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शास्त्रों में है वैश्विक समस्या का समाधान
Gorakhpur
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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गोरखपुर। शास्त्रों में निहित है वैश्विक समस्या का समाधान। शास्त्र सम्मत विधि विधान का पालन हो तो दुनिया में कोई दिक्कत ही न पैदा हो। इतना ही नहीं इससे पर्यावरण को भी शुद्ध रखा जा सकता है। सभी जीव जंतु की रक्षा हो सकती है। यह कहना था संपूर्णानंद संस्कृ त विश्वविद्यालय के पुराणे इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. गंगाधर पंडा का।
यूनिवर्सिटी के संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विभाग की तीन दिवसीय गोष्ठी के समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. पंडा ने महाकवि कालिदास की रचनाओं अभिज्ञान शाकुंतलम् और रघुवंश के उद्धरणों को प्रस्तुत कर लोकमंगल से संबंधित संदर्भों का बखूबी चित्रण किया। कहा कि महाकाव्य हों या शास्त्र अथवा पुराण सभी प्रकृति से प्रेम करने की ही शिक्षा देते हैं। बताया कि महर्षि वेद व्यास ने भी 18 पुराणों में परोपकार को सर्वश्रेष्ठ बताया है। समापन समारोह की अध्यक्षता पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष संस्कृत विभाग प्रो. करुणेश शुक्ल ने की। विभागाध्यक्ष प्रो. कपिलदेव शुक्ल ने आभार जताया। इस मौके पर डॉ. अरविंद प्रबोध मिश्र, डॉ. कौशिल्या, डॉ. बिंदु गुप्ता आदि ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन प्रो. श्रीधर मिश्र ने किया।
यूनिवर्सिटी के संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विभाग की तीन दिवसीय गोष्ठी के समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. पंडा ने महाकवि कालिदास की रचनाओं अभिज्ञान शाकुंतलम् और रघुवंश के उद्धरणों को प्रस्तुत कर लोकमंगल से संबंधित संदर्भों का बखूबी चित्रण किया। कहा कि महाकाव्य हों या शास्त्र अथवा पुराण सभी प्रकृति से प्रेम करने की ही शिक्षा देते हैं। बताया कि महर्षि वेद व्यास ने भी 18 पुराणों में परोपकार को सर्वश्रेष्ठ बताया है। समापन समारोह की अध्यक्षता पूर्व आचार्य एवं अध्यक्ष संस्कृत विभाग प्रो. करुणेश शुक्ल ने की। विभागाध्यक्ष प्रो. कपिलदेव शुक्ल ने आभार जताया। इस मौके पर डॉ. अरविंद प्रबोध मिश्र, डॉ. कौशिल्या, डॉ. बिंदु गुप्ता आदि ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन प्रो. श्रीधर मिश्र ने किया।
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