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अवैध रूप से बने मकानों पर चला बुलडोजर
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जरिया बस स्टैंड के पास अवैध निर्माणाधीन भवन को गिराता बुलडोजर।
- फोटो : HAMIRPUR
सरीला (हमीरपुर)। नवीन परती जमीन पर अवैध रूप से बने मकानों पर बुलडोजर चला दिया गया। इससे अफरातफरी का माहौल रहा।
जरिया मार्ग पर नवीन परती की आरक्षित जमीन गाटा संख्या 1700 पर कई साल पहले दादौं निवासी वीरेंद्र के पिता प्रभुदयाल व लाल सिंह के पिता रामेश्वर ने मकान बनाए थे। प्रभुदयाल और रामेश्वर का निधन हो चुका है। इन दोनों के परिवार के लोग अभी इन मकानों में रह रहे हैं। नगर पंचायत की ओर से दायर मुकदमे में 2003 में न्यायालय उप जिलाधिकारी ने इनकी बेदखली के आदेश दिए थे, लेकिन दोनों कब्जा धारक उच्च न्यायालय चले गए थे। 2016 में न्यायालय ने एसडीएम के आदेश को सही बताते हुए नवीन परती पर काबिज दबंगों के बेदखली के आदेश को वैध करार दिया था। फिर भी अब तक इनके कब्जे नहीं हटाए गए थे। गुरुवार को तहसीलदार श्यामनारायण शुक्ला ने थाना पुलिस के साथ पहुंचकर नगर पंचायत कर्मियों से बुलडोजर से मकान ध्वस्त करा दिए। इस दौरान अवैध कब्जेदारों व अफसरों के बीच नोकझोंक होती रही। एसडीएम खालिद अंजुम ने बताया कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे चिह्नित कर लिए गए हैं। इन्हें हटाया जा रहा है।
नवीन परती जमीन से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई में प्रधानमंत्री शहरी आवास भी चपेट में आ गया।
गुरुवार को जरिया बस स्टैंड के पास दशकों से काबिज कब्जे हटाने के दौरान वीरेंद्र का निर्माणाधीन प्रधानमंत्री शहरी आवास भी ध्वस्त हो गया। इस आवास की जमीन के चयन में नगर पंचायत और राजस्व विभाग की लापरवाही सामने आई है। इन विभागों ने इस जमीन पर आवास बनाने को मंजूरी दी। लेखपाल द्वारा जमीन की आख्या व नगर पंचायत की ओर से मंजूरी का सरकारी शुल्क लेकर रसीद दी जाती है। निर्माण से पूर्व जियो टैग भी किया जाता है। फिर इस अवैध कब्जे की जमीन पर मंजूरी कैसे दे दी गई। वीरेंद्र ने बताया कि आवास की अभी दो किस्त आईं हैं। तीसरी आना बाकी है। नगर पंचायत की ईओ दीपालिका यादव ने फोन ही नहीं उठाया। एसडीएम खालिद अंजुम ने बताया कि मामला गंभीर है। तहसीलदार को जांच के निर्देश दिए हैं। जो भी अधिकारी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्यवाही भी की जाएगी। वहीं डूडा के परियोजना अधिकारी सुधीर कुमार सिंह का कहना है कि अगर लाभार्थी ने गलत स्थान पर आवास बनाया है तो टूटना तय है। कहा लाभार्थी को नया आवास बनाना होगा।
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जरिया मार्ग पर नवीन परती की आरक्षित जमीन गाटा संख्या 1700 पर कई साल पहले दादौं निवासी वीरेंद्र के पिता प्रभुदयाल व लाल सिंह के पिता रामेश्वर ने मकान बनाए थे। प्रभुदयाल और रामेश्वर का निधन हो चुका है। इन दोनों के परिवार के लोग अभी इन मकानों में रह रहे हैं। नगर पंचायत की ओर से दायर मुकदमे में 2003 में न्यायालय उप जिलाधिकारी ने इनकी बेदखली के आदेश दिए थे, लेकिन दोनों कब्जा धारक उच्च न्यायालय चले गए थे। 2016 में न्यायालय ने एसडीएम के आदेश को सही बताते हुए नवीन परती पर काबिज दबंगों के बेदखली के आदेश को वैध करार दिया था। फिर भी अब तक इनके कब्जे नहीं हटाए गए थे। गुरुवार को तहसीलदार श्यामनारायण शुक्ला ने थाना पुलिस के साथ पहुंचकर नगर पंचायत कर्मियों से बुलडोजर से मकान ध्वस्त करा दिए। इस दौरान अवैध कब्जेदारों व अफसरों के बीच नोकझोंक होती रही। एसडीएम खालिद अंजुम ने बताया कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे चिह्नित कर लिए गए हैं। इन्हें हटाया जा रहा है।
नवीन परती जमीन से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई में प्रधानमंत्री शहरी आवास भी चपेट में आ गया।
गुरुवार को जरिया बस स्टैंड के पास दशकों से काबिज कब्जे हटाने के दौरान वीरेंद्र का निर्माणाधीन प्रधानमंत्री शहरी आवास भी ध्वस्त हो गया। इस आवास की जमीन के चयन में नगर पंचायत और राजस्व विभाग की लापरवाही सामने आई है। इन विभागों ने इस जमीन पर आवास बनाने को मंजूरी दी। लेखपाल द्वारा जमीन की आख्या व नगर पंचायत की ओर से मंजूरी का सरकारी शुल्क लेकर रसीद दी जाती है। निर्माण से पूर्व जियो टैग भी किया जाता है। फिर इस अवैध कब्जे की जमीन पर मंजूरी कैसे दे दी गई। वीरेंद्र ने बताया कि आवास की अभी दो किस्त आईं हैं। तीसरी आना बाकी है। नगर पंचायत की ईओ दीपालिका यादव ने फोन ही नहीं उठाया। एसडीएम खालिद अंजुम ने बताया कि मामला गंभीर है। तहसीलदार को जांच के निर्देश दिए हैं। जो भी अधिकारी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्यवाही भी की जाएगी। वहीं डूडा के परियोजना अधिकारी सुधीर कुमार सिंह का कहना है कि अगर लाभार्थी ने गलत स्थान पर आवास बनाया है तो टूटना तय है। कहा लाभार्थी को नया आवास बनाना होगा।
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