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तालाबों से नहीं हट रहे अवैध कब्जे

Tue, 30 Jun 2015 12:51 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर Updated Tue, 30 Jun 2015 12:51 AM IST
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Encroachments are not removed from ponds

पौथिया गांव में साढ़े चार एकड़ जमीन पर कहिया तालाब है, लेकिन उसमें

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सिर्फ  एक एकड़ ही रकबा रह गया है। भूमाफियाओं की नजर इस तालाब की जमीन पर टिकी है। गांव के करीब 15 लोगों तालाब को पाटने पर दो साल पहले लेखपाल नोटिस दे चुका है। लेकिन राजस्व विभाग द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने से तालाब पाटने का काम जारी है। शिकायत के बाद लेखपाल मिट्टी डालना बंद करा दिया है।

जिले में तालाबों को संरक्षित रखने के लिए उच्च न्यायालय के आदेश है। इन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश हैं। लेकिन देखा जा रहा है कि बड़े रकबे में फैले तमाम तालाब सिर्फ कागजों पर ही सीमित रह गए हैं।

तालाबों को भूमि पर पूरे मोहल्ले के मोहल्ले बसे हैं। पौथिया गांव में साढ़े चार एकड़ रकबे में कहिया तालाब फैला है। लेकिन यह अब समाप्ति की ओर है। मौके पर तालाब जैसी शक्ल नहीं है।

इस बस्ती के आसपास रहने वालों की नजरें इसी के कब्जे में टिकी रहतीं हैं। इस तालाब की कभी खुदाई नहीं हुई है। जबकि मनरेगा से ग्राम पंचायत प्रति वर्ष लाखों रुपये खर्च कर मजदूरों को रोजगार देने का दावा कर रही है।

इससे माना जा सकता है कि ग्राम पंचायत की नजरें इस तालाब पर इनायत नहीं हुई हैं। इधर कुछ दिनों के अंतराल में ग्रामीणों ने तालाब को पाटने में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी दिखाई है।

मिट्टी डालने में जुटे लोगों की कुछ ग्रामीणों ने राजस्व विभाग से शिकायत कर दी। हरकत में आए लेखपाल बिमलेश कुमार ने काम रूकवा दिया है।

लेखपाल ने कहा कि तत्कालीन लेखपाल अशोक कुमार ने दो साल पहले तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले करीब 15 लोगों को 115सी की नोटिस जारी की थी। उनका कहना है कि अगर रोकने पर अवैध कब्जा करने वाले नहीं मानेंगे तो उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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