{"_id":"5730a91c4f1c1b5d05919a8a","slug":"many-school-are-opened-taking-room-on-rent","type":"story","status":"publish","title_hn":"किराए पर कमरा लिया और खोल दिया स्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किराए पर कमरा लिया और खोल दिया स्कूल
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Thu, 12 May 2016 01:20 AM IST
विज्ञापन
स्कूल
- फोटो : डेमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में बगैर मान्यता के करीब 525 स्कूल चल रहे हैं। इनमें बहुत से स्कूल तो किराए के कमरों में चल रहे हैं, जिनके पास न तो जगह है और न ही खेल के मैदान। इन स्कूलों को बंद कराने की जिम्मेदारी खंड शिक्षाधिकारियों को सौंपी गई थी, लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी किसी स्कूल के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
फरवरी में शासन से बगैर मान्यता वाले स्कूलों की सूची मांगी गई थी। उस दौरान करीब 525 ऐसे स्कूलों को चिह्नित किया गया था। इनमें कुछ स्कूल संचालकों ने मान्यता के लिए आवेदन कर रखा है। बगैर मान्यता वाले स्कूलों की संख्या गोला, बेलघाट, ऊरवां, बांसगांव ब्लॉक में ज्यादा है।
इन स्कूलों के संचालित होने पर एक लाख रुपये जुर्माने का भी नियम है। इसके बाद भी स्कूल चलते पाए गए तो प्रतिदिन दस हजार रुपये जुर्माना लिया जाएगा, लेकिन किसी भी खंड शिक्षाधिकारी ने न तो स्कूलों की जांच की और न ही जुर्माना लगाया। शहर में भी कुछ ऐसे स्कूल हैं जिनकी मान्यता कक्षा आठ तक है, मगर पढ़ाई 10 तक होती है।
विज्ञापन
मान्यता की नियम और शर्तें
नर्सरी से कक्षा पांच तक सात कमरे और कक्षा आठ तक दस कमरे होने चाहिए। भवन की छत पक्की और बाहर की दीवारें सफेद होनी चाहिए। सभी कमरों का क्षेत्रफल 180 वर्ग मीटर होना चाहिए। इसके अलावा पुस्तकालय व खेलकूद का सामान होना चाहिए। पीने के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था भी जरूरी है।
सभी खंड शिक्षाधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने ब्लॉक में बगैर मान्यता के चल रहे स्कूलों के नाम-पते सहित सूची उपलब्ध कराएं। जिन स्कूलों की मान्यता नहीं है उन्हें संचालक बंद कर दें। जल्द ही अभियान चलाकर ऐसे स्कूलों की जांच होगी। पकड़े जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
- ओम प्रकाश यादव, बीएसए
विज्ञापन
फरवरी में शासन से बगैर मान्यता वाले स्कूलों की सूची मांगी गई थी। उस दौरान करीब 525 ऐसे स्कूलों को चिह्नित किया गया था। इनमें कुछ स्कूल संचालकों ने मान्यता के लिए आवेदन कर रखा है। बगैर मान्यता वाले स्कूलों की संख्या गोला, बेलघाट, ऊरवां, बांसगांव ब्लॉक में ज्यादा है।
विज्ञापन
इन स्कूलों के संचालित होने पर एक लाख रुपये जुर्माने का भी नियम है। इसके बाद भी स्कूल चलते पाए गए तो प्रतिदिन दस हजार रुपये जुर्माना लिया जाएगा, लेकिन किसी भी खंड शिक्षाधिकारी ने न तो स्कूलों की जांच की और न ही जुर्माना लगाया। शहर में भी कुछ ऐसे स्कूल हैं जिनकी मान्यता कक्षा आठ तक है, मगर पढ़ाई 10 तक होती है।
विज्ञापन
मान्यता की नियम और शर्तें
नर्सरी से कक्षा पांच तक सात कमरे और कक्षा आठ तक दस कमरे होने चाहिए। भवन की छत पक्की और बाहर की दीवारें सफेद होनी चाहिए। सभी कमरों का क्षेत्रफल 180 वर्ग मीटर होना चाहिए। इसके अलावा पुस्तकालय व खेलकूद का सामान होना चाहिए। पीने के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था भी जरूरी है।
सभी खंड शिक्षाधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने ब्लॉक में बगैर मान्यता के चल रहे स्कूलों के नाम-पते सहित सूची उपलब्ध कराएं। जिन स्कूलों की मान्यता नहीं है उन्हें संचालक बंद कर दें। जल्द ही अभियान चलाकर ऐसे स्कूलों की जांच होगी। पकड़े जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
- ओम प्रकाश यादव, बीएसए