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बस चालकों के आंखों की नहीं हो रही जांच
Gorakhpur
Updated Tue, 28 Oct 2014 05:30 AM IST
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गोरखपुर। रोडवेज बस चालकों के आंखों की नियमित जांच नहीं हो रही है। आंखों का कई महीनों से टेस्ट नहीं हुआ है। परिवहन निगम की ये लापरवाही किसी दिन यात्रियों पर भारी पड़ सकती है। रविवार दोपहर गोपलापुर में आजमगढ़ डिपो की बस ने सड़क किनारे आगे-पीछे खड़ी दो कारों में टक्कर मार दी। चालक ने बताया कि उसे कार दिखाई नहीं पड़ रही थी।
यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाने का दावा करने वाला परिवहन निगम उनकी सुरक्षा को लेकर कितने संजीदा हैं, इसका जीता जागता नजारा रविवार दोपहर देखने को मिला। आजमगढ़ डिपो के बस चालक ने सड़क किनारे खड़ी दो कारों में टक्कर मार दी। हालांकि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। लोगों ने जब चालक को पकड़ लिया तो उसने बताया कि उसे खड़ी कार दिखाई नहीं दे रही थी। जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। पिछले कई महीनों से रोडवेज चालकों की आंखों की जांच नहीं कराई गई। इन दिनों त्योहारों को देखते हुए चालकों पर वर्क लोड भी अधिक है। बसों के फेरे भी बढ़ाए जा रहे हैं। ऐसे में बस चालकों की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ गई है। लेकिन, ये जिम्मेदार आंखें बस चलाने के लायक हैं भी या नहीं चालकों को खुद नहीं पता। गोरखपुर रीजन में तकरीबन 800 नियमित और संविदा चालक ड्यूटी कर रहे हैं।
क्या है नियम
- नियम के मुताबिक हर महीने चालकों के आंखों की होनी चाहिए जांच
- अनफिट होने पर लगाया जाता है दूसरे कार्यों में
- नियमानुसार हर महीने शिविर में चालकों का स्वास्थ्य परीक्षण होना चाहिए।
- शिविर के डाक्टरों से फिटनेस प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही चालक बस लेकर जा सकता है।
- साल में एक बार रोडवेज चालकों की आंखों की जांच होती है। अगर किसी चालक की आंख खराब है तो वह मेडिकल रिपोर्ट देकर अधिकारियों को अवगत करा सकता है। स्थानीय स्तर पर सभी डिपो में शिविर लगवाया जाएगा।
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सुग्रीव कुमार राय, क्षेत्रीय प्रबंधक गोरखपुर
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यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाने का दावा करने वाला परिवहन निगम उनकी सुरक्षा को लेकर कितने संजीदा हैं, इसका जीता जागता नजारा रविवार दोपहर देखने को मिला। आजमगढ़ डिपो के बस चालक ने सड़क किनारे खड़ी दो कारों में टक्कर मार दी। हालांकि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ। लोगों ने जब चालक को पकड़ लिया तो उसने बताया कि उसे खड़ी कार दिखाई नहीं दे रही थी। जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। पिछले कई महीनों से रोडवेज चालकों की आंखों की जांच नहीं कराई गई। इन दिनों त्योहारों को देखते हुए चालकों पर वर्क लोड भी अधिक है। बसों के फेरे भी बढ़ाए जा रहे हैं। ऐसे में बस चालकों की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ गई है। लेकिन, ये जिम्मेदार आंखें बस चलाने के लायक हैं भी या नहीं चालकों को खुद नहीं पता। गोरखपुर रीजन में तकरीबन 800 नियमित और संविदा चालक ड्यूटी कर रहे हैं।
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क्या है नियम
- नियम के मुताबिक हर महीने चालकों के आंखों की होनी चाहिए जांच
- अनफिट होने पर लगाया जाता है दूसरे कार्यों में
- नियमानुसार हर महीने शिविर में चालकों का स्वास्थ्य परीक्षण होना चाहिए।
- शिविर के डाक्टरों से फिटनेस प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही चालक बस लेकर जा सकता है।
- साल में एक बार रोडवेज चालकों की आंखों की जांच होती है। अगर किसी चालक की आंख खराब है तो वह मेडिकल रिपोर्ट देकर अधिकारियों को अवगत करा सकता है। स्थानीय स्तर पर सभी डिपो में शिविर लगवाया जाएगा।
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सुग्रीव कुमार राय, क्षेत्रीय प्रबंधक गोरखपुर