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साहिबे निसाव पर वाजिब है सदक-ए-फित्र
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मुकद्दस माह रमजान में इबादत व तिलाबत का दौर जारी है। इस माह में इबादत का खासा महत्व है। वहीं सदक-ए-फितर हर उस मुसलमान मर्द और औरत पर वाजिब है जो साहिबे निसाव हैं और उनकी निशाव हाजाते असलियी (यानी जरुरियते जिंदगी) से फारिग हो।
सुमेरपुर जामा मस्जिद के पेश इमाम हाजी हाफिज सैफुल्ला ने सदक-ए-फितर के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रसूल अल्लाह सल्ल. ने फरमाया है कि जिसके पास साढ़े सात तोले सोने या साढ़े बावन तोला चांदी या साढ़े बावन तोला के बराबर की रकम हो और ये सब हाजाते असलिया (यानी जरुरियते जिंदगी) से फारिग हो उसको साहिबे निसाब कहा जाता है।
सदक-ए-फितर वाजिब होने के लिए आकिल या बालिग होना शर्त नहीं है। बल्कि बच्चा या मजनून (यानी पागल) भी अगर साहिबे निसाब हो तो उनके माल में से उनका वली (यानी सरपरस्त) अदा करें।
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पेश इमाम ने बताया कि मर्द साहिबे निसाब पर अपनी बीबी या मां-बाप या छोटे भाई बहन और दीगर रिश्तेदारों का फितरा वाजिब नहीं। उन्होंने बताया कि सदक-ए-फितर अदा करने का अफजल वक्त तो यही है कि ईद को सुबह सादिक के बाद ईद-उल-फितर की नमाज अदा करने से पहले दे दिया जाए।
मुकद्दस रमजान
पांचवां रोजा इफ्तार
11 मई 2019
सुन्नी 6.51 बजे
छठवां रोजा सहरी
12 मई 2019
सुन्नी 3.51 बजे
नोट- सहरी और इफ्तार में क्षेत्रवार समय में परिवर्तन हो सकता है।
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सुमेरपुर जामा मस्जिद के पेश इमाम हाजी हाफिज सैफुल्ला ने सदक-ए-फितर के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रसूल अल्लाह सल्ल. ने फरमाया है कि जिसके पास साढ़े सात तोले सोने या साढ़े बावन तोला चांदी या साढ़े बावन तोला के बराबर की रकम हो और ये सब हाजाते असलिया (यानी जरुरियते जिंदगी) से फारिग हो उसको साहिबे निसाब कहा जाता है।
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सदक-ए-फितर वाजिब होने के लिए आकिल या बालिग होना शर्त नहीं है। बल्कि बच्चा या मजनून (यानी पागल) भी अगर साहिबे निसाब हो तो उनके माल में से उनका वली (यानी सरपरस्त) अदा करें।
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पेश इमाम ने बताया कि मर्द साहिबे निसाब पर अपनी बीबी या मां-बाप या छोटे भाई बहन और दीगर रिश्तेदारों का फितरा वाजिब नहीं। उन्होंने बताया कि सदक-ए-फितर अदा करने का अफजल वक्त तो यही है कि ईद को सुबह सादिक के बाद ईद-उल-फितर की नमाज अदा करने से पहले दे दिया जाए।
मुकद्दस रमजान
पांचवां रोजा इफ्तार
11 मई 2019
सुन्नी 6.51 बजे
छठवां रोजा सहरी
12 मई 2019
सुन्नी 3.51 बजे
नोट- सहरी और इफ्तार में क्षेत्रवार समय में परिवर्तन हो सकता है।