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Hamirpur News: मुसीबतों की बाढ़... फसल चौपट, मदद की दरकार
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हमीरपुर। मौसम विभाग के शुरुआती रुझान में इस बार सूखा की संभावना को देखते हुए किसानों ने अत्यधिक मात्रा में तिल की फसल बोई लेकिन बारिश ने इस बार बीते तीन सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। सितंबर माह तक हुई मूसलाधार बारिश से मुसीबतों की बाढ़ आ गई है। तिल, मूंग, उड़द सहित जहां मूंगफली की फसलें चौपट हो गई हैं, वहीं किसानों को अब प्रशासनिक मदद की दरकार है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 1,92,448 हेक्टेयर में खरीफ फसलें बोई गई हैं। इनमें 95,590 हेक्टेयर तिल, 32,814 हेक्टेयर मूंगफली, 8,010 हेक्टेयर उड़द और 11,487 हेक्टेयर मूंग शामिल है। लगातार बारिश और जलभराव से तिल, मूंग, मूंगफली और उड़द की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
वर्ष 2024 में सितंबर माह में कुल 307.66 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। साल 2025 में मात्र 141.53 एमएम बारिश हुई थी, वहीं इस वित्तीय वर्ष सितंबर माह में अब तक करीब 450 एमएम से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इससे किसानों की मेहनत में पानी फेर दिया है।
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फोटो 28 एचएएमपी 17- कल्लू दीक्षित।
70 बीघा तिल की फसल बर्बाद
सूखे के आसार को देखते हुए इस बार 70 बीघे में तिल की फसल बोई थी लेकिन लगातार बारिश व अतिवृष्टि के चलते पूरी फसल चौपट हो गई है। - कल्लू दीक्षित, पौथिया।
फोटो 28 एचएएमपी 18- अनंता सिंह।
अब तक नहीं आए कोई सर्वेयर
12 बीघे में तिल की फसल बोई थी। लगातार बारिश के चलते पूरी फसल चौपट हो गई है। फसल का बीमा भी नहीं कराया था। करीब डेढ़ लाख से अधिक का नुकसान हुआ है। राजस्व विभाग की कोई टीम सर्वे को नहीं आई है। - अनंता सिंह, पत्योरा-सुमेरपुर।
जिले में तीन साल में हुई तीन माह में बारिश
वर्ष 2024 - कुल वर्ष - वर्ष 2025 - वर्ष 2026
जुलाई - 280.33 - 562 - 331.33
अगस्त - 215.66 - 209 - 711.33
सितंबर - 307.66 - 141.53 - 450
नोट- वर्षा मिलीमीटर में
30 हजार किसानों ने किए दावे
जिन किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया है, वे लोग जल्द अपने दावे संबंधित बीमा कंपनी को कर दें। अब तक कुल 30 हजार लोगों ने दावे किए हैं। इसके अलावा राजस्व व कृषि विभाग की टीमें सर्वे कार्य में जुटी हैं। सबसे अधिक तिल की फसल को नुकसान होने की संभावना है। - डॉ. हरिशंकर, जिला कृषि अधिकारी।
18 से अधिक ग्रामीणों के सिर से ढह गया आशियाना
फोटो 28 एचएएमपी 19- गहरौली गांव में वर्षा के दौरान पेड़ गिरने से गिरा मकान। संवाद
गहरौली (हमीरपुर)। विकासखंड मुस्करा के गहरौली कस्बा में 48 घंटे हुई बारिश के चलते करीब 18 से अधिक कच्चे मकान जमींदोज हो गए। इससे लोगों की जहां घर-गृहस्थी का सामान नष्ट हो गया, वहीं सिर ढकने तक की जगह नहीं बची है। पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। कस्बा निवासी रामकुमार, पंचम, उदयसिंह, अशोक, रामबाबू, दुर्गा प्रसाद, रामप्रताप, जयरानी, दयावती, उमाकांती, मालती, लक्ष्मण सहित करीब डेढ़ दर्जन मकान बारिश के चलते जमींदोज हो गए हैं। लेखपाल हिमांशु कुमार ने बताया कि सर्वे किया जा रहा है। करीब 12 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनकी सूची तैयार कर उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। शीघ्र ही लोगों को राहत दिलाई जाएगी। (संवाद)
इंगोहटा अंडरपास जलमग्न, छह गांवों का कटा संपर्क
रबी फसलों की बोआई पर मंडराया संकट, किसानों को आर्थिक नुकसान
फोटो 28 एचएएमपी 20- इंगोहटा के पास निर्माणाधीन अंडर ब्रिज में भरा पानी। ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
भरुआ सुमेरपुर। कानपुर-बांदा रेल मार्ग पर इंगोहटा और आसपास के गांवों में दो दिन पूर्व हुई मूसलाधार बारिश के बाद जलभराव की समस्या गंभीर हो गई है। रेलवे ट्रैक के नीचे बने अंडरपास पानी से लबालब भर गए हैं। अंडरपास संख्या 26 तथा निर्माणाधीन गेट संख्या 25 में कई फीट पानी भरा होने से आवागमन पूरी तरह ठप है। इससे छह गांवों का संपर्क कट गया है।
अंडरपास में पानी भरने से इंगोहटा से खेतों और खलिहानों की ओर जाने वाले रास्ते बंद हो गए हैं। इसके अलावा अरतरा समेत आसपास के करीब छह गांवों का संपर्क मार्ग भी बाधित हो गया है। जलभराव इतना अधिक है कि पैदल राहगीरों, दोपहिया वाहनों और मवेशियों का निकलना भी संभव नहीं है। ग्रामीणों को लंबा वैकल्पिक रास्ता तय करके आवागमन करना पड़ रहा है।
ग्रामीण मोहनलाल, शिवकुमार, लल्ला सिंह, कमलेश कुमार आदि के अनुसार, पहले बारिश का पानी हाईवे के किनारे प्राकृतिक ढलान से होकर नाले में चला जाता था लेकिन अब जेके सीमेंट फैक्टरी की स्थापना और निर्माण कार्य के बाद पुरानी जलनिकासी व्यवस्था बाधित हो गई है। इससे आसपास के सैकड़ों बीघा खेतों का पानी रेलवे लाइन के दूसरी ओर स्थित नाले तक पहुंचने के लिए अंडरपास की ओर बह रहा है। पर्याप्त निकासी व्यवस्था न होने से यहां भारी जलभराव हो गया है। लोगों ने रेलवे प्रशासन से अंडरपास में पंप सेट लगाकर तत्काल पानी निकलवाने तथा क्षेत्र में स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।
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कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 1,92,448 हेक्टेयर में खरीफ फसलें बोई गई हैं। इनमें 95,590 हेक्टेयर तिल, 32,814 हेक्टेयर मूंगफली, 8,010 हेक्टेयर उड़द और 11,487 हेक्टेयर मूंग शामिल है। लगातार बारिश और जलभराव से तिल, मूंग, मूंगफली और उड़द की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
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वर्ष 2024 में सितंबर माह में कुल 307.66 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। साल 2025 में मात्र 141.53 एमएम बारिश हुई थी, वहीं इस वित्तीय वर्ष सितंबर माह में अब तक करीब 450 एमएम से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इससे किसानों की मेहनत में पानी फेर दिया है।
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फोटो 28 एचएएमपी 17- कल्लू दीक्षित।
70 बीघा तिल की फसल बर्बाद
सूखे के आसार को देखते हुए इस बार 70 बीघे में तिल की फसल बोई थी लेकिन लगातार बारिश व अतिवृष्टि के चलते पूरी फसल चौपट हो गई है। - कल्लू दीक्षित, पौथिया।
फोटो 28 एचएएमपी 18- अनंता सिंह।
अब तक नहीं आए कोई सर्वेयर
12 बीघे में तिल की फसल बोई थी। लगातार बारिश के चलते पूरी फसल चौपट हो गई है। फसल का बीमा भी नहीं कराया था। करीब डेढ़ लाख से अधिक का नुकसान हुआ है। राजस्व विभाग की कोई टीम सर्वे को नहीं आई है। - अनंता सिंह, पत्योरा-सुमेरपुर।
जिले में तीन साल में हुई तीन माह में बारिश
वर्ष 2024 - कुल वर्ष - वर्ष 2025 - वर्ष 2026
जुलाई - 280.33 - 562 - 331.33
अगस्त - 215.66 - 209 - 711.33
सितंबर - 307.66 - 141.53 - 450
नोट- वर्षा मिलीमीटर में
30 हजार किसानों ने किए दावे
जिन किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया है, वे लोग जल्द अपने दावे संबंधित बीमा कंपनी को कर दें। अब तक कुल 30 हजार लोगों ने दावे किए हैं। इसके अलावा राजस्व व कृषि विभाग की टीमें सर्वे कार्य में जुटी हैं। सबसे अधिक तिल की फसल को नुकसान होने की संभावना है। - डॉ. हरिशंकर, जिला कृषि अधिकारी।
18 से अधिक ग्रामीणों के सिर से ढह गया आशियाना
फोटो 28 एचएएमपी 19- गहरौली गांव में वर्षा के दौरान पेड़ गिरने से गिरा मकान। संवाद
गहरौली (हमीरपुर)। विकासखंड मुस्करा के गहरौली कस्बा में 48 घंटे हुई बारिश के चलते करीब 18 से अधिक कच्चे मकान जमींदोज हो गए। इससे लोगों की जहां घर-गृहस्थी का सामान नष्ट हो गया, वहीं सिर ढकने तक की जगह नहीं बची है। पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। कस्बा निवासी रामकुमार, पंचम, उदयसिंह, अशोक, रामबाबू, दुर्गा प्रसाद, रामप्रताप, जयरानी, दयावती, उमाकांती, मालती, लक्ष्मण सहित करीब डेढ़ दर्जन मकान बारिश के चलते जमींदोज हो गए हैं। लेखपाल हिमांशु कुमार ने बताया कि सर्वे किया जा रहा है। करीब 12 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनकी सूची तैयार कर उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। शीघ्र ही लोगों को राहत दिलाई जाएगी। (संवाद)
इंगोहटा अंडरपास जलमग्न, छह गांवों का कटा संपर्क
रबी फसलों की बोआई पर मंडराया संकट, किसानों को आर्थिक नुकसान
फोटो 28 एचएएमपी 20- इंगोहटा के पास निर्माणाधीन अंडर ब्रिज में भरा पानी। ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
भरुआ सुमेरपुर। कानपुर-बांदा रेल मार्ग पर इंगोहटा और आसपास के गांवों में दो दिन पूर्व हुई मूसलाधार बारिश के बाद जलभराव की समस्या गंभीर हो गई है। रेलवे ट्रैक के नीचे बने अंडरपास पानी से लबालब भर गए हैं। अंडरपास संख्या 26 तथा निर्माणाधीन गेट संख्या 25 में कई फीट पानी भरा होने से आवागमन पूरी तरह ठप है। इससे छह गांवों का संपर्क कट गया है।
अंडरपास में पानी भरने से इंगोहटा से खेतों और खलिहानों की ओर जाने वाले रास्ते बंद हो गए हैं। इसके अलावा अरतरा समेत आसपास के करीब छह गांवों का संपर्क मार्ग भी बाधित हो गया है। जलभराव इतना अधिक है कि पैदल राहगीरों, दोपहिया वाहनों और मवेशियों का निकलना भी संभव नहीं है। ग्रामीणों को लंबा वैकल्पिक रास्ता तय करके आवागमन करना पड़ रहा है।
ग्रामीण मोहनलाल, शिवकुमार, लल्ला सिंह, कमलेश कुमार आदि के अनुसार, पहले बारिश का पानी हाईवे के किनारे प्राकृतिक ढलान से होकर नाले में चला जाता था लेकिन अब जेके सीमेंट फैक्टरी की स्थापना और निर्माण कार्य के बाद पुरानी जलनिकासी व्यवस्था बाधित हो गई है। इससे आसपास के सैकड़ों बीघा खेतों का पानी रेलवे लाइन के दूसरी ओर स्थित नाले तक पहुंचने के लिए अंडरपास की ओर बह रहा है। पर्याप्त निकासी व्यवस्था न होने से यहां भारी जलभराव हो गया है। लोगों ने रेलवे प्रशासन से अंडरपास में पंप सेट लगाकर तत्काल पानी निकलवाने तथा क्षेत्र में स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है।