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नवजात के अज्ञात मां-बाप के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
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नवजात के अज्ञात मां-बाप के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
- जिले में पहली बार दर्ज हुआ लावारिस मिले नवजात का केस
- कप्तानगंज पुलिस ने 317 आईपीसी के तहत दर्ज किया अभियोग
-अभिभावक के खिलाफ सात वर्ष तक की सजा व अर्थदंड का है प्रावधान
- शनिवार की शाम को लोहेपार व घिवहीं के बीच सड़क के किनारे मिली थी नवजात
- अभी भी जिला अस्पताल में चल रहा है नवजात बालिका शिशु का इलाज
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। कप्तानगंज थाना क्षेत्र के मथौली बाजार के पास दो दिन पहले शनिवार को सड़क के किनारे नवजात बालिका शिशु को फेंके जाने के मामले में कप्तानगंज पुलिस ने सोमवार को मामला दर्ज कर लिया। भारतीय दंड संहिता की धारा 317 आईपीसी (12 वर्ष तक के बच्चे को परित्याग कर जीवन खतरे में डालना ) के तहत प्रदेश में संभवत: यह पहला मामला दर्ज हुआ है। इस मामले में लोहेपार गांव के प्रधान प्रतिनिधि प्रेमचंद्र सिंह की तहरीर पर यह मामला दर्ज हुआ है। अभी तक इस मामले में पुलिस बच्चे की बरामदगी का ब्यौरा रोजनामचे में दर्ज करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेती थी। अब इस मामले में पुलिस को अनुसंधान करना होगा। फिलहाल इस नवजात का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। चाइल्ड लाइन की टीम बच्ची की देखभाल कर रही है।
इस मुकदमे का दर्ज होना इस मायने में अहम है कि अगर मामले दर्ज होते रहे और पुलिस ने ठीक से अनुसंधान किया तो ऐसे अभिभावक जेल के सीखचों के पीछे होंगे, जो नवजात को मरने के लिए फेंक जाते हैं। प्रावधान होने के बावजूद पुलिस इस कानूनी व्यवस्था की अनदेखी कर रही थी। इसका फायदा उन दंपतियों को मिल रहा था, जो लिंगभेद या अन्य कारणों से नवजात को मरने के लिए कहीं भी फेंक आते थे। ऐसे ही किसी हृदयहीन मां-बाप ने शनिवार शाम को लोहेपार व घिवहीं गांव के बीच सड़क किनारे एक नवजात कन्या को फेंक दिया था। रोने की आवाज सुनकर लोग पहुंचे तो झाड़ियों पर एक शिशु पड़ा था। देखकर अनुमान लगाया जा रहा था कि कुछ ही घंटों पहले उसने इस दुनिया में सांस ली है। मौके पर पहुंची कप्तानगंज पुलिस ने नवजात को मथौली सीएचसी पहुंचाया गया। वहां डॉक्टर ने इलाज की जरूरत बताते हुए बच्ची को जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। तब तक पुलिस की सूचना पर चाइल्ड लाइन की टीम भी वहां पहुंची। चाइल्ड लाइन की टीम नवजात शिशु को लेकर जिला अस्पताल पहुंची, जहां अभी भी उसका इलाज चल रहा है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार सिंह का कहना है कि बच्ची की हालत में सुधार है। अभी उसे सघन कक्ष में रखा गया है। एसओ कप्तानगंज अनुज कुमार सिंह का कहना है कि इस प्रकरण की छानबीन वे स्वयं कर रहे हैं।
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सात साल तक की सजा का है प्रावधान
आईपीसी की धारा 317 किसी शिशु के पिता या माता या उसकी देखरेख रखने वाले व्यक्ति द्वारा 12 वर्ष या उससे कम आयु के शिशु का परित्याग और असुरक्षित डाल देने या छोड़ देने से संबंधित है। ऐसा करने वाले को सात साल तक की जेल या आर्थिक दंड अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है। यह प्रथम श्रेणी के न्याधीश द्वारा विचारणीय है।
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गोशाला प्रकरण: प्रभारी एडीओ समेत दो पर केस दर्ज
गोशाला में
हियुवा जिला अध्यक्ष ने रुधौली थाने में दी तहरीर
हिंदू जन भावनाओं को आहत करने का लगा आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
रुधौली। बजहां गोशाला से सफाईकर्मी के गायों की मरने की सूचना देने पर, उन्हें खा जाने की सलाह देने और अभद्र व्यवहार करने वाले प्रभारी एडीओ राजेश पांडेय एवं एक अज्ञात के खिलाफ रविवार रात को मुकदमा दर्ज कर लिया गया। हिन्दू युवा वाहिनी के जिलाध्यक्ष अजय अज्जू हिंदुस्थानी ने एडीओ समेत दो लोगों के खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने और गाली देने की तहरीर दी थी।
तहरीर में आरोप लगाया है कि संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी/प्रभारी एडीओ पंचायत गायों के मरने की सूचना पर सफाई कर्मी को अपशब्द कहे तथा मृत जानवरों को खाने की बात कहकर कर हिंदू जनमानस की भावनाओं को आहत किया। संबंधित सफाईकर्मी के साथ भी अपमानजनक व्यवहार किया। इस मामले का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया था। आनन-फानन में उच्चाधिकारियों ने एडीओ राजेश पांडेय को शनिवार देर रात निलंबित कर दिया था। अजय की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 295 ए (धार्मिक भावनाएं भड़काने )एवं 504 (गाली-गलौच) के तहत मामला दर्ज किया है। सफाईकर्मियों के संगठन भी इस घटना पर उद्वेलित हो गए थे। हियुवा जिलाध्यक्ष ने बताया कि इस प्रकरण में एसपी पंकज कुमार से भी मुलाकात की है। उन्होंने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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- जिले में पहली बार दर्ज हुआ लावारिस मिले नवजात का केस
- कप्तानगंज पुलिस ने 317 आईपीसी के तहत दर्ज किया अभियोग
-अभिभावक के खिलाफ सात वर्ष तक की सजा व अर्थदंड का है प्रावधान
- शनिवार की शाम को लोहेपार व घिवहीं के बीच सड़क के किनारे मिली थी नवजात
- अभी भी जिला अस्पताल में चल रहा है नवजात बालिका शिशु का इलाज
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। कप्तानगंज थाना क्षेत्र के मथौली बाजार के पास दो दिन पहले शनिवार को सड़क के किनारे नवजात बालिका शिशु को फेंके जाने के मामले में कप्तानगंज पुलिस ने सोमवार को मामला दर्ज कर लिया। भारतीय दंड संहिता की धारा 317 आईपीसी (12 वर्ष तक के बच्चे को परित्याग कर जीवन खतरे में डालना ) के तहत प्रदेश में संभवत: यह पहला मामला दर्ज हुआ है। इस मामले में लोहेपार गांव के प्रधान प्रतिनिधि प्रेमचंद्र सिंह की तहरीर पर यह मामला दर्ज हुआ है। अभी तक इस मामले में पुलिस बच्चे की बरामदगी का ब्यौरा रोजनामचे में दर्ज करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेती थी। अब इस मामले में पुलिस को अनुसंधान करना होगा। फिलहाल इस नवजात का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। चाइल्ड लाइन की टीम बच्ची की देखभाल कर रही है।
इस मुकदमे का दर्ज होना इस मायने में अहम है कि अगर मामले दर्ज होते रहे और पुलिस ने ठीक से अनुसंधान किया तो ऐसे अभिभावक जेल के सीखचों के पीछे होंगे, जो नवजात को मरने के लिए फेंक जाते हैं। प्रावधान होने के बावजूद पुलिस इस कानूनी व्यवस्था की अनदेखी कर रही थी। इसका फायदा उन दंपतियों को मिल रहा था, जो लिंगभेद या अन्य कारणों से नवजात को मरने के लिए कहीं भी फेंक आते थे। ऐसे ही किसी हृदयहीन मां-बाप ने शनिवार शाम को लोहेपार व घिवहीं गांव के बीच सड़क किनारे एक नवजात कन्या को फेंक दिया था। रोने की आवाज सुनकर लोग पहुंचे तो झाड़ियों पर एक शिशु पड़ा था। देखकर अनुमान लगाया जा रहा था कि कुछ ही घंटों पहले उसने इस दुनिया में सांस ली है। मौके पर पहुंची कप्तानगंज पुलिस ने नवजात को मथौली सीएचसी पहुंचाया गया। वहां डॉक्टर ने इलाज की जरूरत बताते हुए बच्ची को जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। तब तक पुलिस की सूचना पर चाइल्ड लाइन की टीम भी वहां पहुंची। चाइल्ड लाइन की टीम नवजात शिशु को लेकर जिला अस्पताल पहुंची, जहां अभी भी उसका इलाज चल रहा है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार सिंह का कहना है कि बच्ची की हालत में सुधार है। अभी उसे सघन कक्ष में रखा गया है। एसओ कप्तानगंज अनुज कुमार सिंह का कहना है कि इस प्रकरण की छानबीन वे स्वयं कर रहे हैं।
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सात साल तक की सजा का है प्रावधान
आईपीसी की धारा 317 किसी शिशु के पिता या माता या उसकी देखरेख रखने वाले व्यक्ति द्वारा 12 वर्ष या उससे कम आयु के शिशु का परित्याग और असुरक्षित डाल देने या छोड़ देने से संबंधित है। ऐसा करने वाले को सात साल तक की जेल या आर्थिक दंड अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है। यह प्रथम श्रेणी के न्याधीश द्वारा विचारणीय है।
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गोशाला प्रकरण: प्रभारी एडीओ समेत दो पर केस दर्ज
गोशाला में
हियुवा जिला अध्यक्ष ने रुधौली थाने में दी तहरीर
हिंदू जन भावनाओं को आहत करने का लगा आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
रुधौली। बजहां गोशाला से सफाईकर्मी के गायों की मरने की सूचना देने पर, उन्हें खा जाने की सलाह देने और अभद्र व्यवहार करने वाले प्रभारी एडीओ राजेश पांडेय एवं एक अज्ञात के खिलाफ रविवार रात को मुकदमा दर्ज कर लिया गया। हिन्दू युवा वाहिनी के जिलाध्यक्ष अजय अज्जू हिंदुस्थानी ने एडीओ समेत दो लोगों के खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने और गाली देने की तहरीर दी थी।
तहरीर में आरोप लगाया है कि संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी/प्रभारी एडीओ पंचायत गायों के मरने की सूचना पर सफाई कर्मी को अपशब्द कहे तथा मृत जानवरों को खाने की बात कहकर कर हिंदू जनमानस की भावनाओं को आहत किया। संबंधित सफाईकर्मी के साथ भी अपमानजनक व्यवहार किया। इस मामले का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया था। आनन-फानन में उच्चाधिकारियों ने एडीओ राजेश पांडेय को शनिवार देर रात निलंबित कर दिया था। अजय की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 295 ए (धार्मिक भावनाएं भड़काने )एवं 504 (गाली-गलौच) के तहत मामला दर्ज किया है। सफाईकर्मियों के संगठन भी इस घटना पर उद्वेलित हो गए थे। हियुवा जिलाध्यक्ष ने बताया कि इस प्रकरण में एसपी पंकज कुमार से भी मुलाकात की है। उन्होंने सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।