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नौ दिवसीय राम कथा का पहला दिन: कृष्ण किंकर बोले- जहां ज्ञान, वहां नहीं होगा अपराध
Thu, 05 Dec 2019 01:20 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 05 Dec 2019 01:20 PM IST
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गीता जयंती के अवसर पर गीता प्रेस में नौ दिवसीय राम कथा के शुभारंभ में कथा वाचक कृष्ण किंकर।
भगवान का नाम जपने मात्र से ही मानव के अंदर बसे राक्षस का नाश हो जाता है। जहां ज्ञान होता है, वहां अपराध पनपता ही नहीं है। यह बातें बुधवार को गीता जयंती केे अवसर पर गीता प्रेस में आयोजित नौ दिवसीय राम कथा के पहले दिन वृृंदावन से आए कथा व्यास कृष्ण किंकर महाराज ने कही।
श्रोताओं को कथा का रसपान कराते हुए कहा कि जहां प्रकाश होता है, वहीं भगवान का वास होता है। ज्ञान की पुंजि अगर हमारे पास हो तो अंधकार अपने आप दूर भाग जाता है। ये ज्ञान कथाओं और सत्संग से ही प्राप्त किया जा सकता है। कहा कि जिस समय तुलसीदास का आगमन हुआ उस समय भारत की धरती पर धर्म का लोप हो रहा था। शैव-वैष्णव में मारकाट मची हुई थी। समाज को दिशा देने के लिए महर्षि बाल्मीकि को ही तुलसी बनकर आना पड़ा।
कथाव्यास ने कहा कि प्रेम ही भक्ति का सार है। भगवान के दर्शनमात्र से भव बंधन कट जाएं यह आवश्यक नहीं। इसके पूर्व आधा घंटा तक भजनों की प्रस्तुति हुई। इस अवसर पर ट्रस्टी बैजनाथ अग्रवाल, मातो बाबू जालान, बीबी त्रिपाठी, आशुतोष, संतोष, चंदू सर्राफ, राजेश कुमार शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
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श्रोताओं को कथा का रसपान कराते हुए कहा कि जहां प्रकाश होता है, वहीं भगवान का वास होता है। ज्ञान की पुंजि अगर हमारे पास हो तो अंधकार अपने आप दूर भाग जाता है। ये ज्ञान कथाओं और सत्संग से ही प्राप्त किया जा सकता है। कहा कि जिस समय तुलसीदास का आगमन हुआ उस समय भारत की धरती पर धर्म का लोप हो रहा था। शैव-वैष्णव में मारकाट मची हुई थी। समाज को दिशा देने के लिए महर्षि बाल्मीकि को ही तुलसी बनकर आना पड़ा।
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कथाव्यास ने कहा कि प्रेम ही भक्ति का सार है। भगवान के दर्शनमात्र से भव बंधन कट जाएं यह आवश्यक नहीं। इसके पूर्व आधा घंटा तक भजनों की प्रस्तुति हुई। इस अवसर पर ट्रस्टी बैजनाथ अग्रवाल, मातो बाबू जालान, बीबी त्रिपाठी, आशुतोष, संतोष, चंदू सर्राफ, राजेश कुमार शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
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