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साध्वी आस्था भारती के मुख से नन्हे कान्हा की बाल लीलाएं सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु
Thu, 12 Dec 2019 11:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 12 Dec 2019 11:50 AM IST
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चम्पा देवी पार्क में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ मे?
चंपा देवी पार्क में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सुप्रसिद्ध कथा वाचक साध्वी आस्था भारती ने नन्हे कान्हा की बाल लीला, माखन लीला और गोवर्धन पूजा के मनोहारी प्रसंगों को सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। इस दौरान भगवान के जन्म उत्सव, उनके नामकरण और पूतना वध के साथ माखनचोरी की लीलाओं का वर्णन सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
साध्वी आस्था भारती ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के घरों से माखन चोरी की। इस घटना के पीछे भी आध्यात्मिक रहस्य है। दूध का सार तत्व माखन है। उन्होंने गोपियों के घर से केवल माखन चुराया अर्थात सार तत्व को ग्रहण किया और असार को छोड़ दिया। प्रभु हमें समझाना चाहते हैं कि सृष्टि का सार तत्व परमात्मा है। इसलिए असार यानी संसार के नश्वर भोग पदार्थों की प्राप्ति में अपने समय, साधन और सामर्थ्य को अपव्यय करने की जगह हमें अपने अंदर स्थित परमात्मा को प्राप्त करने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसी से जीवन का कल्याण संभव है।
सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
साध्वी ने बताया कि वास्तविकता में श्रीकृष्ण केवल ग्वाल-बालों के सखा भर नहीं थे, बल्कि उन्हें दीक्षित करने वाले जगद्गुरु भी थे। श्रीकृष्ण ने उनकी आत्मा का जागरण किया और फिर आत्मिक स्तर पर स्थित रहकर सुंदर जीवन जीने का अनूठा पाठ पढ़ाया।
इस अवसर मुख्य यजमान व्यापारी कल्याण बोर्ड के प्रदेश उपाध्यक्ष पुष्पदंत जैन, तुलस्यान फार्मा के निदेशक राजेश कुमार तुलस्यान, राम नक्षत्र सिंह ट्रेडर्स के महेंद्र सिंह, विजय अग्रवाल, अरुण कुमार मिश्रा, स्वामी नरेंद्रानंद, स्वामी सुमेधानंद, स्वामी अर्जुनानंद, अशोक अग्रवाल, नंदू मिश्रा, विकास जालान, जगरनाथ बैठा, मिथलेश शर्मा, दिनेश चौरसिया, अच्छेलाल गुप्ता, मुन्ना यादव, प्रभा पांडेय आदि मौजूद रहे।
इस अवसर मुख्य यजमान व्यापारी कल्याण बोर्ड के प्रदेश उपाध्यक्ष पुष्पदंत जैन, तुलस्यान फार्मा के निदेशक राजेश कुमार तुलस्यान, राम नक्षत्र सिंह ट्रेडर्स के महेंद्र सिंह, विजय अग्रवाल, अरुण कुमार मिश्रा, स्वामी नरेंद्रानंद, स्वामी सुमेधानंद, स्वामी अर्जुनानंद, अशोक अग्रवाल, नंदू मिश्रा, विकास जालान, जगरनाथ बैठा, मिथलेश शर्मा, दिनेश चौरसिया, अच्छेलाल गुप्ता, मुन्ना यादव, प्रभा पांडेय आदि मौजूद रहे।
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सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
गोवध समाज के लिए कलंक
संस्थान के ‘गो संरक्षण व संवर्धन कार्यक्रम- कामधेनु’ की चर्चा करते हुए साध्वी आस्था भारती ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति का आधार है। भगवान श्री कृष्ण कहते हैं, ‘धेनूनामस्मि कामधुक’- धेनुओं में मैं कामधेनु हूं। इस प्रकार गो को अपनी ही विभूति बताया। सदा ही गोरोचन का तिलक अपने मस्तक पर सुशोभित किया। परंतु फिर भी आज हमारी देसी नस्लें लुप्त होती जा रही हैं। गोवध समाज के लिए एक कलंक बन चुका है। इसलिए गो संरक्षण और संवर्धन की परम आवश्यकता है। इसी कारण से आशुतोष महाराज के दिशा-निर्देशन में संस्थान द्वारा कामधेनु प्रकल्प चलाया जा रहा है। जिसके अंतर्गत देसी गो की वृद्धि के लिए जन-जन को प्रेरित और प्रोत्साहित किया जा रहा है। साध्वी ने स्वयं व्यास पीठ से सभी निवासियों से गो माता के संरक्षण की अपील की। उन्होंने कहा कि गो दान करने वाला सभी कष्टों और पापों से मुक्त हो जाता है। आप भी यथा सामर्थ्य धन के रूप में अपना सहयोग अर्पित कर गो सेवा का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
संस्थान के ‘गो संरक्षण व संवर्धन कार्यक्रम- कामधेनु’ की चर्चा करते हुए साध्वी आस्था भारती ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति का आधार है। भगवान श्री कृष्ण कहते हैं, ‘धेनूनामस्मि कामधुक’- धेनुओं में मैं कामधेनु हूं। इस प्रकार गो को अपनी ही विभूति बताया। सदा ही गोरोचन का तिलक अपने मस्तक पर सुशोभित किया। परंतु फिर भी आज हमारी देसी नस्लें लुप्त होती जा रही हैं। गोवध समाज के लिए एक कलंक बन चुका है। इसलिए गो संरक्षण और संवर्धन की परम आवश्यकता है। इसी कारण से आशुतोष महाराज के दिशा-निर्देशन में संस्थान द्वारा कामधेनु प्रकल्प चलाया जा रहा है। जिसके अंतर्गत देसी गो की वृद्धि के लिए जन-जन को प्रेरित और प्रोत्साहित किया जा रहा है। साध्वी ने स्वयं व्यास पीठ से सभी निवासियों से गो माता के संरक्षण की अपील की। उन्होंने कहा कि गो दान करने वाला सभी कष्टों और पापों से मुक्त हो जाता है। आप भी यथा सामर्थ्य धन के रूप में अपना सहयोग अर्पित कर गो सेवा का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
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सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
ईश्वर की प्रत्यक्ष अनुभूति कर लेना ही धर्म
साध्वी ने धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि जो धारण करने योग्य है उसे धर्म कहते हैं। धर्म अंधविश्वास नहीं है। गायत्री मंत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वो ईश्वर जो सर्वशक्तिमान है, सर्वव्यापक है उसी के प्रकाश को हम अपने जीवन में धारण करते हैं। क्योंकि वही हमें सन्मार्ग पर ले जाता है। गायत्री मंत्र में ये सूत्र स्पष्ट रूप से निहित हैं। ऋषियों ने कहा कि हम उस भगवान को अपने जीवन में धारण करते हैं, जिसे धारण कर सही मायने में हम धार्मिक बनते हैं। उस ईश्वर का दर्शन ही वास्तविक में धर्म है। भगवान की प्रत्यक्ष अनुभूति कर लेना जब धर्म है तो वो अंध विश्वास कैसे हुआ। धर्म एक साक्षात्कार का विषय है।
साध्वी ने धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि जो धारण करने योग्य है उसे धर्म कहते हैं। धर्म अंधविश्वास नहीं है। गायत्री मंत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वो ईश्वर जो सर्वशक्तिमान है, सर्वव्यापक है उसी के प्रकाश को हम अपने जीवन में धारण करते हैं। क्योंकि वही हमें सन्मार्ग पर ले जाता है। गायत्री मंत्र में ये सूत्र स्पष्ट रूप से निहित हैं। ऋषियों ने कहा कि हम उस भगवान को अपने जीवन में धारण करते हैं, जिसे धारण कर सही मायने में हम धार्मिक बनते हैं। उस ईश्वर का दर्शन ही वास्तविक में धर्म है। भगवान की प्रत्यक्ष अनुभूति कर लेना जब धर्म है तो वो अंध विश्वास कैसे हुआ। धर्म एक साक्षात्कार का विषय है।