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नरक चतुर्दशी, हनुमान जयंती आज
Gorakhpur
Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
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गोरखपुर। हनुमान जयंती के साथ ही सोमवार को नरक चतुर्दशी है। इस दिन लोग यम के निमित्त पूजन और तर्पण करते हैं। इसे रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है। दोपहर के समय हनुमानजी की पूजा के साथ ही भगवान श्रीकृष्ण की पूजा भी की जाती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित शरद चंद्र मिश्र, राजेंद्र बहादुर श्रीवास्तव के अनुसार सोमवार को सूर्योदय 6.35 बजे है और त्रयोदशी तिथि का मान 8.35 बजे तक है। इसके बाद चतुर्दशी शुरू होगी। स्नान से पहले तिल के तेल से शरीर की मालिश करनी चाहिए। इस दिन तेल में लक्ष्मी और जल में गंगा का निवास माना जाता है। इसके बाद यम तर्पण होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर का वध कर उसके आतंक से लोगों को मुक्ति दिलाई थी। इसलिए इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। प्रदोषकाल में लोगों को चार बातियों वाला दीपक जलाना चाहिए। हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा, बजरंग बाण के साथ ही सुंदरकांड का पाठ फलदायक होता है।
धनवन्तरि देव की हुई पूजा
धनतेरस के दिन शहर में कई जगहों पर धनवन्तरि देव की पूजा कर लोगों ने बेहतर स्वास्थ्य की कामना की। मानसरोवर रामलीला मैदान के निकट आत्मशंकर आयुर्वेद औषद्यालय पर धनवन्तरि जयंती पर पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। वैद्य अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि समुद्र मंथन में अमृत कलश लिये धनवन्तरि की उत्पत्ति हुई थी। एक हाथ में अमृत कलश, दूसरे में आयुर्वेद ग्रंथ और तीसरे में जड़ी बूटियां और चौथे में शंख धारण किए हुए थे। पूजा में ऊं धन्वंतरये नम: मंत्र का जाप किया गया। राज क्लीनिक, पादरी बाजार में भी धन्वंतरि पूजन का आयोजन किया गया। डॉ. वीके सिंह ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में औषधि के सम्यक चयन के साथ अनुपान का भी महत्व है। सिन्हा चिकित्सालय पर आयोजित कार्यक्रम में वैद्य राजीव सिन्हा ने कहा कि आयुर्वेद के जनक के रूप में धनवन्तरि देव की पूजा सदैव की जाएगी।
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ज्योतिषाचार्य पंडित शरद चंद्र मिश्र, राजेंद्र बहादुर श्रीवास्तव के अनुसार सोमवार को सूर्योदय 6.35 बजे है और त्रयोदशी तिथि का मान 8.35 बजे तक है। इसके बाद चतुर्दशी शुरू होगी। स्नान से पहले तिल के तेल से शरीर की मालिश करनी चाहिए। इस दिन तेल में लक्ष्मी और जल में गंगा का निवास माना जाता है। इसके बाद यम तर्पण होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर का वध कर उसके आतंक से लोगों को मुक्ति दिलाई थी। इसलिए इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। प्रदोषकाल में लोगों को चार बातियों वाला दीपक जलाना चाहिए। हनुमान जयंती पर हनुमान चालीसा, बजरंग बाण के साथ ही सुंदरकांड का पाठ फलदायक होता है।
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धनवन्तरि देव की हुई पूजा
धनतेरस के दिन शहर में कई जगहों पर धनवन्तरि देव की पूजा कर लोगों ने बेहतर स्वास्थ्य की कामना की। मानसरोवर रामलीला मैदान के निकट आत्मशंकर आयुर्वेद औषद्यालय पर धनवन्तरि जयंती पर पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। वैद्य अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि समुद्र मंथन में अमृत कलश लिये धनवन्तरि की उत्पत्ति हुई थी। एक हाथ में अमृत कलश, दूसरे में आयुर्वेद ग्रंथ और तीसरे में जड़ी बूटियां और चौथे में शंख धारण किए हुए थे। पूजा में ऊं धन्वंतरये नम: मंत्र का जाप किया गया। राज क्लीनिक, पादरी बाजार में भी धन्वंतरि पूजन का आयोजन किया गया। डॉ. वीके सिंह ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में औषधि के सम्यक चयन के साथ अनुपान का भी महत्व है। सिन्हा चिकित्सालय पर आयोजित कार्यक्रम में वैद्य राजीव सिन्हा ने कहा कि आयुर्वेद के जनक के रूप में धनवन्तरि देव की पूजा सदैव की जाएगी।
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