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‘भारत माता की जय न कहने वाले दया के पात्र’
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Updated Sun, 03 Apr 2016 08:50 PM IST
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राज्यपाल राम नाईक
- फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। राज्यपाल राम नाइक ने कहा है कि जो लोग ‘भारत माता की जय’ नहीं कह रहे, उन्हें उनके हाल पर छोड़ देना चाहिए। दरअसल ऐसे लोग दया के पात्र हैं। इनकी उपेक्षा करना ही बेहतर है। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस नारे को सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाने का प्रयास करें।
एमजी इंटर कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में शिरकत करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश की मर्यादा के खिलाफ बात करने वाले व्यक्तियों को महत्व न देना ही उनकी सजा है।
विधानसभा में आठ मार्च को आजम खां के बयान पर पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उनका भाषण उन्होंने गंभीरता से पढ़ा। उसकी 60 पंक्तियों में से 20 पंक्तियां असंसदीय हैं। इन पंक्तियों में आजम खां ने सदन की गरिमा को आहत किया है। इसे लेकर अपनी आपत्ति से मैंने विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री को अवगत करा दिया है। अध्यक्ष फिलहाल विदेश गए हैं, लौटने पर इसे लेकर कार्यवाही पर बात की जाएगी।
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शिंगणापुर शनि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश देने संबंधी एक सवाल के जवाब में राज्यपाल ने कहा कि यह आस्था का प्रश्न है। महिला हो या पुरुष किसी को भी मंदिर में प्रवेश से रोका नहीं जा सकता। न ही इसे लेकर कोई जिद पालनी चाहिए। मुंबई हाईकोर्ट के आदेश को पूरे देश के नागरिकों को मानना चाहिए।
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एमजी इंटर कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में शिरकत करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश की मर्यादा के खिलाफ बात करने वाले व्यक्तियों को महत्व न देना ही उनकी सजा है।
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विधानसभा में आठ मार्च को आजम खां के बयान पर पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उनका भाषण उन्होंने गंभीरता से पढ़ा। उसकी 60 पंक्तियों में से 20 पंक्तियां असंसदीय हैं। इन पंक्तियों में आजम खां ने सदन की गरिमा को आहत किया है। इसे लेकर अपनी आपत्ति से मैंने विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री को अवगत करा दिया है। अध्यक्ष फिलहाल विदेश गए हैं, लौटने पर इसे लेकर कार्यवाही पर बात की जाएगी।
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शिंगणापुर शनि मंदिर में महिलाओं के प्रवेश देने संबंधी एक सवाल के जवाब में राज्यपाल ने कहा कि यह आस्था का प्रश्न है। महिला हो या पुरुष किसी को भी मंदिर में प्रवेश से रोका नहीं जा सकता। न ही इसे लेकर कोई जिद पालनी चाहिए। मुंबई हाईकोर्ट के आदेश को पूरे देश के नागरिकों को मानना चाहिए।