{"_id":"67-97055","slug":"Gorakhpur-97055-67","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिचौलियों ने आसमान पर पहुंचा दी जमीन की कीमत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिचौलियों ने आसमान पर पहुंचा दी जमीन की कीमत
Gorakhpur
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:30 AM IST
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गोरखपुर। आटोमोबाइल कंपनी में काम करने वाले और बेतियाहाता में किराये पर रह रहे एक व्यक्ति ने खोराबार इलाके में 530 रुपये प्रति स्क्वायर फीट की कीमत से 1650 स्क्वायर फीट जमीन ली। रजिस्ट्री आदि की प्रक्रिया पूरी कराने के बाद रविवार को वह एक रिश्तेदार को अपनी जमीन दिखाने गए तो वहां से मुंह लटकाए लौटे। जमीन का दाम पूछने के बाद रिश्तेदार की एक टिप्पणी सुन उनका मन बैठ गया। टिप्पणी जमीन की वास्तविक कीमत को लेकर थी। रिश्तेदार ने न केवल उस जमीन की कीमत ज्यादा से ज्यादा 250 से तीन सौ रुपये प्रति स्क्वायर फीट आंकी बल्कि अपने एक जानने वाले से वहां के काश्तकारों से इसकी पुष्टि भी करा दी। अब जमीन खरीदने वाले अपना माथा धुन रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें इस बात का तो अंदाजा था कि जमीन का सौदा कराने वाले कुछ कमीशन लेंगे लेकिन जमीन की कीमत ही दोगुनी कर देंगे इसका अंदाजा न था।
यह घटना तो महज एक बानगी है। दरअसल बिचौलियों ने शहर और उससे सटे इलाकों में जमीन के रेट का सारा समीकरण ही खराब कर दिया है। यह उन्हीं का बुना जाल है कि खुद के आशियानें की चाह रखने वाले आम आदमी के जद से जमीन कोसो दूर निकल चुकी है। निवेश करने वालों को छोड़ दें तो घर बनवाने के लिहाज से जमीन खरीदने वाले और काश्तकारों के अलावा रजिस्ट्री महकमे को भी इनसे हर साल स्टांप ड्यूटी की रकम के तौर पर भारी नुकसान हो रहा है।
काश्तकारों से मामूली सी रक म पर एग्रीमेंट कराकर उसे तय दाम से दोगुने या तीन गुने पर बेचकर ये बिचौलिये मुफ्त में लखपति-करोड़पति हो जा रहे हैं। अप्रैल 2014 से सितंबर महीने तक बैनामों के अलावा जमीन को लेकर 1295 एग्रीमेंट हुए। यानी 215 एग्रीमेंट हर महीने। इनके अलावा बिचौलियों के तमाम छोटे-बड़े ऐसे रैकेट हैं जो गरीब काश्तकारों को तीन-चार लाख की मदद कर उसकी जमीन अपनी बताकर मार्केटिंग कर रहे। रजिस्ट्री के समय जमीन के असल मालिक और काश्तकार को खड़ा कर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करते हैं। तय कीमत के अनुसार उन्हें मामूली रकम देकर दफा करते हैं और दोगुनी रकम लेकर लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं।
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नाम न छापने पर रजिस्ट्री महकमे के एक बड़े अफसर ने भी यह स्वीकार किया कि बिचौलियों की वजह से ही शहर में जमीनों के दाम बढ़ गए हैं। प्लाट विकसित करने में जमीन की वास्तविक कीमत में 20 से 40 फीसदी तक की तो वृद्धि होना स्वभाविक माना जाता है लेकिन यहां दलाल दो गुने या फिर उससे अधिक कीमत वसूल रहे। फर्जी बैनामाें की संख्या में तेजी से हो रही वृद्धि भी इन्हीं बिचौलियों की वजह से है।
कब्जा देने के नाम पर एक भी एग्रीमेंट नहीं
जमीन को लेकर दो तरह के एग्रीमेंट का प्रावधान है। एक कब्जा देने की शर्त को लेकर दूसरा कब्जा नहीं देने को लेकर। जिले में एक भी एग्रीमेंट कब्जा देने की शर्त पर नहीं होता। ऐसा इसलिए क्योंकि उस केस में एग्रीमेंट कराने वाले को जमीन के सर्किल रेट के मुताबिक पूरी स्टांप ड्यूटी जमा करनी पड़ती है। यहां सिर्फ कब्जा न देने की शर्त को लेकर ही एग्रीमेंट होते हैं। ऐसे मामलों में जमीन का अपने नाम करारनामा कराने वाले को काश्तकार से तय कीमत का दो या चार फीसदी का मामूली स्टांप ड्यूटी चार्ज जमा करना पड़ता है। शहर में यह स्टांप ड्यूटी चार फीसदी है जबकि ग्रामीण इलाकों में दो फीसदी। यही नहीं कई मामलों में स्टांप ड्यूटी की रकम बचाने के लिए एग्रीमेंट में दर्ज की गई रकम, काश्तकार से तय हुए सौदे से काफी कम दिखाई जाती है। कुछ मामलों में तो एग्रीमेंट कराने वाले ने काश्तकारों के काफी रुपये भी ठग लिए। चूंकि करारनामे पर रकम क म दर्ज की गई होती है लिहाजा काश्तकार को प्रशासन या पुलिस से भी मदद नहीं मिल पाती।
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यह घटना तो महज एक बानगी है। दरअसल बिचौलियों ने शहर और उससे सटे इलाकों में जमीन के रेट का सारा समीकरण ही खराब कर दिया है। यह उन्हीं का बुना जाल है कि खुद के आशियानें की चाह रखने वाले आम आदमी के जद से जमीन कोसो दूर निकल चुकी है। निवेश करने वालों को छोड़ दें तो घर बनवाने के लिहाज से जमीन खरीदने वाले और काश्तकारों के अलावा रजिस्ट्री महकमे को भी इनसे हर साल स्टांप ड्यूटी की रकम के तौर पर भारी नुकसान हो रहा है।
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काश्तकारों से मामूली सी रक म पर एग्रीमेंट कराकर उसे तय दाम से दोगुने या तीन गुने पर बेचकर ये बिचौलिये मुफ्त में लखपति-करोड़पति हो जा रहे हैं। अप्रैल 2014 से सितंबर महीने तक बैनामों के अलावा जमीन को लेकर 1295 एग्रीमेंट हुए। यानी 215 एग्रीमेंट हर महीने। इनके अलावा बिचौलियों के तमाम छोटे-बड़े ऐसे रैकेट हैं जो गरीब काश्तकारों को तीन-चार लाख की मदद कर उसकी जमीन अपनी बताकर मार्केटिंग कर रहे। रजिस्ट्री के समय जमीन के असल मालिक और काश्तकार को खड़ा कर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करते हैं। तय कीमत के अनुसार उन्हें मामूली रकम देकर दफा करते हैं और दोगुनी रकम लेकर लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं।
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नाम न छापने पर रजिस्ट्री महकमे के एक बड़े अफसर ने भी यह स्वीकार किया कि बिचौलियों की वजह से ही शहर में जमीनों के दाम बढ़ गए हैं। प्लाट विकसित करने में जमीन की वास्तविक कीमत में 20 से 40 फीसदी तक की तो वृद्धि होना स्वभाविक माना जाता है लेकिन यहां दलाल दो गुने या फिर उससे अधिक कीमत वसूल रहे। फर्जी बैनामाें की संख्या में तेजी से हो रही वृद्धि भी इन्हीं बिचौलियों की वजह से है।
कब्जा देने के नाम पर एक भी एग्रीमेंट नहीं
जमीन को लेकर दो तरह के एग्रीमेंट का प्रावधान है। एक कब्जा देने की शर्त को लेकर दूसरा कब्जा नहीं देने को लेकर। जिले में एक भी एग्रीमेंट कब्जा देने की शर्त पर नहीं होता। ऐसा इसलिए क्योंकि उस केस में एग्रीमेंट कराने वाले को जमीन के सर्किल रेट के मुताबिक पूरी स्टांप ड्यूटी जमा करनी पड़ती है। यहां सिर्फ कब्जा न देने की शर्त को लेकर ही एग्रीमेंट होते हैं। ऐसे मामलों में जमीन का अपने नाम करारनामा कराने वाले को काश्तकार से तय कीमत का दो या चार फीसदी का मामूली स्टांप ड्यूटी चार्ज जमा करना पड़ता है। शहर में यह स्टांप ड्यूटी चार फीसदी है जबकि ग्रामीण इलाकों में दो फीसदी। यही नहीं कई मामलों में स्टांप ड्यूटी की रकम बचाने के लिए एग्रीमेंट में दर्ज की गई रकम, काश्तकार से तय हुए सौदे से काफी कम दिखाई जाती है। कुछ मामलों में तो एग्रीमेंट कराने वाले ने काश्तकारों के काफी रुपये भी ठग लिए। चूंकि करारनामे पर रकम क म दर्ज की गई होती है लिहाजा काश्तकार को प्रशासन या पुलिस से भी मदद नहीं मिल पाती।