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विदेशी ग्राहकों को भा रही गीताप्रेस की नेपाल शाखा
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Sat, 17 Mar 2018 07:47 PM IST
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गीताप्रेस गोरखपुर।
- फोटो : Amar Ujala
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गीताप्रेस की नेपाल शाखा विदेशी ग्राहकों को खूब भा रही है। बीते साल शुरू हुई इस शाखा से बड़े पैमाने पर हिंदू धार्मिक साहित्य विदेशों में जा रहा है। इससे उत्साहित गीताप्रेस नेपाल शाखा के संस्थापक व्यवस्थापक जय किशन सारडा यूके और यूएस में स्टाल खोलने की योजना में लग गए हैं।
गीताप्रेस के ट्रस्टी देवी दयाल अग्रवाल ने बताया कि भारत में पोस्टल चार्ज ज्यादा होने से विदेशी ग्राहक गोरखपुर से किताबें कम ले रहे हैं। वहीं हमारी नेपाल शाखा से विदेशों में खूब किताबें जा रही हैं। नेपाल शाखा के संस्थापक व्यवस्थापक जय किशन सारडा ने बताया कि नेपाल की बड़ी आबादी विदेशों में रहती है। यहां से विदेश जाने वालों की बड़ी संख्या है। ऐसे लोग काठमांडू शाखा से किताब लेकर जाते हैं। इसके साथ ही सनातन संस्कृति में रुझान रखने वाले विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में यहां से किताबें लेकर लौटते हैं। भारत की तुलना में नेपाल में लगने वाला पोस्टल चार्ज भी कम है। ऐसे में किताबें बुक कराने वालों की संख्या भी अच्छी खासी है।
विदेशों में सेंटर खोलने के प्रयास तेज
गीताप्रेस नेपाल शाखा नेपाली भाषी लोगों तक सस्ती कीमत पर विश्वसनीय धार्मिक साहित्य पहुंचाने के लिए अमेरिका और ब्रिटेन में भी सेंटर खोलने की दिशा में काम कर रही है। गीताप्रेस नेपाल के संस्थापक व्यवस्थापक जय किशन सारडा ने बताया कि नेपाल की कुल आबादी पांच करोड़ है, लेकिन इसमें से करीब दो करोड़ लोग विदेशों में रोजीरोटी कमाते हैं। कोशिश है कि उन तक गीताप्रेस की पुस्तकें पहुंचें।
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हाल ही में छापी नेपाली भाषा में गीता
गीताप्रेस की नेपाल शाखा ने सनातन संस्कृति की प्राण ग्रंथ गीता को नेपाली भाषा में छापा है। पुस्तक के अनुवाद का काम नेपाल के काठमांडू शाखा में हुआ और इसकी छपाई गोरखपुर से। नेपाल शाखा के संस्थापक व्यवस्थापक जय किशन सारडा ने बताया कि संस्कृत की रामायण, शिवपुराण, भागवत और हिमवंत खंड भी जल्द ही नेपाली भाषा में पढ़ने को मिलेगी।
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गीताप्रेस के ट्रस्टी देवी दयाल अग्रवाल ने बताया कि भारत में पोस्टल चार्ज ज्यादा होने से विदेशी ग्राहक गोरखपुर से किताबें कम ले रहे हैं। वहीं हमारी नेपाल शाखा से विदेशों में खूब किताबें जा रही हैं। नेपाल शाखा के संस्थापक व्यवस्थापक जय किशन सारडा ने बताया कि नेपाल की बड़ी आबादी विदेशों में रहती है। यहां से विदेश जाने वालों की बड़ी संख्या है। ऐसे लोग काठमांडू शाखा से किताब लेकर जाते हैं। इसके साथ ही सनातन संस्कृति में रुझान रखने वाले विदेशी पर्यटक भी बड़ी संख्या में यहां से किताबें लेकर लौटते हैं। भारत की तुलना में नेपाल में लगने वाला पोस्टल चार्ज भी कम है। ऐसे में किताबें बुक कराने वालों की संख्या भी अच्छी खासी है।
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विदेशों में सेंटर खोलने के प्रयास तेज
गीताप्रेस नेपाल शाखा नेपाली भाषी लोगों तक सस्ती कीमत पर विश्वसनीय धार्मिक साहित्य पहुंचाने के लिए अमेरिका और ब्रिटेन में भी सेंटर खोलने की दिशा में काम कर रही है। गीताप्रेस नेपाल के संस्थापक व्यवस्थापक जय किशन सारडा ने बताया कि नेपाल की कुल आबादी पांच करोड़ है, लेकिन इसमें से करीब दो करोड़ लोग विदेशों में रोजीरोटी कमाते हैं। कोशिश है कि उन तक गीताप्रेस की पुस्तकें पहुंचें।
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हाल ही में छापी नेपाली भाषा में गीता
गीताप्रेस की नेपाल शाखा ने सनातन संस्कृति की प्राण ग्रंथ गीता को नेपाली भाषा में छापा है। पुस्तक के अनुवाद का काम नेपाल के काठमांडू शाखा में हुआ और इसकी छपाई गोरखपुर से। नेपाल शाखा के संस्थापक व्यवस्थापक जय किशन सारडा ने बताया कि संस्कृत की रामायण, शिवपुराण, भागवत और हिमवंत खंड भी जल्द ही नेपाली भाषा में पढ़ने को मिलेगी।