'खनन का खेल' ईडी के आने से मौंरग का अवैध खनन कराने वालों के हलक सूखे
हमीरपुर में पिछले 10 सालों में मौरंग खनन में एक के बाद एक खेल हुए हैं। जिसमें अधिकारी से लेकर मंत्री और उनके संतरी भी कहीं न कहीं शामिल हैं। इतना ही नहीं कई बड़े कारोबारी इस कारोबार में सिंडीकेट चलाने में सफल रहे। ऐसे लोगों ने अकूत दौलत कमाई है। मौरंग खनन पट्टा धारकों के साथ कई लोग अपरोक्ष रूप से इस धंधे में हिस्सेदार रह चुके हैं। इसमें सत्तादलों के नेता भी खनन में हिस्सेदारी तय कर कमाई करने में आगे रहे हैं।
फिलहाल इन लोगों के नाम उजागर नहीं हुए हैं। अंधाधुंध मौरंग खनन कर पर्यावरण के साथ खिलवाड़ किया गया। सीबीआई ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को एफआईआर की प्रति भेज दी है। जिले में ईडी के अगले सप्ताह तक आने की संभावना के चलते एफआईआर में दर्ज लोगों के साथ बतौर पार्टनर इस अवैध खनन में जुड़े रहे लोगों में खलबली है। जनहित याचिकाकर्ता विजय द्विवेदी एडवोकेट ने बताया कि सीबीआई को वह ऐसे तमाम तथ्य दे चुके हैं।
बताया कि जनहित याचिका में हाईकोर्ट ने 63 मौरंग खनन के पट्टे निरस्त किए थे। इन पट्टा धारकों के साथ अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोगों पर ईडी की तलवार लटक सकती है। बताया कि वर्ष 2009 में करीब 60 मौरंग के पट्टे आवंटित किए गए थे। इन पट्टों की अवधि तीन वर्ष की थी। जिनका समय वर्ष 2012 तक का था। कहा कि इसी बीच अनगिनत पट्टे रेवड़ी के तरह आवंटित किए गए।
जिसे बाद में उच्च न्यायालय द्वारा करीब 63 पट्टे निरस्त किए गए थे। बताया कि वर्ष 2009 से 2012 की अवधि वाले ज्यादातर पट्टे बांदा जिले के मौरंग व्यवसाइयों व सफेदपोशों के हुए हैं। इन्हीं पट्टाधारकों ने सिंडीकेट चलाया। पिछले दो जनवरी को सीबीआई ने जो एफआईआर दर्ज कराई है उसमें वर्ष 2012 के पट्टों का जिक्र किया है।