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बादलों की दगाबाजी, किसानों की नींद हराम

Sun, 09 Aug 2015 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर Updated Sun, 09 Aug 2015 12:24 AM IST
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Clouds impound, farmers sleepless

मानसूनी माहौल में तेरह दिन से निकल रही तेज धूप में फसलें मुरझाने

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लगी हैं। आसमान में उमड़ते घुमड़ते बादल बिना बरसे ही लौट जा रहे हैं। मौसम की इस दगाबाजी से किसानों की नींद हराम है। कम वर्षा में अच्छा उत्पादन देने वाली तिल की खेती पर इस बार किसानों ने दांव लगाया है। अकेले 47,650 हेक्टेयर जमीन पर तिल का एरिया है लेकिन अगर हालात यही रहे तो बोई गई फसलें सूख जाएंगी और किसानों के अरमानों पर पानी फिर जाएगा। प्राकृतिक आपदा से बर्बाद हुई रबी फसलों की वजह से इस बार किसानों ने खरीफ में 10,300 हेक्टेयर जमीन पर तिलहन व दलहन की फसलें बोई हैं।


बीते रबी सीजन में अतिवृष्टि नेे किसानों को अच्छा खासा झटका दिया। इसमें गेहूं, चना, मटर, मसूर में भारी नुकसान हुआ और किसान तबाही की कगार पर पहुंच गया।

इसको लेकर राजस्व विभाग किसानों को आपदा राशि बांट रहा है, लेकिन पर्याप्त राशि नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। इधर किसानों ने आजीविका चलाने के लिए अधिक से अधिक क्षेत्रफल में खरीफ की फसलें बोई हैं।

लेकिन तेज धूप से मुरझाने लगीं हैं। 27 जुलाई से अब तक मौसम दगा दे रहा है। देखा जाए तो 31 जुलाई को राठ में सिर्फ तीन एमएम वर्षा हुई है। वहीं जून और जुलाई में औसतन वर्षा 206.67 एमएम रिकार्ड की गई है।

जिले का कुल प्रतिवेदित क्षेत्रफल 4,18,870 हेक्टेयर है। इसमें 3,14,470 हेक्टेयर पर खेती की जा रही है। खरीफ का क्षेत्रफल 1,03,100 हेक्टेयर है। जिले में तिलहन की फसल सर्वाधिक एरिया है। अकेले तिल का एरिया 47,650 हेक्टेयर है।

जबकि मूंगफली 197 व सोयाबीन 79 हेक्टेयर में बोया गया है। वहीं ज्वार, अरहर, उड़द, मूंग, धान व बाजरा को मिलाकर कुल 1,03,100 हेक्टेयर में आच्छादन किया गया है।

सुबह ओस पड़ने पर तो फसलें लहलहाती दिख रहीं हैं लेकिन दोपहर में फसलें मुरझाने लगी हैं। उप कृषि निदेशक चौधरी अरुण कुमार ने कहा कि रबी में झटका खा चुके किसानों ने इस बार सबसे ज्यादा खरीफ फसलें बोई हैं।

अकेले कृषि विभाग ने 158 क्विंटल तिल बीज किसानों को बेचा है। पिछले वर्ष मात्र 54 क्विंटल ही तिल बीज आया था। कम वर्षा को देखते हुए तिल की खेती पर ज्यादा जोर दिया गया है।

बरसात के दगा देने से फसलें मुरझाने लगीं है। किसानों को सलाह दी कि वह शाम के समय बौछारी सिंचाई करें, ताकि फसलें सूखने से बच सकें।
                        

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