{"_id":"629e45d199d67f5d783a16cb","slug":"crime-hamirpur-news-knp7009799107","type":"story","status":"publish","title_hn":"युवती और युवक ने जान दी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
युवती और युवक ने जान दी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मौदहा। पति से विवाद पर युवती और आर्थिक तंगी से ऊबकर युवक ने जान दे दी। दोनों के परिजनों का रोकर बुरा हाल है।
मांचा गांव निवासी 19 वर्षीय शाहीन बानो की शादी दो वर्ष पूर्व गांव के ही रज्जब अली के साथ हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद ससुरालियों से अनबन होने लगी। पति नौकरी की तलाश में रायपुर चला गया था। पिता कमर अली शाहीन बानो को अपने घर ले आया था। सोमवार सुबह उसने नीम के पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसके चार माह का बेटा है। कोतवाल पवन कुमार पटेल ने बताया कि पत्नी व पति में तनाव चल रहा था। इस कारण शाहीन बानो ने जान दे दी।
वहीं, सिसोलर गांव निवासी 24 वर्षीय जितेंद्र उर्फ गोरेलाल ने घर के निकट एक पेड़ पर फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों ने बताया कि वह गांव के एक शादी समारोह में गया था। वहां से लौटते समय जान दे दी। चार भाई व दो बहनों में वह तीसरे नंबर का था। आर्थिक तंगी के कारण वह परेशान रहता था। वह फेरी लगालकर आर्टिफिशियल आभूषण बेचता था। महंगाई के चलते परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था।
विज्ञापन
मांचा गांव निवासी 19 वर्षीय शाहीन बानो की शादी दो वर्ष पूर्व गांव के ही रज्जब अली के साथ हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद ससुरालियों से अनबन होने लगी। पति नौकरी की तलाश में रायपुर चला गया था। पिता कमर अली शाहीन बानो को अपने घर ले आया था। सोमवार सुबह उसने नीम के पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसके चार माह का बेटा है। कोतवाल पवन कुमार पटेल ने बताया कि पत्नी व पति में तनाव चल रहा था। इस कारण शाहीन बानो ने जान दे दी।
वहीं, सिसोलर गांव निवासी 24 वर्षीय जितेंद्र उर्फ गोरेलाल ने घर के निकट एक पेड़ पर फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों ने बताया कि वह गांव के एक शादी समारोह में गया था। वहां से लौटते समय जान दे दी। चार भाई व दो बहनों में वह तीसरे नंबर का था। आर्थिक तंगी के कारण वह परेशान रहता था। वह फेरी लगालकर आर्टिफिशियल आभूषण बेचता था। महंगाई के चलते परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था।
विज्ञापन