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एफडी, आरडी के नाम पर करोड़ों की ठगी
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Tue, 07 Jun 2016 11:52 PM IST
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एफडी, आरडी के नाम पर रुपये जमा कराने वाली कंपनी करोड़ों रुपये लेकर फरार हो गई है। नंबर 2015 को ही कंपनी के कार्यालय में ताला लग गया था। मगर कंपनी के अधिकारी एजेंटों को रुपये देने का भरोसा दे रहे थे, जिससे मामला उजागर नहीं हुआ था। अब खुद को ठगा महसूस करने वाले एजेंटों ने आईजी के पास पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। आईजी ने मामले की जांच कर कार्रवाई का आदेश दिया है।
एजेंटों ने बताया कि गोलघर के खोवा गली में वर्ष 2011 में एस्पेन ऑफ कंपनीज की ब्रांच खुली। कंपनी के अधिकारियों ने एजेंट जोड़े और बताया कि कंपनी नेटवर्क मार्केटिंग का काम करती है। इसके तहत कुछ प्रोडक्ट बेचने थे। बदले में एजेंटों को कमीशन मिलने लगा। कुछ दिन बाद अधिकारियों ने कहा कि कंपनी अपनी तीन उप कंपनियों प्रोजेक्ट इंडिया लिमिटेड, निर्माण इंडिया लिमिटेड व इंडस्ट्रीज लिमिटेड में निवेश करने वालों को बैंकिंग की तरह ही फायदे देगी। फायदा बैंकों में निवेश की अपेक्षा ज्यादा होगा। करीब दो सौ एजेंटों ने कंपनी में सैकड़ों लोगों से कराड़ों रुपये निवेश कराए।
एक साल बीतने पर कुछ लोगों को रुपये वापस भी किए गए, मगर दो साल से अधिक समय तक के लिए निवेश करने वालों की मैच्योरिटी पूरा होने का वक्त आया तो अप्रैल 2015 से कंपनी के अधिकारी बजट नहीं आने का बहाना बनाने लगे। नवंबर में जब एजेंटों ने दबाव बनाया तो अधिकारी गायब हो गए। एक दिन कंपनी कार्यालय पर एजेंट पहुंचे तो ताला बंद दिखा।
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मकान मालिक ने बताया कि किराया नहीं मिलने पर उन्होंने कंपनी के लोगों को चेतावनी दी थी तो सभी फ रार हो गए। एक-एक एजेंट के 5 से 50 लाख तक रुपये बकाए हैं। भटहट के मोहम्मद शमीम, सिकंदर, अजीमुल्लाह, खुटहन खास के विकास चंद विश्वास, चकिया, पिपराइच निवासी बलराम, सोनू आदि ने रुपये देने वाले अब हमारे ऊपर दबाव बना रहे हैं।
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एजेंटों ने बताया कि गोलघर के खोवा गली में वर्ष 2011 में एस्पेन ऑफ कंपनीज की ब्रांच खुली। कंपनी के अधिकारियों ने एजेंट जोड़े और बताया कि कंपनी नेटवर्क मार्केटिंग का काम करती है। इसके तहत कुछ प्रोडक्ट बेचने थे। बदले में एजेंटों को कमीशन मिलने लगा। कुछ दिन बाद अधिकारियों ने कहा कि कंपनी अपनी तीन उप कंपनियों प्रोजेक्ट इंडिया लिमिटेड, निर्माण इंडिया लिमिटेड व इंडस्ट्रीज लिमिटेड में निवेश करने वालों को बैंकिंग की तरह ही फायदे देगी। फायदा बैंकों में निवेश की अपेक्षा ज्यादा होगा। करीब दो सौ एजेंटों ने कंपनी में सैकड़ों लोगों से कराड़ों रुपये निवेश कराए।
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एक साल बीतने पर कुछ लोगों को रुपये वापस भी किए गए, मगर दो साल से अधिक समय तक के लिए निवेश करने वालों की मैच्योरिटी पूरा होने का वक्त आया तो अप्रैल 2015 से कंपनी के अधिकारी बजट नहीं आने का बहाना बनाने लगे। नवंबर में जब एजेंटों ने दबाव बनाया तो अधिकारी गायब हो गए। एक दिन कंपनी कार्यालय पर एजेंट पहुंचे तो ताला बंद दिखा।
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मकान मालिक ने बताया कि किराया नहीं मिलने पर उन्होंने कंपनी के लोगों को चेतावनी दी थी तो सभी फ रार हो गए। एक-एक एजेंट के 5 से 50 लाख तक रुपये बकाए हैं। भटहट के मोहम्मद शमीम, सिकंदर, अजीमुल्लाह, खुटहन खास के विकास चंद विश्वास, चकिया, पिपराइच निवासी बलराम, सोनू आदि ने रुपये देने वाले अब हमारे ऊपर दबाव बना रहे हैं।