमन यंत्र तो उपलब्ध करा दिए, किंतु उनकी रिफिलिंग कराना भूल गया। ऐसे में यदि किसी स्कूल में आग लग गई तो बुझाना आसान नहीं होगा। स्कूल के सैकड़ों बच्चों की जान पर बन सकती है।

परिषदीय स्कूलों में वर्ष 2004 में मिड-डे मील योजना लागू की गई। मिड-डे मील बनाने के लिए स्कूलों को रसोई गैस के कनेक्शन दिए गए। कुछ स्कूलों में खाना बनाते समय रसोई गैस सिलेंडर में आग लगने की घटनाएं हुईं तो वर्ष 2010 में स्कूलों में आग से निपटने के इंतजाम के उपाय किए गए।

बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रत्येक परिषदीय स्कूल को आपदा से निपटने के लिए 3900 रुपये का बजट जारी किया। इस धनराशि से दो अग्निशमन यंत्र, चार बाल्टी और एक स्टैंड की व्यवस्था कराने के आदेश दिए थे। स्कूलों में अग्निशमन यंत्रों की खरीद की गई।

तत्कालीन अग्निशमन अधिकारी मुकीमुलहक ने टीचरों और रसोइयों को आग से निपटने का प्रशिक्षण भी दिया। अग्निशमन यंत्रों की वैधता तीन साल थी।

इनकी वैधता अवधि समाप्त हुए तीन साल गुजर चुके हैं, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग ने इनकी रिफिलिंग कराने की सुध नहीं ली। ऐसे में यदि किसी स्कूल में आग लग जाए तो उसे बुझाना आसान नहीं होगा। इससे सैकड़ों बच्चों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
 
कलौलीजार गांव के प्राथमिक विद्यालय में वर्ष 2010 में अग्निशमन यंत्र और बाल्टियां खरीदी गई थीं, जो स्टोर रूम में रखी मिलीं। रीफिलिंग न होने से सिलेंडर बेकार हैं।

प्रधानाध्यापक मोहम्मद ताहिर का कहना है कि अग्निशमन यंत्रों का प्रयोग कभी नहीं किया है। गैस भी खत्म हो चुकी है, इसलिए स्टोर में रख दिए हैं। विभाग से दिशा-निर्देश के बाद ही रीफिलिंग कराई जाएगी।

ललपुरा गांव में प्राथमिक स्कूल में दो किचनशेड हैं। दोनों में ही एक-एक अग्निशमन यंत्र रखे हैं, लेकिन ये सिर्फ  किचन की शोभा ही बढ़ा रहे हैं।

इन यंत्रों की रीफिलिंग नहीं कराई गई है। प्रधानाध्यापक कालीचरन का कहना कि यंत्र तो बेकार हैं लेकिन सतर्कता बरती जा रही है, दो बाल्टी पानी रसोईघर में भरवाकर रखवा देते हैं, ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

अग्निशमन यंत्रों की वैधता की पुष्टि फायर पुलिस विभाग करता है। अग्निशमन अधिकारी यतेंद्रनाथ उमराव का कहना है कि निर्धारित शुल्क अदा करके कोई भी अपने अग्निशमन यंत्र की जांच करा सकता है। बताया कि यदि वैध हैं तो उसकी तिथि बढ़ा दी जाती है। कहा कि रीफिलिंग का काम कानपुर में ही होता है।

शासन स्तर से अग्निशमन यंत्रों की रीफिलिंग कराने के कोई दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। बजट मिलने पर ही यह कार्य कराया जा सकता है। फिलहाल बजट का अभाव है।
डॉ. रामचंद्र, बीएसए

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