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झूठे फंसाए गए तो घर बैठे 7 दिन में न्याय
Sat, 05 Jan 2019 12:28 AM IST
ajay Kumar
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Published by: ajay Kumar
Updated Sat, 05 Jan 2019 12:28 AM IST
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गोरखपुर। किसी ने मुकदमे में रंजिशन नामजद करा दिया है तो आप घबराएं नहीं। थाने के चक्कर भी नहीं काटने होंगे। आपको सात दिन में घर बैठे न्याय मिलेगा। आपका नाम मुकदमे से निकाला गया तो इसे थाने, सीओ और पुलिस दफ्तर के नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दिया जाएगा। यही नहीं, वादी (रिपोर्ट लिखाने वाला) के खिलाफ धारा 194/195 में कार्रवाई हो सकती है। इससे फर्जी मुकदमों पर भी अंकुश लगेगा। ऐसा जोन के सभी थानों में लागू हो रहे विवेचना के ‘बदायूं मॉडल’ से संभव होगा। एडीजी गोरखपुर दावा शेरपा ने इसके आदेश सभी एसपी को दिए हैं।
मारपीट हो या कोई और मामला, वादी रिपोर्ट में प्राय: उनका नाम बेवजह लिखा देते हैं जिनसे रंजिश होती है। निर्दोष होने के बावजूद बचने के लिए ऐसे लोगों को थाने-विवेचक के चक्कर काटने पड़ते हैं। कई बार विवेचक पर रिश्वत मांगने के आरोप भी लगते हैं। इसे देखते हुए बदायूं में अप्रैल 2018 में एसपी ने कार्ययोजना तैयार की थी जो वहां सफल रही। अब इसे पूरे सूबे में लागू किया जा रहा है। इसके तहत मुकदमे में नामजदगी गलत होने पर विवेचक को सात दिन में जांच पूरी कर हर रविवार अपने वरिष्ठ अफसर को रिपोर्ट देना होगा। सोमवार को इसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। डीजीपी का मानना है कि इससे अपराध में भी कमी आएगी और विवेचना की गुणवत्ता बढ़ेगी।
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मारपीट हो या कोई और मामला, वादी रिपोर्ट में प्राय: उनका नाम बेवजह लिखा देते हैं जिनसे रंजिश होती है। निर्दोष होने के बावजूद बचने के लिए ऐसे लोगों को थाने-विवेचक के चक्कर काटने पड़ते हैं। कई बार विवेचक पर रिश्वत मांगने के आरोप भी लगते हैं। इसे देखते हुए बदायूं में अप्रैल 2018 में एसपी ने कार्ययोजना तैयार की थी जो वहां सफल रही। अब इसे पूरे सूबे में लागू किया जा रहा है। इसके तहत मुकदमे में नामजदगी गलत होने पर विवेचक को सात दिन में जांच पूरी कर हर रविवार अपने वरिष्ठ अफसर को रिपोर्ट देना होगा। सोमवार को इसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा। डीजीपी का मानना है कि इससे अपराध में भी कमी आएगी और विवेचना की गुणवत्ता बढ़ेगी।
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पुलिस भी न कर सकेगी ‘खेल’
यदि विवेचक ने किसी का नाम मनमाने ढंग से निकाल दिया तो वादी वह नाम फिर जुड़वा सकता है। बस, इसके लिए उसे विवेचक को साक्ष्य देना होगा। इसकी रिपोर्ट थाना प्रभारी के माध्यम से सीओ को भेजी जाएगी। सीओ साक्ष्य की जांच के बाद अपर पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट भेजेंगे। इस स्तर पर जांच के बाद फिर नामजदगी पर फैसला होगा।
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