{"_id":"574da8494f1c1b8e09108ecd","slug":"emargenct-not-opd-also-stalled","type":"story","status":"publish","title_hn":"इमरजेंसी ही नहीं ओपीडी भी ठप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इमरजेंसी ही नहीं ओपीडी भी ठप
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Tue, 31 May 2016 08:35 PM IST
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीजी सीट में पीएमएस संवर्ग के डॉक्टरों को वरीयता देने के विरोध में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। इस दिन सीनियर डॉक्टर भी उनके समर्थन में दिखे और इमरजेंसी के साथ ही ओपीडी भी ठप कर दी गई। हालांकि दूसरे दिन डॉक्टरों के रवैये से मरीज और तीमारदार इस कदर नाराज हो गए कि उन्होंने न सिर्फ मेडिकल कॉलेज गेट पर ताला लगा दिया बल्कि प्रदर्शन करते हुए पुरानी इमरजेंसी के पास पहुंच गए।
यहां एक ओर से तीमारदार तो दूसरी ओर से जूनियर डॉक्टर एक-दूसरे को अपशब्द बोल रहे थे। कई वार्डों में ऐसी स्थिति आई जब तीमारदार और डॉक्टरों के बीच तीखी बहस हुई। करीब 12 बजे कुछ सीनियर डॉक्टर ओपीडी में बैठे, लेकिन इसके पहले ओपीडी ठप होने से बड़ी संख्या में मरीज लौटने को विवश हो गए।
मेडिकल की ओपीडी में रोजाना ढाई से तीन हजार पर्ची कटती है। मंगलवार को करीब 470 ओपीडी पर्ची ही कटी। यहां भर्ती मरीजों की संख्या भी कम हो गई है। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मरीजों को बेहद परेशानी हुई खासकर उन्हें जो गंभीर हाल में भर्ती हैं। मंगलवार को जहां जूनियर डॉक्टर घूम-घूमकर वार्डों में साथी डॉक्टरों को प्रेरित कर रहे थे वहीं उन्होंने यूजर चार्ज काउंटर भी बंद करा दिया था। इसके चलते भर्ती मरीजों का ब्लड टेस्ट भी नहीं हो पा रहा था।
विज्ञापन
जबरन रेफर करने पर हुई हाथापाई
गोरखपुर। वार्ड नंबर आठ के बेड नंबर 39 पर भर्ती मरीज को डॉक्टर गंभीर बताते हुए रेफर करना चाहते थे। इसे लेकर तीमारदार से हाथापाई हो गई। आरोप है कि जूनियर डॉक्टरों ने तीमारदार की पिटाई भी कर दी। कुशीनगर के भटौली निवासी ओमकेश्वर सिंह 28 मई से ही भर्ती हैं। सड़क हादसे में वह घायल हो गए थे और सोमवार को हुई जांच में डॉक्टरों ने उन्हें स्वस्थ भी बताया था। इसी बीच मंगलवार को डॉक्टर उनकी स्थिति नाजुक बताते हुए उन्हें रेफर करने लगेे, जबकि घर वाले डिस्चार्ज करने को कह रहे थे। इसी बात को लेकर विवाद हो गया।
ओटी भी रही ठप, तीमारदार से हाथापाई
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से ओटी भी ठप रही। गायनी, आर्थो, जनरल ओटी में मंगलवार को ऑपरेशन नहीं हो सके। सिर्फ नेत्र विभाग की ओटी में ही ऑपरेशन हुए। ऑपरेशन के लिए मरीजों को बुलाने के बाद लौटा दिया गया। इसे लेकर भी जमकर हंगामा हुआ। गायनी विभाग में भी एक तीमारदार और डॉक्टर के बीच हाथापाई हुई।
प्राचार्य के समझाने का नहीं हुआ असर
गोरखपुर। प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों को बुलाकर प्राचार्य ने बैठक की और उन्हें समझाने का भी प्रयास किया मगर वे हड़ताल से लौटने को तैयार नहीं हुए, जबकि प्राचार्य ने उन्हें बताया है कि इस मुद्दे पर प्रमुख सचिव से भी वार्ता हो चुकी है। चूंकि मामला कोर्ट से जुड़ा है इस वजह से सरकार भी अभी इस मामले में कुछ नहीं कर सकती है। सरकार जो कर सकती है, वह कर रही हैं, मगर प्राचार्य के समझाने के बाद भी जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर अडिग रहे।
हड़ताल है, कहीं और ले जाइए मरीज
मेरे छोटे भाई आमिर हसन सड़क हादसे में घायल हो गए हैं। उन्हें मेडिकल कॉलेज लाया गया तो डॉक्टर इलाज नहीं कर रहे। बोल रहे हैं यहां हड़ताल है, कहीं और ले जाओ मरीज, मगर मैं नहीं जाऊंगा। यहीं इलाज कराऊंगा।
- युसूफ हसन, सिद्धार्थनगर
इलाज में कोताही नहीं होनी चाहिए
मेरा बेटा इमरजेंसी वार्ड में भर्ती है। सुबह डॉक्टर उसे देर से देखने आए। समझ में ही नहीं आ रहा है कि आखिर हम लोगों की क्या गलती हैं। हम आखिर जाए भी तो कहां। मरीजों के इलाज में कोताही नहीं होनी चाहिए।
- बैजू गुप्ता, संतकबीरनगर
पर्ची ही नहीं बन पाई
ओपीडी में मैं अपना कान दिखाने आया था। कई दिनों से बहुत दर्द हो रहा है। बस्ती में डॉक्टरों को दिखाया, मगर कोई फायदा नहीं हुआ तो मेडिकल कॉलेज आ गया मगर यहां पर्ची ही नहीं बन पाई। फिर आना पड़ेगा।
- हरिराम, बस्ती
लाइन में लगने के बाद नहीं देखा डॉक्टर ने
पत्नी का पैर टूट गया है। सुबह ही उसे लेकर आ गया। पर्ची भी बन गई, मगर डॉक्टर को दिखाने के लिए लाइन में लगा तो पता चला कि वे भी हड़ताल पर चले गए। अब प्राइवेट अस्पताल लेकर जा रहा हूं।
- अमरनाथ, झारखंडी
सीनियर डॉक्टरों के साथ वार्ता हो गई है। बाल रोग विभाग में सेवा दे रहे 20 में से 10 पीएमएस डॉक्टरों को ट्रॉमा सेंटर संभालने को कहा गया है। सीनियर डॉक्टर समय-समय से दोनों टाइम ओपीडी करेंगे और जूनियरों के संपर्क में रहेंगे। सभी डॉक्टरों की छुट्टियां पहले ही रद्द की जा चुकी हैं। मामला कोर्ट का है। सरकार खुद ही छात्रों के साथ हैं। उनसे भी वार्ता करके समझाने का प्रयास किया जा रहा है।
- प्रो. राजीव मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
यहां एक ओर से तीमारदार तो दूसरी ओर से जूनियर डॉक्टर एक-दूसरे को अपशब्द बोल रहे थे। कई वार्डों में ऐसी स्थिति आई जब तीमारदार और डॉक्टरों के बीच तीखी बहस हुई। करीब 12 बजे कुछ सीनियर डॉक्टर ओपीडी में बैठे, लेकिन इसके पहले ओपीडी ठप होने से बड़ी संख्या में मरीज लौटने को विवश हो गए।
विज्ञापन
मेडिकल की ओपीडी में रोजाना ढाई से तीन हजार पर्ची कटती है। मंगलवार को करीब 470 ओपीडी पर्ची ही कटी। यहां भर्ती मरीजों की संख्या भी कम हो गई है। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मरीजों को बेहद परेशानी हुई खासकर उन्हें जो गंभीर हाल में भर्ती हैं। मंगलवार को जहां जूनियर डॉक्टर घूम-घूमकर वार्डों में साथी डॉक्टरों को प्रेरित कर रहे थे वहीं उन्होंने यूजर चार्ज काउंटर भी बंद करा दिया था। इसके चलते भर्ती मरीजों का ब्लड टेस्ट भी नहीं हो पा रहा था।
विज्ञापन
जबरन रेफर करने पर हुई हाथापाई
गोरखपुर। वार्ड नंबर आठ के बेड नंबर 39 पर भर्ती मरीज को डॉक्टर गंभीर बताते हुए रेफर करना चाहते थे। इसे लेकर तीमारदार से हाथापाई हो गई। आरोप है कि जूनियर डॉक्टरों ने तीमारदार की पिटाई भी कर दी। कुशीनगर के भटौली निवासी ओमकेश्वर सिंह 28 मई से ही भर्ती हैं। सड़क हादसे में वह घायल हो गए थे और सोमवार को हुई जांच में डॉक्टरों ने उन्हें स्वस्थ भी बताया था। इसी बीच मंगलवार को डॉक्टर उनकी स्थिति नाजुक बताते हुए उन्हें रेफर करने लगेे, जबकि घर वाले डिस्चार्ज करने को कह रहे थे। इसी बात को लेकर विवाद हो गया।
ओटी भी रही ठप, तीमारदार से हाथापाई
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से ओटी भी ठप रही। गायनी, आर्थो, जनरल ओटी में मंगलवार को ऑपरेशन नहीं हो सके। सिर्फ नेत्र विभाग की ओटी में ही ऑपरेशन हुए। ऑपरेशन के लिए मरीजों को बुलाने के बाद लौटा दिया गया। इसे लेकर भी जमकर हंगामा हुआ। गायनी विभाग में भी एक तीमारदार और डॉक्टर के बीच हाथापाई हुई।
प्राचार्य के समझाने का नहीं हुआ असर
गोरखपुर। प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों को बुलाकर प्राचार्य ने बैठक की और उन्हें समझाने का भी प्रयास किया मगर वे हड़ताल से लौटने को तैयार नहीं हुए, जबकि प्राचार्य ने उन्हें बताया है कि इस मुद्दे पर प्रमुख सचिव से भी वार्ता हो चुकी है। चूंकि मामला कोर्ट से जुड़ा है इस वजह से सरकार भी अभी इस मामले में कुछ नहीं कर सकती है। सरकार जो कर सकती है, वह कर रही हैं, मगर प्राचार्य के समझाने के बाद भी जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर अडिग रहे।
हड़ताल है, कहीं और ले जाइए मरीज
मेरे छोटे भाई आमिर हसन सड़क हादसे में घायल हो गए हैं। उन्हें मेडिकल कॉलेज लाया गया तो डॉक्टर इलाज नहीं कर रहे। बोल रहे हैं यहां हड़ताल है, कहीं और ले जाओ मरीज, मगर मैं नहीं जाऊंगा। यहीं इलाज कराऊंगा।
- युसूफ हसन, सिद्धार्थनगर
इलाज में कोताही नहीं होनी चाहिए
मेरा बेटा इमरजेंसी वार्ड में भर्ती है। सुबह डॉक्टर उसे देर से देखने आए। समझ में ही नहीं आ रहा है कि आखिर हम लोगों की क्या गलती हैं। हम आखिर जाए भी तो कहां। मरीजों के इलाज में कोताही नहीं होनी चाहिए।
- बैजू गुप्ता, संतकबीरनगर
पर्ची ही नहीं बन पाई
ओपीडी में मैं अपना कान दिखाने आया था। कई दिनों से बहुत दर्द हो रहा है। बस्ती में डॉक्टरों को दिखाया, मगर कोई फायदा नहीं हुआ तो मेडिकल कॉलेज आ गया मगर यहां पर्ची ही नहीं बन पाई। फिर आना पड़ेगा।
- हरिराम, बस्ती
लाइन में लगने के बाद नहीं देखा डॉक्टर ने
पत्नी का पैर टूट गया है। सुबह ही उसे लेकर आ गया। पर्ची भी बन गई, मगर डॉक्टर को दिखाने के लिए लाइन में लगा तो पता चला कि वे भी हड़ताल पर चले गए। अब प्राइवेट अस्पताल लेकर जा रहा हूं।
- अमरनाथ, झारखंडी
सीनियर डॉक्टरों के साथ वार्ता हो गई है। बाल रोग विभाग में सेवा दे रहे 20 में से 10 पीएमएस डॉक्टरों को ट्रॉमा सेंटर संभालने को कहा गया है। सीनियर डॉक्टर समय-समय से दोनों टाइम ओपीडी करेंगे और जूनियरों के संपर्क में रहेंगे। सभी डॉक्टरों की छुट्टियां पहले ही रद्द की जा चुकी हैं। मामला कोर्ट का है। सरकार खुद ही छात्रों के साथ हैं। उनसे भी वार्ता करके समझाने का प्रयास किया जा रहा है।
- प्रो. राजीव मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज