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स्वतंत्रता का मतलब मनमानी नहीं
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Tue, 11 Aug 2015 11:48 PM IST
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लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कहा था कि अनुशासित होकर जीना ही आजादी
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के सही मायने हैं। देखें तो आज लोगों की दैनिक जीवन शैली के संदर्भ में
पटेल के उक्त कथन शत-प्रतिशत सही साबित हो रहे हैं। आजादी के बीच हम आप
जोशोखरोश के साथ इसका जश्न मनाने जा रहे हैं, लेकिन हमारे आपके बीच तमाम
लोग ऐसे हैं जिनके लिए आजादी का मतलब मनमानी है। नियम तोड़ना लोगों का शगल
बन चुका है। तभी तो जहां मन किया वाहन खड़ा कर दिया। जिस जगह चाहा पीकदान
समझ पान गुटका की पीक थूक दी।
ट्रैफिक नियम तोड़ना बनी आदत
सड़क के ट्रैफिक नियम तोड़ना तो लोगों के लिए आम बात है। ट्रैफिक पुलिस के जवान चौराहों पर हाथ देते रहते हैं लेकिन लोग नजरअंदाज कर चलते बनते हैं। पुलिस ने किसी को पकड़ा तो सफेदपोश का फोन आने पर उसे छोड़ना मजबूरी बन जाता है। निजी वाहन हो या सवारी वाहन भी नियम तोड़ने में पीछे नहीं है। पुलिस दोपहिया वाहनों की चेकिंग कर बाइक सवारों पर नियमों को तोड़ने की कार्रवाई तो करती हैं पर इस पर भी लोग नहीं मान रहे हैं। शहर में फर्राटे भरने वाले वाहनों के चालक जहां भी किसी ने हाथ दिया वहीं बीच सड़क पर वाहन खड़ा कर देते है। भले दूसरा वाहन पीछे से हार्न बजा रहा है। ऐसे में जाम की नौबत खड़ी होने में देर नहीं लगती है। अकेले लक्ष्मीबाई तिराहे की बात करें तो हाईवे पर भारी वाहनों के चालक वाहनों को बीच सड़क पर खड़ाकर घंटों गायब हो जाते हैं जिससे जाम तो लगता ही है दुर्घटनाओं के होने का भी खतरा मंडराता रहता है।
फरियादी किसे बताएं समस्याएं
सुबह 10 से 12 बजे तक जिले के आला अधिकारियों को शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह अपने कार्यालय में बैठकर जनता का दु:खदर्द सुनेंगे। मगर इसका पालन जिले में कई अधिकारी नहीं कर रहे हैं। यह भी आजादी के मनमानी का जीता जागता सबूत है। दोपहर 11:30 बजे टीम ने बीएसए कार्यालय का निरीक्षण किया, जहां बीएसए खुद अपनी सीट पर नहीं मिले। मान लेते हैं कि बीएसए के पास तमाम काम रहते हैं। स्कूलों का निरीक्षण उनकी प्राथमिकता में है। इसके बावजूद आम जनता की समस्या सुनने के लिए 2 घंटे बैठने के निर्देश हैं। एक लिपिक ने बताया कि मीटिंग में गए हैं।
सीरियस मरीज को ले जाने में करनी पड़ती मशक्कत
मनमानी देखनी हो तो जिला अस्पताल की ओर रुख करें। अस्पताल के मुख्य गेट को ही लोगों ने पार्किंग समझ लिया है बेतरतीब वाहनों को खड़ा कर रहे हैं। ऐसे में अगर बाहर से कोई सीरियस मरीज आ जाता है तो उसे अस्पताल के अंदर ले जाने में मरीज को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। हद तो तब हो जाती है जब तीमारदार ही अस्पताल के मुख्य गेट पर लगे चैनल से सटाकर बाइक वगैरह खड़े कर देते हैं। क्या यही आजादी का मतलब है या फिर आजादी के स्थान पर मनमानी।
ट्रैफिक नियम तोड़ना बनी आदत
सड़क के ट्रैफिक नियम तोड़ना तो लोगों के लिए आम बात है। ट्रैफिक पुलिस के जवान चौराहों पर हाथ देते रहते हैं लेकिन लोग नजरअंदाज कर चलते बनते हैं। पुलिस ने किसी को पकड़ा तो सफेदपोश का फोन आने पर उसे छोड़ना मजबूरी बन जाता है। निजी वाहन हो या सवारी वाहन भी नियम तोड़ने में पीछे नहीं है। पुलिस दोपहिया वाहनों की चेकिंग कर बाइक सवारों पर नियमों को तोड़ने की कार्रवाई तो करती हैं पर इस पर भी लोग नहीं मान रहे हैं। शहर में फर्राटे भरने वाले वाहनों के चालक जहां भी किसी ने हाथ दिया वहीं बीच सड़क पर वाहन खड़ा कर देते है। भले दूसरा वाहन पीछे से हार्न बजा रहा है। ऐसे में जाम की नौबत खड़ी होने में देर नहीं लगती है। अकेले लक्ष्मीबाई तिराहे की बात करें तो हाईवे पर भारी वाहनों के चालक वाहनों को बीच सड़क पर खड़ाकर घंटों गायब हो जाते हैं जिससे जाम तो लगता ही है दुर्घटनाओं के होने का भी खतरा मंडराता रहता है।
फरियादी किसे बताएं समस्याएं
सुबह 10 से 12 बजे तक जिले के आला अधिकारियों को शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह अपने कार्यालय में बैठकर जनता का दु:खदर्द सुनेंगे। मगर इसका पालन जिले में कई अधिकारी नहीं कर रहे हैं। यह भी आजादी के मनमानी का जीता जागता सबूत है। दोपहर 11:30 बजे टीम ने बीएसए कार्यालय का निरीक्षण किया, जहां बीएसए खुद अपनी सीट पर नहीं मिले। मान लेते हैं कि बीएसए के पास तमाम काम रहते हैं। स्कूलों का निरीक्षण उनकी प्राथमिकता में है। इसके बावजूद आम जनता की समस्या सुनने के लिए 2 घंटे बैठने के निर्देश हैं। एक लिपिक ने बताया कि मीटिंग में गए हैं।
सीरियस मरीज को ले जाने में करनी पड़ती मशक्कत
मनमानी देखनी हो तो जिला अस्पताल की ओर रुख करें। अस्पताल के मुख्य गेट को ही लोगों ने पार्किंग समझ लिया है बेतरतीब वाहनों को खड़ा कर रहे हैं। ऐसे में अगर बाहर से कोई सीरियस मरीज आ जाता है तो उसे अस्पताल के अंदर ले जाने में मरीज को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। हद तो तब हो जाती है जब तीमारदार ही अस्पताल के मुख्य गेट पर लगे चैनल से सटाकर बाइक वगैरह खड़े कर देते हैं। क्या यही आजादी का मतलब है या फिर आजादी के स्थान पर मनमानी।