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कीर्तन और गुरुवाणी से निहाल हुई संगत
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sun, 22 May 2016 08:43 PM IST
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संगत में मौजूद श्रद्धालु।
- फोटो : shivharsh
बाबा बंदा बहादुर के 300वें शहीदी दिवस पर गुरुद्वारा गुरुसिंह सभा जटाशंकर में गुरुमत प्रचार का आयोजन हुआ। इस अवसर पर पटियाला से आए कथावाचक गुरुबख्श सिंह के जत्थे ने गुरुमत विचार रखे तो ज्ञानी प्रीतम सिंह के जत्थे द्वारा गुरुवाणी कीर्तन से संगत निहाल हुई।
कथावाचक ने भक्तजनों को बताया कि गुरुग्रंथ साहिब सामाजिक समानता के प्रतीक हैं और समूची मानव जाति को एक ईश्वर का संदेश देते हैं। गुरुग्रंथ साहिब की विचारधारा पर चलकर ही विश्व शांति की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। बाबा बंदा सिंह की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिखराज के पहले बादशाह थे, जिन्होंने गुरुनानक देव और गुरु गोविंद सिंह के नाम का सिक्का चलाया और सरहिंद फतेह करके सिख राज की स्थापना की।
गुरुबख्श सिंह ने बताया कि गुरमत प्रचार दौरे की शुरुआत हो चुकी है। यह कार्य बाराबंकी, करनैलगंज, गोंडा, लखनऊ, रायबरेली होते हुए पांच जून को गुरुद्वारा साहिब कानपुर में समाप्त होगा। इस अवसर पर समरजीत सिंह, जसपाल सिंह, जगनैन सिंह, परमजीत कौर राना, निर्मल कौर, हरलीन कौर, हरगुन सिंह, हरबंश सिंह, सतपाल सिंह, केशवदास, त्रिलोचन सिंह, गुरुदेव सिंह, कृपा कौर समेत सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कथावाचक ने भक्तजनों को बताया कि गुरुग्रंथ साहिब सामाजिक समानता के प्रतीक हैं और समूची मानव जाति को एक ईश्वर का संदेश देते हैं। गुरुग्रंथ साहिब की विचारधारा पर चलकर ही विश्व शांति की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। बाबा बंदा सिंह की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिखराज के पहले बादशाह थे, जिन्होंने गुरुनानक देव और गुरु गोविंद सिंह के नाम का सिक्का चलाया और सरहिंद फतेह करके सिख राज की स्थापना की।
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गुरुबख्श सिंह ने बताया कि गुरमत प्रचार दौरे की शुरुआत हो चुकी है। यह कार्य बाराबंकी, करनैलगंज, गोंडा, लखनऊ, रायबरेली होते हुए पांच जून को गुरुद्वारा साहिब कानपुर में समाप्त होगा। इस अवसर पर समरजीत सिंह, जसपाल सिंह, जगनैन सिंह, परमजीत कौर राना, निर्मल कौर, हरलीन कौर, हरगुन सिंह, हरबंश सिंह, सतपाल सिंह, केशवदास, त्रिलोचन सिंह, गुरुदेव सिंह, कृपा कौर समेत सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
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