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एसपी क्राइम करेंगे फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Tue, 12 Apr 2016 09:55 PM IST
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जालसाजी कर नेपाली नागरिकों का पासपोर्ट बनाए जाने के मामले की जांच एसपी क्राइम करेंगे। आईजी ने एसएसपी को जांचकर मामले में दोषी पुलिसकर्मियों के साथ ही पासपोर्ट धारक जिस घर में थे उसके मकान मालिक के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। शिकायतकर्ता से बातचीत के बाद एसएसपी ने मामले की जांच एसपी क्राइम को सौंपी है।
वर्ष 2005 से 2009 के बीच शहर के कूड़ाघाट, शाहपुर के पते पर 91 नेपाली मूल के लोगों ने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। पुलिस, एलआईयू कीवेरिफिकेशन के बाद 60 लोगों को पासपोर्ट मिल गया। भारत - नेपाल मैत्री समाज के अध्यक्ष मोहन लाल गुप्ता ने 2009 में किराए पर कमरा लेकर रहने वाले नेपाली नागरिकों को गोरखपुर का निवासी बताकर पासपोर्ट दिए जाने की शिकायत तत्कालीन आईजी से की थी। जांच में मामला सही मिला।
वेरिफिकेशन करने पर 36 लोग पासपोर्ट में दर्ज पते पर ही नहीं मिले। शासन के मामले का संज्ञान लेने पर तत्कालीन आईजी ने एसपी (ग्रामीण) को जांच करने का निर्देश दिया था। छानबीन में पासपोर्ट बनवाने वाले 36 लोग दोषी मिले थे। इस मामले में 16 जुलाई को कैंट पुलिस ने पासपोर्ट बनवाने वाले 26 और शाहपुर में पांच नेपाली नागरिकों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने और 17 पासपोर्ट अधिनियम के तहत केस दर्ज किया।
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पुलिस ने मामले में शिकायतकर्ता भारत नेपाल मैत्री समाज के अध्यक्ष मोहनलाल गुप्ता को वादी बनाया था। उनकी मौत के बाद संगठन के महामंत्री ने आईजी से मुलाकात कर मामला मानव तस्करी से जुड़ा होने के साथ ही जांच में दोषियों को बचाने का आरोप लगाया था। आईजी एचआर शर्मा ने एसएसपी से पूरे मामले की फिर से जांच कराने को कहा था। मंगलवार को एसएसपी अनंत देव ने एसपी क्राइम प्रदुम्मन सिंह को जांच कर रिपोर्ट देने को कहा।
छह पते पर बने है पासपोर्ट
पासपोर्ट बनवाने के लिए छह पते का इस्तेमाल हुआ था। जीआरडी गेट के पते पर आठ, चंडी भवन के पते पर चार, दुर्गा भवन के पते पर सात, कूड़ाघाट के पते पर तीन, यादव निवास के पते पर चार और जगरनाथ भवन के पते पर दो लोगों का पासपोर्ट जारी किया है। इस पते पर 53 नेपाली नागरिकों ने आवेदन किए थे जिसमें 36 लोगों को निवासी बताते हुए पासपोर्ट जारी करने की संस्तुति पुलिस और एलआईयू के अफसरों ने की है।
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वर्ष 2005 से 2009 के बीच शहर के कूड़ाघाट, शाहपुर के पते पर 91 नेपाली मूल के लोगों ने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। पुलिस, एलआईयू कीवेरिफिकेशन के बाद 60 लोगों को पासपोर्ट मिल गया। भारत - नेपाल मैत्री समाज के अध्यक्ष मोहन लाल गुप्ता ने 2009 में किराए पर कमरा लेकर रहने वाले नेपाली नागरिकों को गोरखपुर का निवासी बताकर पासपोर्ट दिए जाने की शिकायत तत्कालीन आईजी से की थी। जांच में मामला सही मिला।
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वेरिफिकेशन करने पर 36 लोग पासपोर्ट में दर्ज पते पर ही नहीं मिले। शासन के मामले का संज्ञान लेने पर तत्कालीन आईजी ने एसपी (ग्रामीण) को जांच करने का निर्देश दिया था। छानबीन में पासपोर्ट बनवाने वाले 36 लोग दोषी मिले थे। इस मामले में 16 जुलाई को कैंट पुलिस ने पासपोर्ट बनवाने वाले 26 और शाहपुर में पांच नेपाली नागरिकों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने और 17 पासपोर्ट अधिनियम के तहत केस दर्ज किया।
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पुलिस ने मामले में शिकायतकर्ता भारत नेपाल मैत्री समाज के अध्यक्ष मोहनलाल गुप्ता को वादी बनाया था। उनकी मौत के बाद संगठन के महामंत्री ने आईजी से मुलाकात कर मामला मानव तस्करी से जुड़ा होने के साथ ही जांच में दोषियों को बचाने का आरोप लगाया था। आईजी एचआर शर्मा ने एसएसपी से पूरे मामले की फिर से जांच कराने को कहा था। मंगलवार को एसएसपी अनंत देव ने एसपी क्राइम प्रदुम्मन सिंह को जांच कर रिपोर्ट देने को कहा।
छह पते पर बने है पासपोर्ट
पासपोर्ट बनवाने के लिए छह पते का इस्तेमाल हुआ था। जीआरडी गेट के पते पर आठ, चंडी भवन के पते पर चार, दुर्गा भवन के पते पर सात, कूड़ाघाट के पते पर तीन, यादव निवास के पते पर चार और जगरनाथ भवन के पते पर दो लोगों का पासपोर्ट जारी किया है। इस पते पर 53 नेपाली नागरिकों ने आवेदन किए थे जिसमें 36 लोगों को निवासी बताते हुए पासपोर्ट जारी करने की संस्तुति पुलिस और एलआईयू के अफसरों ने की है।