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एमएमएमयूटी के 35 कर्मचारियों को सवेतन बहाली
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 17 Dec 2016 01:24 AM IST
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एमएमयूटी
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एमएमएमयूटी के 35 कर्मचारियों के पक्ष में हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। 2009 में भर्ती हुए इन कर्मचारियों की भर्ती को निरस्त करते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 17 फरवरी 2016 को इन्हें बाहर कर दिया था। इस पर कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने इसे एकपक्षीय फैसला बताते हुए कहा कि मामले में कर्मचारियों के साथ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने न्याय नहीं किया है। कोर्ट ने मुख्य याची अर्चना पांडेय के वाद की सुनवाई के बाद सभी 35 कर्मचारियों को सवेतन एवं भत्ते के साथ बहाल करने का आदेश दिया।
मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज में 2007 में रिक्तियां प्रकाशित हुई थीं। इस पर नियुक्ति 2009 में हुई। नियुक्ति के बाद मामले में धांधली की शिकायतें मंडलायुक्त से लेकर शासन तक पहुंची। तत्कालीन मंडलायुक्त पीके मोहंती ने जांच कराई तो धांधली सामने आ गई। शासन की जांच में भी ऐसे तथ्य सामने आए। इसके बाद शासन स्तर से सख्ती को लेकर कई पत्र कॉलेज प्रशासन के पास आए। हालांकि, इन कर्मचारियों की सेवाएं जारी रहीं। इसी बीच 2013 में इंजीनियरिंग कॉलेज यूनिवर्सिटी में तब्दील हो गया।
जनवरी 2016 में प्रबंध बोर्ड की बैठक में इन कर्मचारियों की नियुक्ति को अवैध ठहरा दिया गया। इसके बाद फरवरी 2016 में रजिस्ट्रार ने कर्मचारियों की नियुक्ति निरस्त करते हुए इन्हें बाहर कर दिया। मामले में मुख्य याची अर्चना पांडेय के अधिवक्ता ए. प्रबोध दुबे की वाद की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बहाली का आदेश दे दिया। पूरे प्रकरण की सुनवाई 27 सितंबर को ही पूरी हो गई थी, लेकिन फैसला शुक्रवार को सुनाया गया।
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मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज में 2007 में रिक्तियां प्रकाशित हुई थीं। इस पर नियुक्ति 2009 में हुई। नियुक्ति के बाद मामले में धांधली की शिकायतें मंडलायुक्त से लेकर शासन तक पहुंची। तत्कालीन मंडलायुक्त पीके मोहंती ने जांच कराई तो धांधली सामने आ गई। शासन की जांच में भी ऐसे तथ्य सामने आए। इसके बाद शासन स्तर से सख्ती को लेकर कई पत्र कॉलेज प्रशासन के पास आए। हालांकि, इन कर्मचारियों की सेवाएं जारी रहीं। इसी बीच 2013 में इंजीनियरिंग कॉलेज यूनिवर्सिटी में तब्दील हो गया।
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जनवरी 2016 में प्रबंध बोर्ड की बैठक में इन कर्मचारियों की नियुक्ति को अवैध ठहरा दिया गया। इसके बाद फरवरी 2016 में रजिस्ट्रार ने कर्मचारियों की नियुक्ति निरस्त करते हुए इन्हें बाहर कर दिया। मामले में मुख्य याची अर्चना पांडेय के अधिवक्ता ए. प्रबोध दुबे की वाद की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बहाली का आदेश दे दिया। पूरे प्रकरण की सुनवाई 27 सितंबर को ही पूरी हो गई थी, लेकिन फैसला शुक्रवार को सुनाया गया।
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