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चश्मदीद गवाह आने से बढ़ेंगी पुलिस की मुश्किलें
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Dec 2015 01:19 AM IST
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सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण के दौरान अपने साथ घटना के चश्मदीद गवाह को लेकर पहुंचे डॉ. संजय निषाद ने पुलिस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उनका दावा है कि अब चश्मदीद कोर्ट में बताएगा कि गोली किसने चलाई थी।
संतकबीरनगर के असरफाबाद निवासी सुग्रीव प्रसाद के पुत्र सुजीत कुमार निषाद का कहना है कि वह घटना के दिन आंदोलन में शामिल था।
उस दौरान अखिलेश को बचाने के चक्कर में उसके घुटने के ऊपर गोली लग गई थी। हालांकि इतने दिनों बाद सामने आने के सवाल पर सुजीत ने बताया कि हत्या किए जाने के डर से वह छिप गया था। डॉ. संजय ने कहा कि उनका पहला लक्ष्य जेल में बंद आंदोलनकारियों को रिहा करवाना था। कोर्ट से आंदोलनकारियों को जमानत मिलने के बाद उन्होंने आत्मसमर्पण करने का विचार बनाया था। अब जल्द ही जेल में बंद 13 आंदोलनकारियों को भी जमानत मिल जाएगी।
इन पर दर्ज हुआ था केस
रेलवे ट्रैक जाम करने के दौरान हंगामे पर सहजनवां पुलिस ने 32 नामजद और लगभग दो हजार अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसमें राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद, बस्ती के रघुनाथ निषाद, सहजनवां के कोलम्बस साहनी, मेहदावल संतकबीरनगर के रामभवन, रुद्रपुर देवरिया के राम किशुन, पीपीगंज के धर्मवीर, परसौना पीपीगंज के रामरेखा, खलीलाबाद मोहम्मदपुर के अरविंद, संतकबीरनगर के बखिरा के भदई, भदोही के अच्छेलाल, संतकबीरनगर मेंहदावल के ओंकार, बांसगांव के मंगरू, खोराबार गोरखपुर के चंद्रिका, बांसगांव के राम किशुन, सहजनवां के सुग्रीव, इलाहाबाद के नितेश, मऊ के राजेंद्र, इलाहाबाद के शिव प्रसाद, संतरविदास नगर के श्रीराम, गुलरिहा के जालंधर, गुलरिहा के मनोज, गुलरिहा के लालबिहारी, गोरखपुर के राजू, गोला के रामआशीष, खलीलाबाद के ओमप्रकाश, गोला के राम सकल, मेंहदावल संतकबीरनगर के मुसाफिर, सहजनवां के सुभाष, खजनी के रामबरन, बांसगांव के लखन चंद, गौरीबाजार के देवरिया के जगदीश, सहजनवां के राम सजन शामिल थे।
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संतकबीरनगर के असरफाबाद निवासी सुग्रीव प्रसाद के पुत्र सुजीत कुमार निषाद का कहना है कि वह घटना के दिन आंदोलन में शामिल था।
उस दौरान अखिलेश को बचाने के चक्कर में उसके घुटने के ऊपर गोली लग गई थी। हालांकि इतने दिनों बाद सामने आने के सवाल पर सुजीत ने बताया कि हत्या किए जाने के डर से वह छिप गया था। डॉ. संजय ने कहा कि उनका पहला लक्ष्य जेल में बंद आंदोलनकारियों को रिहा करवाना था। कोर्ट से आंदोलनकारियों को जमानत मिलने के बाद उन्होंने आत्मसमर्पण करने का विचार बनाया था। अब जल्द ही जेल में बंद 13 आंदोलनकारियों को भी जमानत मिल जाएगी।
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इन पर दर्ज हुआ था केस
रेलवे ट्रैक जाम करने के दौरान हंगामे पर सहजनवां पुलिस ने 32 नामजद और लगभग दो हजार अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसमें राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद, बस्ती के रघुनाथ निषाद, सहजनवां के कोलम्बस साहनी, मेहदावल संतकबीरनगर के रामभवन, रुद्रपुर देवरिया के राम किशुन, पीपीगंज के धर्मवीर, परसौना पीपीगंज के रामरेखा, खलीलाबाद मोहम्मदपुर के अरविंद, संतकबीरनगर के बखिरा के भदई, भदोही के अच्छेलाल, संतकबीरनगर मेंहदावल के ओंकार, बांसगांव के मंगरू, खोराबार गोरखपुर के चंद्रिका, बांसगांव के राम किशुन, सहजनवां के सुग्रीव, इलाहाबाद के नितेश, मऊ के राजेंद्र, इलाहाबाद के शिव प्रसाद, संतरविदास नगर के श्रीराम, गुलरिहा के जालंधर, गुलरिहा के मनोज, गुलरिहा के लालबिहारी, गोरखपुर के राजू, गोला के रामआशीष, खलीलाबाद के ओमप्रकाश, गोला के राम सकल, मेंहदावल संतकबीरनगर के मुसाफिर, सहजनवां के सुभाष, खजनी के रामबरन, बांसगांव के लखन चंद, गौरीबाजार के देवरिया के जगदीश, सहजनवां के राम सजन शामिल थे।
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