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अब डेढ़ नहीं, पांच करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले भी माने जाएंगे छोटे व्यापारी

Sat, 21 Dec 2019 10:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 21 Dec 2019 10:56 AM IST
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commercial tax department gorakhpur
जीएसटी - फोटो : SELF
अब डेढ़ करोड़ नहीं, पांच करोड़ रुपये टर्नओवर वाले व्यापारी भी छोटे व्यापारियों की श्रेणी में माने जाएंगे। एक अप्रैल, 2020 से लागू हो रही जीएसटी की नई प्रणाली में यह नई व्यवस्था की गई है। ऐसे व्यापारियों को अब हरेक महीने की बजाए तीन महीने पर एक बार टैक्स रिटर्न फाइल करना होगा।
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ये बातें जीएसटीएन के उपाध्यक्ष वीर सिंह ने कहीं। वे वाणिज्य कर विभाग की ओर से गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षा भवन में ‘जीएसटी में पंजीयन की आवश्यकता और उसके लाभ विषय’ पर आयोजित सेमिनार में बतौर विशेषज्ञ शामिल हुए।
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उन्होंने जीएसटीएन रिटर्न फाइल करने की नई विधियों की जानकारी दी। कहा कि अब करदाताओं की दो श्रेणियां बनाई गई है। पहला पांच करोड़ रुपये से कम टर्नओवर और दूसरा पांच करोड़ रुपये से ज्यादा। पहली श्रेणी के व्यापारियों के लिए तीन महीने पर और पांच करोड़ रुपये से ज्यादा टर्नओवर वालों को हरेक महीने रिटर्न फाइल करना जरूरी होगा।
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उन्होंने कहा कि टैक्स भुगतान जीएसटी पीएमटी 08 के तहत ही होगा, जबकि मौजूदा चल रही व्यवस्था में यह भुगतान जीएसटीआर-3 बी के तहत किया जाता है। पांच करोड़ रुपये सालाना तक का कारोबार करने वाले छोटे कारोबारियों के लिये आरईटी-2 यानी ‘सहज’और आरईटी-3 यानी ‘सुगम’ रिटर्न फार्म तैयार किए गए हैं।

इन्हें केवल बी2सी (सीधे ग्राहकों को आपूर्ति करने वाली कंपनियां) और बी2बी (कंपनियों के बीच) व दोनों तरह का कारोबार करने वालों के आधार पर बांटा गया है। इस दौरान वाणिज्य कर विभाग के एडिशनल कमिश्नर शेषमणि शर्मा, असिस्टेंट कमिश्नर अमित सिंह के अलावा व्यापारी संगठनों के पदाधिकारियों में भोला प्रसाद अग्रहरि, योगेंद्र दुबे, अनूप अग्रवाल, रमेश गुप्ता, रामकृष्ण मिश्र, संजय सिंघानिया समेत व्यापारी, चार्र्टर्ड अकाउंटेंट, टैक्स अधिवक्ता आदि मौजूद रहे।

करेंसी नोट पर लिखी सभी भाषाओं में आएगी जीएसटी की जानकारी
जीएसटीएन मैनेजिंग डायरेक्टर ज्ञान द्विवेदी ने कहा कि जीएसटीएन ने उद्योग जगत और खासतौर से छोटे व्यवसायियों को ध्यान में रखते हुए जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के नए सरल फार्र्म तैयार किए हैं।

ये सरल फार्म जीएसटी नेटवर्क की साइट पर उपलब्ध हैं और परीक्षण के तौर पर कारोबारी इन्हें देख और समझ सकते हैं। फिलहाल यह केवल अंग्रेजी में है लेकिन जल्द ही करेंसी नोट पर लिखी सभी भाषाओं में जीएसटी संबंधी सारी जानकारियां उपलब्ध होंगी।

 

शासन से जीएसटी दर कटौती की मांग करेंगे: पुष्पदंत जैन

उत्तर प्रदेश व्यापारी कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष पुष्पदंत जैन ने कहा कि प्रदेश सरकार व्यापारियों के हितों को लेकर गंभीर है। उनकी हरेक समस्याओं को दूर कराने की कोशिश कर रही है। इस संगोष्ठी में जीएसटी को लेकर जो मांग की गई है उसे सरकार के संज्ञान में लाएंगे। साथ ही 18 प्रतिशत वाले टैक्स स्लैब को कम करके 12 प्रतिशत वाले स्लैब में लाने की मांग होगी।

अब ‘बाघ’ और ‘बकरी’ एक ही घाट का पानी पीते: जवाहर कसौधन
उत्तर प्रदेश व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य जवाहर कसौधन ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद व्यापारियों के मन में अधिकारियों का खौफ नहीं रह गया है। नहीं तो पहले लोग टैक्स विभाग के अधिकारियों के आने के नाम से कांप जाते थे लेकिन अब व्यवस्था काफी बदल गई है। अब टैक्स विभाग के अधिकारियों को लेकर व्यापारियों के मन में भय नहीं रह गया है। अब ‘बाघ’ और ‘बकरी’ एक ही घाट का पानी पीते हैं।

जीएसटी बनाने और लागू करने वालों के बीच सामंजस्य की कमी : संजीत
गोरखपुर विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के शिक्षक डॉ. संजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद एक परिकल्पना थी कि टैक्स प्रणाली आसान हो। लेकिन इसके लागू होने के एक डेढ़ साल के बाद भी इसको लेकर कई तरह की भ्रांतियां बनी हुई हैं। सरकार की अपेक्षा के विपरीत टैक्स रिटर्न में काफी कमी आई है। जहां सरकार को बदली टैक्स प्रणाली में डेढ़ लाख करोड़ टैक्स मिलने की उम्मीद थी, वहां 100 करोड़ के आसपास ही टैक्स मिल सका है। ऐसा लगता है कि जीएसटी के नियम बनाने और उसे लागू करने वालों के बीच तालमेल की कमी रह गई है। इनपुट और आउटपुट क्रेडिट में भी मिलान नहीं हो पा रहा है। असमंजस होने की वजह से छोटे व्यापारी टैक्स अदा नहीं कर रहे हैं। शासन की ओर से सेमिनार आयोजित करना बेहतर कदम है। संभव है कि आने वाले समय में इसका फायदा मिले।
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