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पीजीआई में भर्ती नहीं है रवि गन हाउस का मालिक, लौटी टीम
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पीजीआई में भर्ती नहीं है रवि गन हाउस का मालिक, लौटी टीम
गोरखपुर। फर्जी लाइसेंस पर शस्त्र बेचने के आरोपियों में से एक रवि आर्म्स कार्पोरेशन का मालिक घरवालों के साथ फरार है। उसकी तलाश में लखनऊ के पीजीआई गई कैंट पुलिस रिकॉर्ड खंगाल कर लौट आई। पुलिस को उसके पीजीआई में भर्ती होने की मिली सूचना फर्जी निकली। आरोपी के घर और अब अस्पताल में भी न मिलने पर शक गहराता जा रहा है। पुलिस सूत्रों की मानें तो प्रशासनिक दस्तावेज से कई अहम सुराग हाथ लगे हैं जिनके आधार पर जल्द ही कई बड़े चेहरे बेनकाब हो जाएंगे। हालांकि, पुलिस के पास फरार आरोपियों शिवम और विशाल का कोई फोटो तक नहीं है। उनके दर्ज पते भी फर्जी पाए गए हैं।
पुलिस को गोरखनाथ के तनवीर से फर्जी लाइसेंस और उस पर खरीदे गए असलहे की जानकारी मिली थी। इसके बाद से ही पुलिस कैंट थाने में केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है। अब तक यह सामने आ चुका है कि 300 के करीब लोगों ने फर्जी लाइसेंस हासिल कर इसकी मदद से असलहे भी खरीदे हैं। इसमें शहर के कई रईसजादे और माननीय भी शामिल हैं। पुलिस केस के मुख्य आरोपी रवि आर्म्स के मालिक की तलाश में लगी है। पुलिस को सटीक जानकारी मिली थी कि वह पीजीआई में भर्ती है। जिसके बाद मेडिकल टीम के साथ कैंट इंस्पेक्टर रवि राय लखनऊ रवाना हो गए थे। बुधवार की रात इंस्पेक्टर लौटे और पता चला कि वहां पर कोई भर्ती ही नहीं। रवि आर्म्स के मालिक ही नहीं उसके परिवार का भी कोई वहां पर पिछले एक महीने में नहीं भर्ती हुआ है। रिकॉर्ड की जांच कर लौटी टीम अब फिर से दस्तावेजों को खंगाल रही है।
सरकारी कर्मचारियों से भी हुई पूछताछ
सरकारी कर्मचारियों से पूछताछ में भी पुलिस को कुछ सुराग हाथ लगे हैं। आवेदनों के एक-एक फार्म की जांच पुलिस कर रही है ताकि पूरे फर्जीवाड़ा से पर्दा उठाया जा सके।
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सभी गन हाउसों की फिर से होगी जांच
सभी गन हाउस के दस्तावेज की पुलिस नए सिरे से जांच करेगी। इनके द्वारा बेचे गए असलहे और कारतूस की प्रशासनिक टीम के साथ जांच कर पुलिस सच्चाई को जानने की कोशिश करेगी। सूत्र बताते हैं कि असली लाइसेंस पर भी कारतूस और असलहा बेचने वाले समय से इसकी सूचना कलेक्ट्रेट ऑफिस के असलहा दफ्तर में नहीं भेजते है, पुलिस इनके खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है।
पुलिस टीम लौट आई है। पीजीआई में गन हाउस का मालिक या उसके परिवार का कोई भी भर्ती नहीं मिला है। दस्तावेज की जांच में पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। जल्द ही इस मामले में बड़ा खुलासा किया जाएगा।
रोहन प्रमोद बोत्रे, एएसपी, गोरखपुर
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गोरखपुर। फर्जी लाइसेंस पर शस्त्र बेचने के आरोपियों में से एक रवि आर्म्स कार्पोरेशन का मालिक घरवालों के साथ फरार है। उसकी तलाश में लखनऊ के पीजीआई गई कैंट पुलिस रिकॉर्ड खंगाल कर लौट आई। पुलिस को उसके पीजीआई में भर्ती होने की मिली सूचना फर्जी निकली। आरोपी के घर और अब अस्पताल में भी न मिलने पर शक गहराता जा रहा है। पुलिस सूत्रों की मानें तो प्रशासनिक दस्तावेज से कई अहम सुराग हाथ लगे हैं जिनके आधार पर जल्द ही कई बड़े चेहरे बेनकाब हो जाएंगे। हालांकि, पुलिस के पास फरार आरोपियों शिवम और विशाल का कोई फोटो तक नहीं है। उनके दर्ज पते भी फर्जी पाए गए हैं।
पुलिस को गोरखनाथ के तनवीर से फर्जी लाइसेंस और उस पर खरीदे गए असलहे की जानकारी मिली थी। इसके बाद से ही पुलिस कैंट थाने में केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है। अब तक यह सामने आ चुका है कि 300 के करीब लोगों ने फर्जी लाइसेंस हासिल कर इसकी मदद से असलहे भी खरीदे हैं। इसमें शहर के कई रईसजादे और माननीय भी शामिल हैं। पुलिस केस के मुख्य आरोपी रवि आर्म्स के मालिक की तलाश में लगी है। पुलिस को सटीक जानकारी मिली थी कि वह पीजीआई में भर्ती है। जिसके बाद मेडिकल टीम के साथ कैंट इंस्पेक्टर रवि राय लखनऊ रवाना हो गए थे। बुधवार की रात इंस्पेक्टर लौटे और पता चला कि वहां पर कोई भर्ती ही नहीं। रवि आर्म्स के मालिक ही नहीं उसके परिवार का भी कोई वहां पर पिछले एक महीने में नहीं भर्ती हुआ है। रिकॉर्ड की जांच कर लौटी टीम अब फिर से दस्तावेजों को खंगाल रही है।
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सरकारी कर्मचारियों से भी हुई पूछताछ
सरकारी कर्मचारियों से पूछताछ में भी पुलिस को कुछ सुराग हाथ लगे हैं। आवेदनों के एक-एक फार्म की जांच पुलिस कर रही है ताकि पूरे फर्जीवाड़ा से पर्दा उठाया जा सके।
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सभी गन हाउसों की फिर से होगी जांच
सभी गन हाउस के दस्तावेज की पुलिस नए सिरे से जांच करेगी। इनके द्वारा बेचे गए असलहे और कारतूस की प्रशासनिक टीम के साथ जांच कर पुलिस सच्चाई को जानने की कोशिश करेगी। सूत्र बताते हैं कि असली लाइसेंस पर भी कारतूस और असलहा बेचने वाले समय से इसकी सूचना कलेक्ट्रेट ऑफिस के असलहा दफ्तर में नहीं भेजते है, पुलिस इनके खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है।
पुलिस टीम लौट आई है। पीजीआई में गन हाउस का मालिक या उसके परिवार का कोई भी भर्ती नहीं मिला है। दस्तावेज की जांच में पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। जल्द ही इस मामले में बड़ा खुलासा किया जाएगा।
रोहन प्रमोद बोत्रे, एएसपी, गोरखपुर