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‘शिक्षा को समाधान आधारित बनाने की जरूरत’
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के शोध भवन में आयोजित कार्यशाला में बोलते विभाग?
‘शिक्षा को समाधान आधारित बनाने की जरूरत’
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय के वानस्पतिक शोध भवन में पांच दिवसीय कार्यक्रम ‘मोटिवेशन एवं इनोवेशन प्रोग्राम फॉर साइंस स्टूडेंट’ का शुभारंभ सोमवार को हुआ। अतिथियों ने प्रयोगशाला का भ्रमण किया और जैव प्रौद्योगिकी विभाग एवं वानस्पतिक उद्यान को भी देखा।
मुख्य अतिथि प्रो. अशोक कुमार बख्शी ने कहा कि इनोवेशन के लिए क्रिएटिविटी (सृजनात्मकता) का होना बहुत जरूरी है। साथ ही साथ भिन्न-भिन्न सोच एवं लीक से हटकर कार्य करना एक बड़ी युक्ति होती है, जो वैज्ञानिक सोच को बच्चों में स्थापित करती है। उन्होंने 21वीं सदी की चुनौतियों को परिभाषित करते हुए कहा कि 1930 के बाद कोई भारत का वैज्ञानिक यह कार्य करते हुए नोबल पुरस्कार नहीं पा सका। इसकी वजह भारत की शिक्षा, समस्या के समाधान आधारित न होकर सामान्य पाठ्यक्रम पर आधारित थी।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. बीके सिंह ने कहा कि आज की सूचना तंत्र के हिसाब से पूरा विश्व एक वैश्विक गांव है जो एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. बीएन पांडेय ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रो. ईश्वरदास ने विषय वस्तु पर विस्तार से बताया और पांचों दिन के कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। पूजा सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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मौके पर प्रो. एसएन गुप्ता, प्रो. कलावति शुक्ला, प्रो. दिनेश यादव, प्रो. एके द्विवेदी, प्रो. नमिता रानी अग्रवाल, प्रो. पूजा सिंह, डॉ. दीपा श्रीवास्तव, डॉ. वीरेंद्र मधुकर आदि मौजूद रहे।
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गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय के वानस्पतिक शोध भवन में पांच दिवसीय कार्यक्रम ‘मोटिवेशन एवं इनोवेशन प्रोग्राम फॉर साइंस स्टूडेंट’ का शुभारंभ सोमवार को हुआ। अतिथियों ने प्रयोगशाला का भ्रमण किया और जैव प्रौद्योगिकी विभाग एवं वानस्पतिक उद्यान को भी देखा।
मुख्य अतिथि प्रो. अशोक कुमार बख्शी ने कहा कि इनोवेशन के लिए क्रिएटिविटी (सृजनात्मकता) का होना बहुत जरूरी है। साथ ही साथ भिन्न-भिन्न सोच एवं लीक से हटकर कार्य करना एक बड़ी युक्ति होती है, जो वैज्ञानिक सोच को बच्चों में स्थापित करती है। उन्होंने 21वीं सदी की चुनौतियों को परिभाषित करते हुए कहा कि 1930 के बाद कोई भारत का वैज्ञानिक यह कार्य करते हुए नोबल पुरस्कार नहीं पा सका। इसकी वजह भारत की शिक्षा, समस्या के समाधान आधारित न होकर सामान्य पाठ्यक्रम पर आधारित थी।
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अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. बीके सिंह ने कहा कि आज की सूचना तंत्र के हिसाब से पूरा विश्व एक वैश्विक गांव है जो एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. बीएन पांडेय ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रो. ईश्वरदास ने विषय वस्तु पर विस्तार से बताया और पांचों दिन के कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। पूजा सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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मौके पर प्रो. एसएन गुप्ता, प्रो. कलावति शुक्ला, प्रो. दिनेश यादव, प्रो. एके द्विवेदी, प्रो. नमिता रानी अग्रवाल, प्रो. पूजा सिंह, डॉ. दीपा श्रीवास्तव, डॉ. वीरेंद्र मधुकर आदि मौजूद रहे।