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कम लागत में धान की बुआई, भूजल की करें बचत

Mon, 28 Jun 2021 10:30 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 28 Jun 2021 10:30 PM IST
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कुरारा (हमीरपुर)। कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डा. शालिनी ने खेती में कम लागत व भूगर्भ जल बचाने के लिए किसानों को धान की फसल की सीधी बुआई करने की सलाह दी है। कहा धान की खेती जलभराव वाले खेत में करना ज्यादा लाभदायक रहेगा। उन्होंने कहा कुछ वर्षों में जिले के किसानों में धान की खेती के प्रति लगाव बढ़ा है। जबकि यह क्षेत्र दलहनी व तिलहनी फसलों की के लिए माना जाता है। इन फसलों को करने से भूजल की बचत होती है। उन्होंने धान की खेती में कम लागत में अच्छा उत्पादन लेने के सुझाव दिए।
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कहा धान की सीधी बुआई करें। इस तकनीक से रोपाई करने से फसल समय से तैयार हो जाती है। अगली फसल के लिए खेत खाली हो जाता है। सीधी बुआई मानसून से पहले कर देनी चाहिए। इससे अधिक नमी व जलभराव से पौधे प्रभावित नहीं होते हैं। कहा मोटे धान वाली किस्म के लिए 30 से 35 किलो ग्राम व मध्यम धान की किस्म के लिए 25 से 30 किलो ग्राम और छोटे महीन दाने वाले धान की किस्म के लिए 20 से 25 किलो ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होते हैं। वैज्ञानिक ने कहा बुआई से पूर्व बीज का उपचार अवश्य करें।
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इसके बाद सीड ड्रिल से 3 से 5 सेंटीमीटर गहराई में सीधी बुआई कर सकते हैं। इससे उत्पादन पर प्रभाव पड़ता है। सीधी बुआई वाली धान फसल में 80 से 100 किलो नाइट्रोजन, 40 किलो फास्फोरस व 20 किलो पोटाश की जरूरत प्रति हेक्टेयर पड़ती है। धान की सीधी बुआई कर पानी की 25 से 35 प्रतिशत बचत कर सकते हैं। (संवाद)
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