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बवाल के कारण तीन घंटे गर्माया रहा तिवारीपुर का माहौल
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 22 Jun 2016 01:54 AM IST
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मदरसे में लगाए गए इसी लाउडस्पीकर के लिए हुआ बवाल।
- फोटो : amar ujala
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मंगलवार को पूरे तिवारीपुर थाना क्षेत्र में तनाव और सनसनी का कारण बने निजामपुर के मदरसे पर लाउडस्पीकर का विवाद नया नहीं है। लाउडस्पीकर लगाने का विरोध करने वाले पक्ष ने 2004 में भी मदरसे को मस्जिद का रूप देने का आरोप लगाकर तेवर तीखे किए थे तब भी दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे। पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता कराके स्थिति काबू की थी।
वाकया पार्षद नजमा बेगम के घर के सामने स्थित मदरसा नुरुल इस्लाम का है, जिसका संचालन जुबिली इंटर कॉलेज के रिटायर्ड प्रिंसिपल एम. रहमान करते हैं। आसपास रहने वाले कुछ लोगों ने पांच दिन पहले मदरसे पर लाउडस्पीकर लगाने का आरोप लेकर विरोध शुरू किया। पूर्व में हुए समझौते की अनदेखी का मुद्दा उठाते हुए 16 जून को थाने में तहरीर दी थी। सोमवार को दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई लेकिन वार्ता का सार्थक नतीजा न निकलने से तनातनी बरकरार रही।
हल के लिए मंगलवार दोपहर 1.30 बजे तिवारीपुर थाने बुलाकर एडीएम (फाइनेंस), एसपी (सिटी), सीओ कोतवाली की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू कराई गई। इस दौरान दोनों पक्ष के कुछ लोग उग्र तेवर से तेज आवाज में बोलने लगे। अफसरों ने शोर-शराबा करने वालों को थाने से बाहर निकलवाया तो गेट के पास दोनों पक्ष भिड़ गए। दोनों के समर्थन जुटने पर पथराव शुरू हो गया। इसमें नरसिंहपुर निवासी महेंद्र मंझवार और एक अन्य युवक घायल हो गया। महेंद्र को गंभीर हाल में मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।
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थाने के बाहर बवाली हालात देख एडीएम और एसपी के निर्देश पर पुलिस सख्त हुई और लाठीचार्ज करके स्थिति काबू की। इस बीच दुकानें बंद हो जाने से तिवारीपुर क्षेत्र में लगभग तीन घंटे तनाव और अफरा-तफरी की स्थिति रही। भीड़ रोकने के लिए लोगों के घरों से न निकलने की अपील और फोर्स की सख्ती से शांति के बाद भी रात तक तनाव बना रहा।
डेढ़ साल पहले भी आमने सामने हुए थे दोनों पक्ष
तिवारीपुर क्षेत्र में तकरीबन डेढ़ साल पहले भी दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे। उस वक्त मुद्दा बिजली चेकिंग का था। उस वक्त एक पक्ष ने एक ही वर्ग को निशाना बनाकर कार्रवाई करने का आरोप लगाया तो दूसरा पक्ष एकजुट होकर सड़कों पर निकल आया था। तीखी नारेबाजी और प्रदर्शन के बीच दोनों में पथराव भी हुआ था। स्थिति संभालने के लिए दो कंपनी फोर्स लगानी पड़ी थी।
दोपहर तीन बजे डीआईजी, डीएम, एसएसपी का काफिला तिवारीपुर क्षेत्र में पहुंचा। फोर्स के साथ अफसरों ने बड़े काजीपुर, मोहनलालपुर, घोषीपुरवा, निजामपुर, नरसिंहपुर में रूट मार्च कर बवाल की आशंका में दुकानें बंद करा दीं। अधिकारी माइक से लोगों को घर में ही रहने की अपील कर रहे थे। खौफजदा लोगों ने बवाल के बाद कर्फ्यू लगने की जानकारी घर से बाहर गए परिवार के लोगों को दी तो पूरे शहर में बात फैल गई। अखबार के दफ्तर, पुलिस अधिकारियों के मोबाइल नंबर पर सही जानकारी के लिए फोन आने लगे।
क्षेत्र में फोर्स की मौजूदगी के कारण देर रात तक लोगों के जेहन में कर्फ्यू की बात बैठी रही। मोहल्ले में फोर्स का काफिला पहुंचते ही हर तरफ सन्नाटा पसर जा रहा था। स्थिति को लेकर देर रात तक लोगों की बेचैनी बनी रही।
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वाकया पार्षद नजमा बेगम के घर के सामने स्थित मदरसा नुरुल इस्लाम का है, जिसका संचालन जुबिली इंटर कॉलेज के रिटायर्ड प्रिंसिपल एम. रहमान करते हैं। आसपास रहने वाले कुछ लोगों ने पांच दिन पहले मदरसे पर लाउडस्पीकर लगाने का आरोप लेकर विरोध शुरू किया। पूर्व में हुए समझौते की अनदेखी का मुद्दा उठाते हुए 16 जून को थाने में तहरीर दी थी। सोमवार को दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई लेकिन वार्ता का सार्थक नतीजा न निकलने से तनातनी बरकरार रही।
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हल के लिए मंगलवार दोपहर 1.30 बजे तिवारीपुर थाने बुलाकर एडीएम (फाइनेंस), एसपी (सिटी), सीओ कोतवाली की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू कराई गई। इस दौरान दोनों पक्ष के कुछ लोग उग्र तेवर से तेज आवाज में बोलने लगे। अफसरों ने शोर-शराबा करने वालों को थाने से बाहर निकलवाया तो गेट के पास दोनों पक्ष भिड़ गए। दोनों के समर्थन जुटने पर पथराव शुरू हो गया। इसमें नरसिंहपुर निवासी महेंद्र मंझवार और एक अन्य युवक घायल हो गया। महेंद्र को गंभीर हाल में मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।
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थाने के बाहर बवाली हालात देख एडीएम और एसपी के निर्देश पर पुलिस सख्त हुई और लाठीचार्ज करके स्थिति काबू की। इस बीच दुकानें बंद हो जाने से तिवारीपुर क्षेत्र में लगभग तीन घंटे तनाव और अफरा-तफरी की स्थिति रही। भीड़ रोकने के लिए लोगों के घरों से न निकलने की अपील और फोर्स की सख्ती से शांति के बाद भी रात तक तनाव बना रहा।
डेढ़ साल पहले भी आमने सामने हुए थे दोनों पक्ष
तिवारीपुर क्षेत्र में तकरीबन डेढ़ साल पहले भी दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे। उस वक्त मुद्दा बिजली चेकिंग का था। उस वक्त एक पक्ष ने एक ही वर्ग को निशाना बनाकर कार्रवाई करने का आरोप लगाया तो दूसरा पक्ष एकजुट होकर सड़कों पर निकल आया था। तीखी नारेबाजी और प्रदर्शन के बीच दोनों में पथराव भी हुआ था। स्थिति संभालने के लिए दो कंपनी फोर्स लगानी पड़ी थी।
कर्फ्यू की अफवाह से सहमे लोग
पथराव के बाद फोर्स के साथ पहुुंचे अधिकारियों ने रूट मार्च करने के साथ मोहल्ले में घूम रहे लोगों को घर के अंदर भेज दिया। मामले की जानकारी लोगों ने रिश्तेदारों और दोस्तों को दी तो तिवारीपुर क्षेत्र में कर्फ्यू लगने की अफवाह फैल गई। दो घंटे बाद स्थिति काबू में होने के बाद लोग घर से बाहर निकले लेकिन बवाल की आशंका से सहमे नजर आए।दोपहर तीन बजे डीआईजी, डीएम, एसएसपी का काफिला तिवारीपुर क्षेत्र में पहुंचा। फोर्स के साथ अफसरों ने बड़े काजीपुर, मोहनलालपुर, घोषीपुरवा, निजामपुर, नरसिंहपुर में रूट मार्च कर बवाल की आशंका में दुकानें बंद करा दीं। अधिकारी माइक से लोगों को घर में ही रहने की अपील कर रहे थे। खौफजदा लोगों ने बवाल के बाद कर्फ्यू लगने की जानकारी घर से बाहर गए परिवार के लोगों को दी तो पूरे शहर में बात फैल गई। अखबार के दफ्तर, पुलिस अधिकारियों के मोबाइल नंबर पर सही जानकारी के लिए फोन आने लगे।
क्षेत्र में फोर्स की मौजूदगी के कारण देर रात तक लोगों के जेहन में कर्फ्यू की बात बैठी रही। मोहल्ले में फोर्स का काफिला पहुंचते ही हर तरफ सन्नाटा पसर जा रहा था। स्थिति को लेकर देर रात तक लोगों की बेचैनी बनी रही।