{"_id":"b70dda2781efcda4081f6ebdcb3a5b1e","slug":"two-more-people-in-kasarwal-case-find-bail-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कसरवाल कांड के दो और आंदोलनकारी रिहा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
कसरवाल कांड के दो और आंदोलनकारी रिहा
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jan 2016 08:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कसरवल कांड में जेल में बंद दो और आंदोलनकारियों को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। मंगलवार को मंडलीय कारागार से आंदोलनकारियों के रिहा होने पर राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। जेल से बाहर आए आंदोलनकारियों ने कहा कि निषाद आरक्षण के लिए उनकी लड़ाई अंतिम सांस तक चलती रहेगी।
सहजनवां के कसरवल कांड में 37 आंदोलनकारी जेल में बंद थे, जिसमें छह आंदोलनकारियों में एक संतकबीरनगर के घेरौरा पिकौरा बखिरा के रहने वाले हरिराम वर्मा 20 जुलाई को जमानत पर रिहा हुए। सात अगस्त को जेल में बंद छह और आंदोलनकारियों को जमानत मिल गई थी। इसके बाद जेल में बंद 31 आंदोलनकारियों ने सेशन कोर्ट में जमानत नामंजूर होने के बाद हाईकोर्ट में अपील की थी।
28 नवंबर को हाईकोर्ट ने जेल में बंद 18 आंदोलनकारियों की जमानत मंजूर कर ली। 16 दिसंबर को देवरिया के रहने वाले जगदीश निषाद और राम किशुन निषाद की जमानत मिली। 19 दिसंबर को पीपीगंज के भक्ता निवासी सुभाष और राम सजन को जमानत मिल गई थी। इसके बाद पीपीगंज के परसौनी निवासी रामरेखा निषाद, खजनी के लखन चंद, राजू निषाद, खोराबार के चंद्रिका, हरनही के मंगरू तथा यहीं के राम किशुन को भी जमानत दे दी गई। मंगलवार को सिद्धार्थनगर के उसका बाजार निवासी मुसाफिर साहनी और पीपीगंज के परसौना निवासी धर्मवीर निषाद को जमानत मिल गई।
विज्ञापन
अब जेल में केवल राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ही रह गए हैं। कसरवल कांड में पुलिस ने उन्हें मुख्य आरोपी बनाया था। राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के पदाधिकारी इंजीनियर प्रवीन निषाद के नेतृत्व में निषाद नेता जेल पहुंच गए। आंदोलनकारियों का स्वागत करने के लिए मथुरा से महेंद्र निषाद, इटावा से कालिका प्रसाद और फिरोजाबाद से निषाद नेता जेल पहुंचे थे।
विज्ञापन
सहजनवां के कसरवल कांड में 37 आंदोलनकारी जेल में बंद थे, जिसमें छह आंदोलनकारियों में एक संतकबीरनगर के घेरौरा पिकौरा बखिरा के रहने वाले हरिराम वर्मा 20 जुलाई को जमानत पर रिहा हुए। सात अगस्त को जेल में बंद छह और आंदोलनकारियों को जमानत मिल गई थी। इसके बाद जेल में बंद 31 आंदोलनकारियों ने सेशन कोर्ट में जमानत नामंजूर होने के बाद हाईकोर्ट में अपील की थी।
विज्ञापन
28 नवंबर को हाईकोर्ट ने जेल में बंद 18 आंदोलनकारियों की जमानत मंजूर कर ली। 16 दिसंबर को देवरिया के रहने वाले जगदीश निषाद और राम किशुन निषाद की जमानत मिली। 19 दिसंबर को पीपीगंज के भक्ता निवासी सुभाष और राम सजन को जमानत मिल गई थी। इसके बाद पीपीगंज के परसौनी निवासी रामरेखा निषाद, खजनी के लखन चंद, राजू निषाद, खोराबार के चंद्रिका, हरनही के मंगरू तथा यहीं के राम किशुन को भी जमानत दे दी गई। मंगलवार को सिद्धार्थनगर के उसका बाजार निवासी मुसाफिर साहनी और पीपीगंज के परसौना निवासी धर्मवीर निषाद को जमानत मिल गई।
विज्ञापन
अब जेल में केवल राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ही रह गए हैं। कसरवल कांड में पुलिस ने उन्हें मुख्य आरोपी बनाया था। राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के पदाधिकारी इंजीनियर प्रवीन निषाद के नेतृत्व में निषाद नेता जेल पहुंच गए। आंदोलनकारियों का स्वागत करने के लिए मथुरा से महेंद्र निषाद, इटावा से कालिका प्रसाद और फिरोजाबाद से निषाद नेता जेल पहुंचे थे।