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10 दिनों में भूख से 50 मवेशियों की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला हमीरपुर
Updated Thu, 02 Mar 2017 11:47 PM IST
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गहरौली गांव में बाड़े के अंदर बंद अन्ना मवेशी।
- फोटो : Amar ujala
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अन्ना प्रथा रोकने के प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं। जिले में छुट्टा कर दिए गए मवेशी चारा के अभाव में मौत के मुंह में समा रहे हैं। 10 दिनों में करीब 50 अन्ना मवेशी दम तोड़ चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह इनकी सड़ांध फैली है। हालात ये हैं कि जिले का पशु धन धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है।
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यह स्थिति तब है जब पशुपालन विभाग ने बुंदेलखंड विशेष पैकेज से गांवों में चौपाल लगाकर इस कुप्रथा को रोकने का प्रयास भी किया। इस पर करीब 12 लाख रुपये भी खर्च किए। वहीं, जिलास्तर पर होने वाली कृषि गोष्ठियों में भी मवेशियों को छोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई। गोष्ठियों को जरिए पशुपालन विभाग ने बताया अन्ना प्रथा से पशुओं की नस्ल खराब होगी और दुग्ध उत्पादन भी प्रभावित होगा। लेकिन इन सबके बावजूद सारे प्रयास धरे रह गए। यूं तो पूरे बुंदेलखंड में जानवरों को खुला छोड़ने की प्रथा लंबे समय से चली आ रही है।
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इधर, करीब दो साल से पशुपालकों ने ज्यादातर मवेशी छुट्टा कर दिए हैं। यह छुट्टा जानवर किसानों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। शहर हो या गांव हर जगह गाय, बैल व बछड़े सड़कों पर डेरा जमाए मिल जाएंगे। जिससे आए दिन दुर्घटना की संभावना रहती है। यही नहीं, मंडियों में भी इन जानवरों की धमा चौकड़ी जारी है। पशुपालन विभाग के अनुसार जिले में 2,69,513 गाय, बैल व 1,99,533 भैंस हैं। विभाग के अनुसार, भैंसों के अलावा अन्य जानवरों को खुला छोड़ दिया गया है।
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बाड़े में बंद मवेशियों के मरने का क्रम जारी
गहरौली। गांव सहित अन्य गांवों के किसानों ने अपनी फसलों को बचाने के लिए एक स्थान पर अन्ना मवेशियों को बंद कर रखा है। ताकि फसलें बचाई जा सकें। वहीं, खेतों की तारबाड़ी कराई है। इनमें ब्लेड वाले तार लगाए हैं, जो मवेशी के पहुंचते ही घायल कर देते हैं। चारा के अभाव में बीते 10 दिन में करीब 50 से अधिक अन्ना मवेशी काल के गाल में समां चुके हैं।
इस कारण गांव के बाहर व अंदर मृत जानवरों की बदबू से लोगों का जीना दुश्वार है। किसानों का कहना है कि पिछले साल सूखा पड़ने से उनके पास भूसा नहीं है। पशुपालन विभाग मवेशियों के भूसे का कोई प्रबंध नहीं कर रहा है। कहते हैं कभी-कभार गांव के लोग घर का बचा हुआ भोजन खिला देते हैं। लेकिन इतने से मवेशियों का पेट नहीं भर सकता है।
अन्ना पशुओं के उन्मूलन के लिए कृत्रिम गर्भाधान कर नस्ल सुधार के कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं। लेकिन अन्ना मवेशियों को चारा खिलाने के लिए कोई योजना विभाग के पास नहीं है।
- डा. विजय सिंह, मुख्य पशुचिकित्साधिकारी।