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दुकान से डील, स्कूल में जमा हो रही कीमत
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Mon, 11 Apr 2016 08:48 PM IST
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बक्शीपुर में होजरी से बच्चे के साथ अभिभावक स्कूल का सामान खरीदते हुए।
- फोटो : shivharsh
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स्कूलों में ड्रेस को लेकर जमकर कमीशनबाजी चल रही है। बहुत सारे स्कूलों की सेटिंग दुकानदारों से है। अभिभावकों से ड्रेस का दाम स्कूल में ही जमा करा लिया है और बदले में उन्हें डील वाली दुकान का टोकन थमा दे रहे हैं। खराब क्वालिटी के ड्रेस की भी मनमानी कीमत वसूली जा रही है। कमीशन के खेल में शहर के नामी गिरामी स्कूल शामिल हैं।
स्कूलों के शिकंजे में फंसे अभिभावकों की मुश्किलें कम नहीं है। ड्रेस लेने के लिए उन्हें दो बार दुकानों पर जाना पड़ेगा। पूरी कीमत लेने के बाद सिर्फ गर्मी के ड्रेस ही दे रहे हैं। स्वेटर, ब्लेजर, फुल पैंट व शर्ट आदि कपड़ों के लिए बाद में बुलाया जा रहा है। यानी कि बगैर कपड़े दिए लाखों रुपये दुकानदार और स्कूल प्रबंधन जमा करा ले रहे हैं।
गोलघर और बक्शीपुर क्षेत्र में स्थित दो दुकानों की डील ज्यादातर स्कूलों से है। वहीं जिन स्कूलों में ड्रेस की अनिवार्यता नहीं है वहां अभिभावक दुकानदारों से मोलभाव भी करा ले रहे हैं। जिससे स्कूल ड्रेस में करीब चार से पांच सौ रुपये का अंतर आ रहा है साथ ही बेहतर क्वालिटी का ड्रेस भी ले रहे हैं।
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स्कूल में ही ड्रेस की कीमत एडमिशन के साथ ही जमा करा लिया गया। कपड़े खरीदने के लिए दुकान का नाम और पता लिखा कार्ड दिया गया। बहुत ही खराब क्वालिटी का ड्रेस दिया गया है और कीमत अधिक ली गई है। इस पर रोक के लिए प्रशासन पहल करे।
- राकेश पांडेय, रुस्तमपुर
इस साल ड्रेस की कीमत भी बढ़ गई है। घर के बच्चे एचपी चिल्ड्रेन स्कूल और कार्मल स्कूल में पढ़ते हैं। दोनों स्कूलों में ड्रेस का शुल्क जमा कराया गया है। दुकान का एक कार्ड दिया गया है जहां ड्रेस लेना अनिवार्य है। स्कूलों की मनमानी पर रोक लगनी चाहिए।
- रत्नेश पांडेय, बुद्ध बिहार पार्ट 3
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स्कूलों के शिकंजे में फंसे अभिभावकों की मुश्किलें कम नहीं है। ड्रेस लेने के लिए उन्हें दो बार दुकानों पर जाना पड़ेगा। पूरी कीमत लेने के बाद सिर्फ गर्मी के ड्रेस ही दे रहे हैं। स्वेटर, ब्लेजर, फुल पैंट व शर्ट आदि कपड़ों के लिए बाद में बुलाया जा रहा है। यानी कि बगैर कपड़े दिए लाखों रुपये दुकानदार और स्कूल प्रबंधन जमा करा ले रहे हैं।
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गोलघर और बक्शीपुर क्षेत्र में स्थित दो दुकानों की डील ज्यादातर स्कूलों से है। वहीं जिन स्कूलों में ड्रेस की अनिवार्यता नहीं है वहां अभिभावक दुकानदारों से मोलभाव भी करा ले रहे हैं। जिससे स्कूल ड्रेस में करीब चार से पांच सौ रुपये का अंतर आ रहा है साथ ही बेहतर क्वालिटी का ड्रेस भी ले रहे हैं।
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स्कूल में ही ड्रेस की कीमत एडमिशन के साथ ही जमा करा लिया गया। कपड़े खरीदने के लिए दुकान का नाम और पता लिखा कार्ड दिया गया। बहुत ही खराब क्वालिटी का ड्रेस दिया गया है और कीमत अधिक ली गई है। इस पर रोक के लिए प्रशासन पहल करे।
- राकेश पांडेय, रुस्तमपुर
इस साल ड्रेस की कीमत भी बढ़ गई है। घर के बच्चे एचपी चिल्ड्रेन स्कूल और कार्मल स्कूल में पढ़ते हैं। दोनों स्कूलों में ड्रेस का शुल्क जमा कराया गया है। दुकान का एक कार्ड दिया गया है जहां ड्रेस लेना अनिवार्य है। स्कूलों की मनमानी पर रोक लगनी चाहिए।
- रत्नेश पांडेय, बुद्ध बिहार पार्ट 3