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डॉक्टरों, विदेशी नागरिक, सांसद से ठगी करने वाला हाई प्रोइल जालसाज बिल्डर डॉ. अरविंद जेल भेजा गया

Thu, 11 Jul 2019 04:33 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jul 2019 04:33 AM IST
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frad doctor in jail
- फोटो : अमर उजाला
पूर्वांचल के मशहूर बाल रोग विशेषज्ञों में से एक दिवंगत जीएन तिवारी के बेटे व बिल्डर डॉ. अरविंद तिवारी को जालसाजी के मामले में पुलिस ने कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया। वह शहर के डॉक्टरों, विदेशी नागरिक और एक भाजपा सांसद से 15 करोड़ से ज्यादा ठगी के आरोप में तीन साल से फरार चल रहा था। उसके खिलाफ कैंट थाने में दो मुकदमे दर्ज हैं। वारंट जारी होने के बाद भी कैंट पुलिस की पकड़ से दूर था। राजघाट पुलिस ने मंगलवार को डॉ. अरविंद को एक जालसाजी के मामले में ही पकड़ा और फिर केस दर्ज कर पुराने मुकदमों के आधार पर जेल भेजा गया।
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शहर के कई बड़े डॉक्टर, व्यापारी और एनआरआई को फ्लैट और जमीन बेचने का झांसा देने वाला डॉ. अरविंद छात्रसंघ चौराहे के पास रहता था। डॉक्टर पुत्र और खुद डॉक्टर होने की वजह से शहर के नामचीन डॉक्टरों ने उस पर भरोसा कर लिया था। अरविंद ने आईजी बंगले के सामने एक फ्लैट को तीन लोगों से बेचने का एग्रीमेंट किया। बाद में इसके किसी चौथे को बेच दिया। ठगी की जानकारी होने के बाद पीड़ितों ने कैंट थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया। 9 मार्च 2016 में लाइफ डायग्नोसिस्टक सेंटर के मालिक डॉ. अमित गोयल ने 43 लाख रुपये ठगी का केस दर्ज कराया। इस मामले में कोर्ट से अरविंद के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी हो चुका है। इसके अलावा उसी फ्लैट को बेचने के नाम पर एनआरआई एमएस गुप्ता से तीन लाख, व्यापारी मनीष रूंगटा से भी 36 लाख रुपये ऐंठे थे। एनआरआई की तहरीर पर भी कैंट थाने में केस दर्ज किया गया था।
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कैंट पुलिस को लंबे समय से उसकी तलाश में थी कि इसी बीच राजघाट क्षेत्र के दिनेश गुप्ता ने सीओ से जालसाजी की शिकायत की जिसके बाद वह पुलिस की गिरफ्त में आया। इसकी जानकारी ठगी के शिकार हुए लोगों को हुई तो उच्चाधकिरियों को मामले से अवगत कराया, जिसके बाद राजघाट पुलिस ने भी दिनेश की तहरीर पर धोखाधड़ी, धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज कर पुराने मामले को जोड़ते हुए जेल भेजा।
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पिता की साख पर कई साल बचा
डॉ. अरविंद पिता की साख पर कई साल बचता रहा। पहले तो डॉक्टरों ने लिहाज में कुछ नहीं बोला और उसके रुपये वापस कर देने की बात पर यकीन करते रहे लेकिन बाद में जब पता चला कि कई लोगों से रुपये ऐंठे है तो मामला थाने तक पहुंचा और केस दर्ज किया गया।
 
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पुलिस के भरोसे में फंस गया अरविंद
राजघाट पुलिस ने उसे व्यापारिक मित्र दिनेश से लेनदेन के विवाद में बुलाया था। सूत्रों की माने तो भरोसा भी पुलिस ने यही दिलाया था कि आपसी बातचीत के बाद मामला रफा दफा हो जाएगा। राजघाट थाना पुलिस भी इसी में लगी थी लेकिन भनक आला अफसरों को भी लग गई। जिसके बाद सीओ कोतवाली ने सख्ती दिखाई और एसएसपी तक मामला पहुंचने के बाद केस दर्ज कर लिया गया। पीड़ितों ने खुद ही आला अफसरों तक अपनी फरियाद पहुंचाई थी।

इनकम टैक्स अफसर और सांसद को भी नहीं छोड़ा
गोरखपुर में पहले तैनात रहे दो इनकम टैक्स अफसर, भाजपा सांसद से भी जमीन और फ्लैट देने के नाम पर अरविंद ने रुपये ऐंठे थे। तीन साल से कैंट पुलिस उसके पीछे लगी थी लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही थी।

लखनऊ में किराए के मकान में हो गया था शिफ्ट
डॉक्टरों को ठगी का शिकार बनाने के बाद डॉ. अरविंद ने शहर छोड़ दिया था। वह परिवार के साथ लखनऊ में किराए के मकान में शिफ्ट हो गया था। सूत्रों की माने तो वह किराए का घर बदलता रहता है। इसके चलते पकड़ में नहीं आ रहा था।

अरविंद की डाक्टरी की डिग्री पर भी सवाल
डॉ. अरविंद की डिग्री पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। पिता की आम सोहबत अच्छा होने की वजह से किसी ने ध्यान नहीं दिया। शुरुआत में उसने खुद को आर्थों के विशेषज्ञ के रूप में मशहूर किया। लेकिन बाद में जालसाजी करने लगा।

आरोपी के खिलाफ राजघाट थाने में भी केस दर्ज कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेजा गया है। आरोपी पर कैंट थाने में भी केस दर्ज है। - बीपी सिंह, सीओ कोतवाली

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