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फर्जी शस्त्र लाइसेंस: रवि गन हाउस का प्रोपराइटर ही मास्टरमाइंड, लगेगा रासुका
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फर्जी शस्त्र लाइसेंस: रवि गन हाउस का प्रोपराइटर ही मास्टरमाइंड, लगेगा रासुका
गोरखपुर। फर्जी शस्त्र लाइसेंस की जांच अब अंजाम की ओर पहुंच गई है। सब कुछ ठीक रहा तो बुधवार को जिला प्रशासन मामले का पर्दाफाश कर सकता है। पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड रवि आर्म्स कार्पोरेशन का प्रोपराइटर प्रकाश नारायण पांडेय ही है, यह मजिस्ट्रेटी जांच में भी लगभग साफ हो चुका है। उसके बेटे रवि पांडेय की संलिप्तता भी उजागर हो गई है। जिला प्रशासन अब मास्टरमाइंड पर रासुका लगाने की तैयारी में है। इस आशय का आदेश बुधवार तक जारी हो सकता है। मजिस्ट्रेटी जांच में अब तक करीब 150 लाइसेंस फर्जी पाए गए हैं। इन सभी को निरस्त करने के साथ ही जिन्हें ये लाइसेंस जारी हुए हैं उन पर भी कार्रवाई होगी।
फर्जी लाइसेंस के मामले में रवि गन हाउस के साथ ही शस्त्र की चार और दुकानों के नाम सामने आ रहे हैं। दुकानों से मिले दस्तावेजों की जांच के बाद 10 से 15 लाइसेंस ऐसे पाए गए हैं, जिनके रिकार्ड कलेक्ट्रेट के रिकार्ड से नहीं मिल रहे हैं। प्रशासन संबंधित गन हाउस के मालिकों पर भी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। हालांकि अभी यह नहीं तय हो पाया है कि जिस तरह से रवि गन हाउस का प्रोपराइटर पूरी तरह से फर्जी लाइसेंस बनाता था, उन्होंने भी उसी तरीके का इस्तेमाल किया है। मजिस्ट्रेटी जांच निष्कर्ष पर पहुंच चुकी है।
कुछ कलेक्ट्रेट कर्मी गिरोह के मददगार
सूत्रों के मुताबिक फर्जी लाइसेंस बनाने के काम में पूरा रैकेट लगा था। कलेक्ट्रेट के कुछ कर्मचारियों की भूमिका गिरोह को मदद देने और यूआईएन समेत कुछ और गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने की थी। साथ ही इस रूप में उनकी भूमिका भी सामने आ रही है कि वे लोगों को यह विश्वास दिलाते थे कि उनका काम सौ टका सही हो रहा है। इनमें एक पूर्व असलहा बाबू, कंप्यूटर ऑपरेटर आदि शामिल हैं।
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शस्त्र लाइसेंस के फर्जीवाड़े की तह तक हम तकरीबन पहुंच चुके हैं। जांच अंतिम चरण में है। दो-चार दिन में इस पूरे ‘खेल’ से पर्दा उठ जाएगा। तीन-चार और शस्त्र विक्रेताओं की भी संलिप्तता मिली है। एक-एक रिकार्ड का सत्यापन किया जा रहा है। हर गुंजाइश को देखा जा रहा है। जांच में न कोई गड़बड़ी छूटेगी और न ही इस ‘खेल’ में शामिल होने वाले। कार्रवाई में थोड़ा समय इसलिए लग रहा हैं क्योंकि गहराई से जांच कराई जा रही है ताकि कोई बेकसूर फंसे न और गुनहगार बचे न। फर्जीवाड़े में शामिल छह-सात आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। बाकी सब भी जेल जाएंगे।
- के. विजयेंद्र पांडियन, डीएम
जल्द ही जांच पूरी हो जाएगी। पूरे फर्जीवाड़े का मामला तकरीबन खुल चुका है। कुछ गन हाउस से भी फर्जी लाइसेेेंस जारी हुए हैं। कलेक्ट्रेट के रिकार्ड से उनके रिकार्ड मैच नहीं कर रहे। सभी लाइसेंस निरस्त कर गन हाउस संचालकों पर भी कार्रवाई की जाएगी
- प्रथमेश कुमार, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं सदस्य मजिस्ट्रेटी कमेटी
ये था मामला
फर्जी शस्त्र लाइसेंस का सनसनीखेज मामला 14 अगस्त को सामने आया था। पुलिस की जांच के साथ ही डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने 16 अगस्त को एडीएम (सिटी) राकेश कुमार श्रीवास्तव और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रथमेश कुमार सहित तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। कमेटी ने सभी दुकानों के रिकार्ड अपने कब्जे में लेने के साथ ही फरार चल रहे रवि गन हाउस को सील कर दिया था। 29 अगस्त को गन हाउस प्रोपराइटर के बेटे रवि पांडेय की मौजूदगी में जांच कमेटी ने सील तोड़कर दुकान के भीतर रखे रिकार्ड जब्त कर उसकी भी जांच शुरू कर दी।
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गोरखपुर। फर्जी शस्त्र लाइसेंस की जांच अब अंजाम की ओर पहुंच गई है। सब कुछ ठीक रहा तो बुधवार को जिला प्रशासन मामले का पर्दाफाश कर सकता है। पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड रवि आर्म्स कार्पोरेशन का प्रोपराइटर प्रकाश नारायण पांडेय ही है, यह मजिस्ट्रेटी जांच में भी लगभग साफ हो चुका है। उसके बेटे रवि पांडेय की संलिप्तता भी उजागर हो गई है। जिला प्रशासन अब मास्टरमाइंड पर रासुका लगाने की तैयारी में है। इस आशय का आदेश बुधवार तक जारी हो सकता है। मजिस्ट्रेटी जांच में अब तक करीब 150 लाइसेंस फर्जी पाए गए हैं। इन सभी को निरस्त करने के साथ ही जिन्हें ये लाइसेंस जारी हुए हैं उन पर भी कार्रवाई होगी।
फर्जी लाइसेंस के मामले में रवि गन हाउस के साथ ही शस्त्र की चार और दुकानों के नाम सामने आ रहे हैं। दुकानों से मिले दस्तावेजों की जांच के बाद 10 से 15 लाइसेंस ऐसे पाए गए हैं, जिनके रिकार्ड कलेक्ट्रेट के रिकार्ड से नहीं मिल रहे हैं। प्रशासन संबंधित गन हाउस के मालिकों पर भी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। हालांकि अभी यह नहीं तय हो पाया है कि जिस तरह से रवि गन हाउस का प्रोपराइटर पूरी तरह से फर्जी लाइसेंस बनाता था, उन्होंने भी उसी तरीके का इस्तेमाल किया है। मजिस्ट्रेटी जांच निष्कर्ष पर पहुंच चुकी है।
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कुछ कलेक्ट्रेट कर्मी गिरोह के मददगार
सूत्रों के मुताबिक फर्जी लाइसेंस बनाने के काम में पूरा रैकेट लगा था। कलेक्ट्रेट के कुछ कर्मचारियों की भूमिका गिरोह को मदद देने और यूआईएन समेत कुछ और गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने की थी। साथ ही इस रूप में उनकी भूमिका भी सामने आ रही है कि वे लोगों को यह विश्वास दिलाते थे कि उनका काम सौ टका सही हो रहा है। इनमें एक पूर्व असलहा बाबू, कंप्यूटर ऑपरेटर आदि शामिल हैं।
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शस्त्र लाइसेंस के फर्जीवाड़े की तह तक हम तकरीबन पहुंच चुके हैं। जांच अंतिम चरण में है। दो-चार दिन में इस पूरे ‘खेल’ से पर्दा उठ जाएगा। तीन-चार और शस्त्र विक्रेताओं की भी संलिप्तता मिली है। एक-एक रिकार्ड का सत्यापन किया जा रहा है। हर गुंजाइश को देखा जा रहा है। जांच में न कोई गड़बड़ी छूटेगी और न ही इस ‘खेल’ में शामिल होने वाले। कार्रवाई में थोड़ा समय इसलिए लग रहा हैं क्योंकि गहराई से जांच कराई जा रही है ताकि कोई बेकसूर फंसे न और गुनहगार बचे न। फर्जीवाड़े में शामिल छह-सात आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। बाकी सब भी जेल जाएंगे।
- के. विजयेंद्र पांडियन, डीएम
जल्द ही जांच पूरी हो जाएगी। पूरे फर्जीवाड़े का मामला तकरीबन खुल चुका है। कुछ गन हाउस से भी फर्जी लाइसेेेंस जारी हुए हैं। कलेक्ट्रेट के रिकार्ड से उनके रिकार्ड मैच नहीं कर रहे। सभी लाइसेंस निरस्त कर गन हाउस संचालकों पर भी कार्रवाई की जाएगी
- प्रथमेश कुमार, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं सदस्य मजिस्ट्रेटी कमेटी
ये था मामला
फर्जी शस्त्र लाइसेंस का सनसनीखेज मामला 14 अगस्त को सामने आया था। पुलिस की जांच के साथ ही डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने 16 अगस्त को एडीएम (सिटी) राकेश कुमार श्रीवास्तव और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रथमेश कुमार सहित तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। कमेटी ने सभी दुकानों के रिकार्ड अपने कब्जे में लेने के साथ ही फरार चल रहे रवि गन हाउस को सील कर दिया था। 29 अगस्त को गन हाउस प्रोपराइटर के बेटे रवि पांडेय की मौजूदगी में जांच कमेटी ने सील तोड़कर दुकान के भीतर रखे रिकार्ड जब्त कर उसकी भी जांच शुरू कर दी।