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आषाढ़ माह में ज्येष्ठ जैसी लू
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भरुआसुमेरपुर। आषाढ़ माह में ज्येष्ठ जैसी लू चलने व चटख धूप निकलने से आम जनमानस घरों से बाहर निकलने का साहस नहीं जुटा पा रहा है। वहीं पेट दर्द, उल्टी, दस्त जैसी बीमारियां फैल रही हैं। बीते दिनों हुई बारिश के बाद बोई गई ज्वार, अरहर, उड़द, मूंग, तिल की फसलें अंकुरित होते ही नष्ट हो रही हैं। जिससे किसान चिंतित हैं।
आषाढ़ माह के प्रथम पखवाड़े के समाप्त होने पर अब महज चंद दिन ही बचे हैं। ऐसे में किसी को आभास नहीं हो रहा है कि यह बरसात का महीना है। बुंदेली धरा पर मौसम का अजीब हाल है। दिन चढ़ते ही जेठ की तपन व लू का एहसास होने लगता है। मौसम का यह रौद्र रूप देखकर लोग घरों से बाहर आने में हिचकते हैं। भीषण गर्मी के कारण पेट दर्द, उल्टी, दस्त जैसी बीमारियों ने पैर पसारे हैं।
अस्पतालों में मरीजों की भरमार बनी रहती है। किसान सुरेश यादव, लक्ष्मी नारायण यादव, बच्चा गुप्ता, विनय यादव, विद्यासागर, मुन्ना मिश्रा, सुंदरलाल, गयाप्रसाद, राकेश सोनकर ने बताया बीते पखवाड़े हुई झमाझम बारिश के बाद खरीफ की फसलें बोई गईं कि आगे बारिश होने से फसलों को लाभ और उत्पादन अधिक होगा। लेकिन विगत दिवस खंड वर्षा होने से क्षेत्र में बारिश नहीं हो सकी है। ऐमें में ज्वार, अरहर, उड़द, मूंग, तिल आदि की फसलें अंकुरित होते ही मौसम के रौद्र रूप के कारण नष्ट हो रही हैं। इससे उनका नुकसान होना तय है।
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उधर कुछ किसान फसल बचाने के लिए खेतों में बोई गई फसलों की सिंचाई करने में जुटे हैं। किसानों के अनुसार बारिश न होने से तिल की अंकुरित फसल नष्ट हो चुकी है। तिल की फसल किसानों को बारिश के बाद दोबारा बुआई करनी पड़ेगी। उधर बारिश न होने से तालाबों नालों में पानी नदारत है। क्षेत्र के सभी नहर व राजकीय नलकूप बंद हैं। इससे किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
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आषाढ़ माह के प्रथम पखवाड़े के समाप्त होने पर अब महज चंद दिन ही बचे हैं। ऐसे में किसी को आभास नहीं हो रहा है कि यह बरसात का महीना है। बुंदेली धरा पर मौसम का अजीब हाल है। दिन चढ़ते ही जेठ की तपन व लू का एहसास होने लगता है। मौसम का यह रौद्र रूप देखकर लोग घरों से बाहर आने में हिचकते हैं। भीषण गर्मी के कारण पेट दर्द, उल्टी, दस्त जैसी बीमारियों ने पैर पसारे हैं।
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अस्पतालों में मरीजों की भरमार बनी रहती है। किसान सुरेश यादव, लक्ष्मी नारायण यादव, बच्चा गुप्ता, विनय यादव, विद्यासागर, मुन्ना मिश्रा, सुंदरलाल, गयाप्रसाद, राकेश सोनकर ने बताया बीते पखवाड़े हुई झमाझम बारिश के बाद खरीफ की फसलें बोई गईं कि आगे बारिश होने से फसलों को लाभ और उत्पादन अधिक होगा। लेकिन विगत दिवस खंड वर्षा होने से क्षेत्र में बारिश नहीं हो सकी है। ऐमें में ज्वार, अरहर, उड़द, मूंग, तिल आदि की फसलें अंकुरित होते ही मौसम के रौद्र रूप के कारण नष्ट हो रही हैं। इससे उनका नुकसान होना तय है।
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उधर कुछ किसान फसल बचाने के लिए खेतों में बोई गई फसलों की सिंचाई करने में जुटे हैं। किसानों के अनुसार बारिश न होने से तिल की अंकुरित फसल नष्ट हो चुकी है। तिल की फसल किसानों को बारिश के बाद दोबारा बुआई करनी पड़ेगी। उधर बारिश न होने से तालाबों नालों में पानी नदारत है। क्षेत्र के सभी नहर व राजकीय नलकूप बंद हैं। इससे किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है।