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नदियों किनारे बसे लोगों में बढ़ी फेफड़े और पेट की बीमारी
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 15 May 2016 12:27 AM IST
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प्रदूषण
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जिले की तीन नदियों के तापमान में वृद्धि ने पर्यावरण विज्ञानियों को चिंता में डाल दिया है। गोरखपुर विश्वविद्यालय की पर्यावरण विज्ञान की छात्राओं ने अपनी शोध रिपोर्ट में इस बात का दावा किया है कि गोरखपुर की रोहिणी, राप्ती और आमी नदियों का तापमान मानक से पांच से छह डिग्री ज्यादा हो गया है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नदियों का तापमान 20 से 22 डिग्री होना चाहिए, क्योंकि इससे अधिक का तापमान जलीय जीवों के अनुकूल नहीं होता।
शोध कर रहीं छात्राओं एकता सिंह, गरिमा दुबे और शैलजा यादव ने गोरखपुर की तीन नदियों आमी, राप्ती और रोहिणी के प्रदूषण स्तर पर करीब तीन साल के आंकड़ों का अध्ययन किया है। विभिन्न मानकों की जांच में इन नदियों का पानी हरेक दृष्टिकोण से घातक बताया गया है। इसमें कई ऐसे बैक्टीरिया मिले हैं, जो फेफड़े और पेट के लिए काफी खतरनाक हैं। इससे इन नदियों के किनारे के गांवों में पेट और फेफड़े संबंधी रोगियों की संख्या भी बढ़ रही है। शोध छात्रा एकता सिंह का कहना है कि इन तीनों नदियों में आमी सबसे प्रदूषित है। इसकी मुख्य वजह नदियों में औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाला प्रदूषण और मल-मूत्र सीधे बहाए जाना है।
नदी के पानी में अकार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ने से शैवाल की पैदावार बढ़ जाती है, जो सूरज की किरणों को ज्यादा अवशोषित करते हैं। इससे पानी का तापमान बढ़ जाता है। इन तीनों नदियों में मानव जनित कचरों को ज्यादा डालने से पानी में अकार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ गई है। यह प्रोजेक्ट मेरे ही मार्गदर्शन में किया गया है।
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- प्रो. सीपीएम त्रिपाठी, सेवानिवृत्त शिक्षक, गोरखपुर विश्वविद्यालय
नदी ------तापमान मानक---- गंदलापन मानक---- पीएच मानक--- टीडीएस मानक----- बैक्टीरिया
(20-22 डिग्री) -------- (5एनटीयू)-------------- (5.5-8.6)------ (18-20)
आमी------------- 25-29 ---------------- 21.13 ---------------- 8.02 ----------- 20.54 --- क्लोस्ट्रीडियम बोटूलिनम, स्टेफाइलोकस औरियस
राप्ती------------- 28-------------------- 9--------------------------- 9.11--------- 19.23-------- क्लोस्ट्रीडियम बोटूलिनम, स्टेफाइलोकस औरियस
रोहिणी---------28-------------------- 6------------------------------ 9.8 ----------19.30 ------- नैग्लेरिया फाउलिरी, इंटेरोकोकस
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शोध कर रहीं छात्राओं एकता सिंह, गरिमा दुबे और शैलजा यादव ने गोरखपुर की तीन नदियों आमी, राप्ती और रोहिणी के प्रदूषण स्तर पर करीब तीन साल के आंकड़ों का अध्ययन किया है। विभिन्न मानकों की जांच में इन नदियों का पानी हरेक दृष्टिकोण से घातक बताया गया है। इसमें कई ऐसे बैक्टीरिया मिले हैं, जो फेफड़े और पेट के लिए काफी खतरनाक हैं। इससे इन नदियों के किनारे के गांवों में पेट और फेफड़े संबंधी रोगियों की संख्या भी बढ़ रही है। शोध छात्रा एकता सिंह का कहना है कि इन तीनों नदियों में आमी सबसे प्रदूषित है। इसकी मुख्य वजह नदियों में औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाला प्रदूषण और मल-मूत्र सीधे बहाए जाना है।
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नदी के पानी में अकार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ने से शैवाल की पैदावार बढ़ जाती है, जो सूरज की किरणों को ज्यादा अवशोषित करते हैं। इससे पानी का तापमान बढ़ जाता है। इन तीनों नदियों में मानव जनित कचरों को ज्यादा डालने से पानी में अकार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ गई है। यह प्रोजेक्ट मेरे ही मार्गदर्शन में किया गया है।
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- प्रो. सीपीएम त्रिपाठी, सेवानिवृत्त शिक्षक, गोरखपुर विश्वविद्यालय
नदी ------तापमान मानक---- गंदलापन मानक---- पीएच मानक--- टीडीएस मानक----- बैक्टीरिया
(20-22 डिग्री) -------- (5एनटीयू)-------------- (5.5-8.6)------ (18-20)
आमी------------- 25-29 ---------------- 21.13 ---------------- 8.02 ----------- 20.54 --- क्लोस्ट्रीडियम बोटूलिनम, स्टेफाइलोकस औरियस
राप्ती------------- 28-------------------- 9--------------------------- 9.11--------- 19.23-------- क्लोस्ट्रीडियम बोटूलिनम, स्टेफाइलोकस औरियस
रोहिणी---------28-------------------- 6------------------------------ 9.8 ----------19.30 ------- नैग्लेरिया फाउलिरी, इंटेरोकोकस