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फसल की बर्बादी से त्रस्त कर्जदार किसान ने जान दी
अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Wed, 07 Feb 2018 12:11 AM IST
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विमलेंद्र का (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
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फसल की खराबी और कर्ज से त्रस्त किसान ने मंगलवार को खेत में लगे पेड़ पर फंदा बनाकर जान दे दी। किसान की जेब से मिले सुसाइड नोट में मरने की वजह हताशा और बीमारी बताई है। किसान ने गांव के कई लोगों से एक लाख रुपया कर्ज ले रखा था।
कस्बे के मोहाल चार थोक निवासी विमलेंद्र (33) पुत्र शिवबालक लोधी मंगलवार सुबह घर से खाना खाकर खेत गया था। खेत में लगे बबूल के पेड़ की डाल में रस्सी का फंदा डालकर आत्महत्या कर ली। आसपास खेतों में काम कर रहे किसानों ने घटना की जानकारी विमलेंद्र के पिता शिवबालक दाऊ को दी।
पिता ने बताया कि उसके पुत्र पर गांव के कुछ लोगों का करीब एक लाख रुपया कर्ज था। उसके पास तीन बीघे जमीन खेती योग्य है। इसमें उसने चने की फसल बोई थी। कीड़े लग जाने के कारण 70 फीसदी फसल खराब हो चुकी है। इससे वह हताश और निराश था। कर्ज चुकाने के लिए बेटा और बहू दोनों खेती के साथ मजदूरी करते थे। इस स्थिति में साहूकारों का कर्ज लौटाना एवं बच्चों का पालन पोषण करना बहुत मुश्किल दिखाई दे रहा था। इसी हताशा के चलते विमलेंद्र ने फांसी लगा ली।
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किसान अपने पीछे पत्नी हलकुट्टी (28) व दो मासूम दुष्यंत (6) सोनम (4) को छोड़ गया है। उप निरीक्षक काशीनाथ उपाध्याय ने बताया कि विमलेंद्र की जेब से एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें किसान ने मरने से की वजह हताशा और सास संबंधी बीमारी लिखी है।
इनसेट
तहसीलदार ने दिया मदद का भरोसा
किसान के फांसी लगाने की सूचना पर तहसीलदार रामानुज शुक्ला पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया। कहा कि किसान बीमा योजना के साथ पारिवारिक लाभ योजना सहित अन्य योजनाओं से परिवार की मदद कराई जाएगी।
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कस्बे के मोहाल चार थोक निवासी विमलेंद्र (33) पुत्र शिवबालक लोधी मंगलवार सुबह घर से खाना खाकर खेत गया था। खेत में लगे बबूल के पेड़ की डाल में रस्सी का फंदा डालकर आत्महत्या कर ली। आसपास खेतों में काम कर रहे किसानों ने घटना की जानकारी विमलेंद्र के पिता शिवबालक दाऊ को दी।
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पिता ने बताया कि उसके पुत्र पर गांव के कुछ लोगों का करीब एक लाख रुपया कर्ज था। उसके पास तीन बीघे जमीन खेती योग्य है। इसमें उसने चने की फसल बोई थी। कीड़े लग जाने के कारण 70 फीसदी फसल खराब हो चुकी है। इससे वह हताश और निराश था। कर्ज चुकाने के लिए बेटा और बहू दोनों खेती के साथ मजदूरी करते थे। इस स्थिति में साहूकारों का कर्ज लौटाना एवं बच्चों का पालन पोषण करना बहुत मुश्किल दिखाई दे रहा था। इसी हताशा के चलते विमलेंद्र ने फांसी लगा ली।
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किसान अपने पीछे पत्नी हलकुट्टी (28) व दो मासूम दुष्यंत (6) सोनम (4) को छोड़ गया है। उप निरीक्षक काशीनाथ उपाध्याय ने बताया कि विमलेंद्र की जेब से एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें किसान ने मरने से की वजह हताशा और सास संबंधी बीमारी लिखी है।
इनसेट
तहसीलदार ने दिया मदद का भरोसा
किसान के फांसी लगाने की सूचना पर तहसीलदार रामानुज शुक्ला पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया। कहा कि किसान बीमा योजना के साथ पारिवारिक लाभ योजना सहित अन्य योजनाओं से परिवार की मदद कराई जाएगी।