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फिर उठा जींस पर सवाल
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 11 Dec 2017 01:50 AM IST
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डॉ. सत्यपाल सिंह।
- फोटो : Amar Ujala
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केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने पहनावे से संस्कारों का रिश्ता बताते हुए जींस पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा, कि मंदिर का महंत या शादी में दुल्हन जींस पहने नजर आए तो कोई पसंद करेगा।
केंद्रीय राज्यमंत्री रविवार को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। विस्तृत उद्बोधन में उनका जोर पढ़ाई के तरीके और संस्कार पर रहा। उन्होंने कहा कि संस्कार कैसे हों, यह चिंतन का विषय है। सिर्फ विषय की पढ़ाई ही काफी नहीं है, विद्यार्थी के समग्र विकास पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। ड्रेस कैसी हो, इसके चयन में भी सावधानी जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से ही सवालिया अंदाज में पूछा कि आप बताओ, शादी की वेदी पर दुल्हन जींस पहनकर पहुंचे तो कोई पसंद करोगे। अगर जींस पहनने वाला व्यक्ति किसी मंदिर या पीठ का महंत बन जाए तो कोई पसंद करेगा क्या। समारोह में मौजूद विद्यार्थियों में से कुछ ने नकारात्मक शैली में गर्दन हिलाई तो कुछ के मुंह से सामूहिक न निकला।
केंद्रीय राज्यमंत्री ने फिर समझाने वाली शैली में कहा कि स्कूल में जाएं तो ड्रेस कैसी हो, दौड़ने-खेलने के दौरान किस तरह का पहनावा हो-इसे देखने समझने की जरूरत है। पहनावे के चयन में संस्कारों का ख्याल रखना चाहिए।
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केंद्रीय राज्यमंत्री रविवार को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। विस्तृत उद्बोधन में उनका जोर पढ़ाई के तरीके और संस्कार पर रहा। उन्होंने कहा कि संस्कार कैसे हों, यह चिंतन का विषय है। सिर्फ विषय की पढ़ाई ही काफी नहीं है, विद्यार्थी के समग्र विकास पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। ड्रेस कैसी हो, इसके चयन में भी सावधानी जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से ही सवालिया अंदाज में पूछा कि आप बताओ, शादी की वेदी पर दुल्हन जींस पहनकर पहुंचे तो कोई पसंद करोगे। अगर जींस पहनने वाला व्यक्ति किसी मंदिर या पीठ का महंत बन जाए तो कोई पसंद करेगा क्या। समारोह में मौजूद विद्यार्थियों में से कुछ ने नकारात्मक शैली में गर्दन हिलाई तो कुछ के मुंह से सामूहिक न निकला।
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केंद्रीय राज्यमंत्री ने फिर समझाने वाली शैली में कहा कि स्कूल में जाएं तो ड्रेस कैसी हो, दौड़ने-खेलने के दौरान किस तरह का पहनावा हो-इसे देखने समझने की जरूरत है। पहनावे के चयन में संस्कारों का ख्याल रखना चाहिए।
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