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किसानों को खरीफ की प्याज ज्यादा मुफीद साबित
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पत्योरा (हमीरपुर)। जिले में कृषि विज्ञान केंद्र के संचालित होने से किसानों को वैज्ञानिक तकनीक मिलने लगी है। किसानों अपनी माली हालत में सुधार के साथ अच्छा मुनाफा हो रहा है। अन्ना मवेशियों से परेशान किसानों को खरीफ की प्याज ज्यादा मुफीद साबित हो रही है। ऐसे ही एक चंदौखी गांव के भूमिहीन किसान गोविंद कुशवाहा ने दो बीघा में बटाई पर प्याज लगाकर तीन लाख रुपये का मुनाफा कमाया है।
विकासखंड सुमेरपुर के चंदौखी निवासी किसान गोविंद कुशवाहा ने कहा कि वह भूमिहीन है। गांव में जमीन बटाई पर लेकर खेती करता है। करीब दो वर्षों से उसका कृषि विज्ञान केंद्र कुरारा आना जाना है। हर बैठक में वह वैज्ञानिक आधार से खेती करने के गुर सीख लेता है। बताया कि खरीफ सीजन में प्याज की खेती करने के लिए उसे कृषि वैज्ञानिक डा. प्रशांत ने बताया और सहयोग किया।
उन्हीं की प्रेरणा से उसने प्याज की खेती की। जिसका उसे भरपूर लाभ मिला है। बताया कि दो बीघे खेत में करीब 50 क्विंटल प्याज का उत्पादन किया है। जो 60 से 70 रुपये प्रति किलो बेची है। जिसमें करीब तीन लाख रुपये की बिक्री की है। प्याज का उत्पादन के साथ लाभ देख गांव के सभी किसान चकित हैं।
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अन्ना मवेशियों का डर नहीं
गोविंद ने कहा कि यही ऐसी फसल है जिसे न तो अन्ना मवेशी खाते हैं और न ही जंगली सूअर से कोई नुकसान होता है। बिना रखवाली के पहली बार खरीफ सीजन में प्याज लगाई थी। जिसमें अनुभव की कमी केवीके ने पूरी कर दी। इधर अधिक बारिश के कारण खरपतवार होने पर दवा समय से नहीं डाल पाया। जिससे लेवर से निराई कराने में ज्यादा खर्च आ गया। कहा कि करीब 40 हजार की लागत आई और उत्पादन भी मनमाफिक नहीं हुआ। फिलहाल बरसात में खाली पड़े खेतों से तीन लाख रुपये कमा लेना उसके लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं है। अब दो बीघे में टमाटर लगाया है। जो गर्मी में तैयार होगी।
32 किसानों ने लगाई प्याज
कृषि वैज्ञानिक डा. प्रशांत ने कहा कि जिले में करीब 32 किसानों ने खरीफ में प्याज लगाई थी और सभी ने अच्छा मुनाफा कमाया है। सबसे अधिक चंदौखी के किसान ने दो बीघे में प्याज की खेती की और करीब तीन लाख में बेची है। कहा कि प्रति हेक्टेयर पर करीब 8 से 10 किलो बीज की नर्सरी तैयार करनी पड़ती है। सबसे जटिल कार्य नर्सरी तैयार करना है। जो बारिश के सीजन में सभी किसान नहीं कर पाते हैं। बारिश में खरपतवार भी उगता है। जिसे समय पर खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव करना चाहिए। कहा कि प्रति हेक्टेयर करीब 400 से 500 क्विंटल तक इसका उत्पादन हो जाता है। इसमें मुख्यत एग्री फाउंड डार्क रेड, भीमा शक्ति, भीमा लाइट आदि प्रजातियां अच्छा उत्पादन देने वाली हैं।
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विकासखंड सुमेरपुर के चंदौखी निवासी किसान गोविंद कुशवाहा ने कहा कि वह भूमिहीन है। गांव में जमीन बटाई पर लेकर खेती करता है। करीब दो वर्षों से उसका कृषि विज्ञान केंद्र कुरारा आना जाना है। हर बैठक में वह वैज्ञानिक आधार से खेती करने के गुर सीख लेता है। बताया कि खरीफ सीजन में प्याज की खेती करने के लिए उसे कृषि वैज्ञानिक डा. प्रशांत ने बताया और सहयोग किया।
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उन्हीं की प्रेरणा से उसने प्याज की खेती की। जिसका उसे भरपूर लाभ मिला है। बताया कि दो बीघे खेत में करीब 50 क्विंटल प्याज का उत्पादन किया है। जो 60 से 70 रुपये प्रति किलो बेची है। जिसमें करीब तीन लाख रुपये की बिक्री की है। प्याज का उत्पादन के साथ लाभ देख गांव के सभी किसान चकित हैं।
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अन्ना मवेशियों का डर नहीं
गोविंद ने कहा कि यही ऐसी फसल है जिसे न तो अन्ना मवेशी खाते हैं और न ही जंगली सूअर से कोई नुकसान होता है। बिना रखवाली के पहली बार खरीफ सीजन में प्याज लगाई थी। जिसमें अनुभव की कमी केवीके ने पूरी कर दी। इधर अधिक बारिश के कारण खरपतवार होने पर दवा समय से नहीं डाल पाया। जिससे लेवर से निराई कराने में ज्यादा खर्च आ गया। कहा कि करीब 40 हजार की लागत आई और उत्पादन भी मनमाफिक नहीं हुआ। फिलहाल बरसात में खाली पड़े खेतों से तीन लाख रुपये कमा लेना उसके लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं है। अब दो बीघे में टमाटर लगाया है। जो गर्मी में तैयार होगी।
32 किसानों ने लगाई प्याज
कृषि वैज्ञानिक डा. प्रशांत ने कहा कि जिले में करीब 32 किसानों ने खरीफ में प्याज लगाई थी और सभी ने अच्छा मुनाफा कमाया है। सबसे अधिक चंदौखी के किसान ने दो बीघे में प्याज की खेती की और करीब तीन लाख में बेची है। कहा कि प्रति हेक्टेयर पर करीब 8 से 10 किलो बीज की नर्सरी तैयार करनी पड़ती है। सबसे जटिल कार्य नर्सरी तैयार करना है। जो बारिश के सीजन में सभी किसान नहीं कर पाते हैं। बारिश में खरपतवार भी उगता है। जिसे समय पर खरपतवार नाशक दवा का छिड़काव करना चाहिए। कहा कि प्रति हेक्टेयर करीब 400 से 500 क्विंटल तक इसका उत्पादन हो जाता है। इसमें मुख्यत एग्री फाउंड डार्क रेड, भीमा शक्ति, भीमा लाइट आदि प्रजातियां अच्छा उत्पादन देने वाली हैं।