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जिला अस्पताल गेट पर गंदगी देख बिफरे स्वास्थ्य मंत्री

Mon, 08 May 2017 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Mon, 08 May 2017 01:32 AM IST
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Inspection of health minister
इंसेफेलाइटिस वार्ड में मरीज का हाल लेते स्वास्‍थ्य मंत्री। - फोटो : Amar Ujala
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने रविवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल गेट पर काऊ कैचर के नीचे नाली में गंदगी देख बिफर पड़े और भविष्य में ऐसा न होने की हिदायत देते हुए एसआईसी को तत्काल सफाई कराने को कहा। बोले, अस्पताल गेट पर ही गंदगी रहेगी तो मरीजों को संक्रमण का खतरा बना रहेगा।
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स्वास्थ्य मंत्री रविवार सुबह 11:30 पर जिला अस्पताल पहुंचे और इंसेफेलाइटिस भवन के आईसीयू वार्ड में जाकर भर्ती मरीजों का हालचाल लिया और उनसे दवाओं की उपलब्धता की जानकारी ली। इसके बाद फीमेल ऑर्थो वार्ड में गए। वहां भर्ती धुरियापार की सुनरी के पैर र्में इंट लटकाकर ट्रैक्शन लगाने पर चिकित्सा अधीक्षक से नाराजगी जताई। कहा कि इलाज का यह तरीका ठीक नहीं। वार्ड से ही सटे इमरजेंसी वार्ड में निरीक्षण के दौरान उन्होंने वैक्सीन और दवाओं के रखरखाव के तरीकों पर एतराज जताया। वहां रखे रजिस्टर को भी बारीकी से खंगाला।
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ल ऑर्थो वार्ड में भर्ती मरीजों से इलाज के बारे में जानकारी ली। इसके बाद जिला महिला अस्पताल जाते समय परिसर में बने कूड़ा घर को देखकर रुक गए। कूड़ा निस्तारण की प्रक्रिया के बारे में पूछा तो बताया गया कि अस्पताल से निकले कचरे के निस्तारण और सफाई को लेकर नगर निगम मदद नहीं करता। उन्होंने डीएम से कहा कि समीक्षा बैठक में नगर आयुक्त को भी बुलाएं, इस मुद्दे पर बात की जाएगी। इसके बाद सीधे मेडिकल कॉलेज निरीक्षण के लिए रवाना हो गए।     
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‘धूल रोकने को शेड लगाओ, जल्द बनाओ बिल्डिंग’
गोरखपुर। जिला महिला अस्पताल में निर्माणाधीन बिल्डिंग से निकल रहे धूल पर नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि शेड लगाओ, ताकि गंदगी अस्पताल की ओर न आ सके। इससे संक्रमण का खतरा बना रहेगा। कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर से पूछा, कब तक इसे बनाना था। प्रोजेक्ट मैनेजर ने कहा कि मार्च तक पूरा करना था, थोड़ी देरी हो गई है। इस पर उन्होेंने कहा कि अगस्त तक निर्माण कार्य पूरा कर भवन को हस्तांतरित कर दें। इस अवधि तक निर्माण पूरा नहीं हुआ तो कार्रवाई होगी।

‘दोस्त बनें नहीं तो मैं दुश्मन बन जाऊंगा’
गोरखपुर। स्वास्थ्य मंत्री ने दौरे पर एक बाबू के खिलाफ बाबू व अधिकारी के लचर प्रशासनिक नियंत्रण की शिकायत पर खासे नाराज दिखे। उन्होंने एसआईसी के कमरे में चेतावनी के लहजे में कहा कि डॉक्टर व कर्मचारी गरीब मरीजों के दोस्त बनें वरना मैं (सिद्धार्थ नाथ सिंह) आप सभी का दुश्मन बन जाऊंगा। स्वास्थ्य मंत्री ने यह तल्ख टिप्पणी जिम्मेदारों द्वारा रुपये लेने के लगे आरोपों के बाद की। इस टिप्पणी के बाद वहां खड़े जिम्मेदार बगले झांकने लगे। 

‘नाम इतना बड़ा काम तो छोटा न करो’
जिला अस्पताल में निरीक्षण के दौरान महिला अस्पताल से निकाले गए कुछ आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने बाबू सुदामा के खिलाफ शिकायत की। इस पर उन्होंने बाबू सुदामा को तलब किया। शुरुआती पूछताछ में ही सुदामा के हाथ-पांव ठंडे पड़ गए। किसी तरह लड़खड़ाती जुबान में सुदामा ने अपना पक्ष रखा, जिस पर  स्वास्थ्य मंत्री ने दो टूक कहा कि सुदामा नाम इतना बड़ा है तो इतना छोटा काम क्यों करते हो। उन्होंने बाबू को चेतावनी देते हुए पहली गलती मानकर माफ करते हुए आगे से पुनरावृत्ति न करने की चेतावनी दी।

डीएम करेंगे आरोपों की जांच
महिला अस्पताल के एसआईसी कक्ष से बाहर आते ही वहां खड़े संविदा कर्मचारियों ने स्वास्थ्य मंत्री से सैलरी बनाने के नाम पर रुपये लेने की शिकायत की। कहा कि कुछ कर्मचारियों ने जुगाड़ से अपना नवीनीकरण करा लिया है, जबकि बाबू सुदामा ने उनका नवीनीकरण नहीं किया है। इसी दौरान किसी कर्मचारियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ महीनों का मानदेय तो उन्हें मिला है लेकिन सैलरी बनाने के नाम पर हर कर्मचारी से 15 सौ रुपए लिए जाते हैं। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने नाराज होकर डीएम को सुदामा बाबू पर रुपये लेने के सभी आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सीएमओ डीएम को जांच में सहयोग करेंगे, जो भी रिकार्ड की जरूरत होगी, वह सीएमओ उपलब्ध कराएंगे।


मंत्री के स्वागत के चक्कर में फर्ज भूले डॉक्टर

 स्वास्थ्य मंत्री के निरीक्षण के पहले ही जिला अस्पताल की इमरजेंसी में नंबर गेम के लिए परेशान डॉक्टर व कर्मचारी अपना फर्ज भूल बैठे। डॉक्टरों ने सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल मासूम को टिटनेस का इंजेक्शन लगाकर बिना मरहम-पट्टी किए ही बाहर कर दिया। मंत्री के कार्यक्रम की कवरेज के लिए खड़े मीडियाकर्मियों के हस्तक्षेप के बाद डॉक्टरों ने मरीज का इलाज किया। अलहदादपुर के दिव्यांग रामबली की चार साल की बेटी रिद्धी रविवार सुबह सड़क हादसे में घायल हो गई थी। उसके सिर, चेहरे और पैर में चोट लगी थी। रामबली 11:30 बजे उसे लेकर इमरजेंसी पहुंचे। इस दौरान अस्पताल प्रशासन स्वास्थ्य मंत्री के स्वागत की तैयारियों में जुटा था। बच्ची के साथ आए मामा विक्की ने बताया कि इमरजेंसी में डॉक्टरों ने बस टिटनेस का एक इंजेक्शन लगाया और बिना पट्टी किए वापस भेज दिया। डॉक्टरों ने रिद्धी के चोट पर कोई दवा भी नहीं लगाई और उसे बाहर से खरीदने को कह दिया। मीडियाकर्मियों के दखल के बाद उसके चोटों पर दवा लगाई गई।
 
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