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जीडीए ने आठ साल बाद देना शुरू किया कब्जा

Fri, 19 Jan 2018 12:54 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Fri, 19 Jan 2018 12:54 AM IST
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जीडीए ने आठ साल बाद देना शुरू किया कब्जा
किसानों को जुटता देख जीडीए और पुलिस प्रशासन के अफसर मौके पर पहुंचे थे।
भूखंड आवंटन के आठ साल बाद गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के अफसरों ने राप्तीनगर आवासीय विस्तार योजना के आवंटियों को कब्जा दिलाना शुरू कर दिया। भारी फोर्स के साथ जीडीए, प्रशासन और पुलिस के अफसर बृहस्पतिवार को मानबेला पहुंचे। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पहुंची पुलिस और पीएसी के जवानों को देख विरोध कर रहे किसान सकते में आ गए।
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कांग्रेसी नेता राणा राहुल सिंह के नेतृत्व में किसान एक प्लाट में सिमटकर धरना देते रहे और दूसरी तरफ जीडीए की टीम पैमाइश कर एक-एक आवंटियों को कब्जा दिलाती रही। सर्किल रेट के हिसाब से अधिगृहीत जमीन का मुआवजा देने की मांग लेकर किसान लंबे समय से जीडीए का विरोध कर रहे हैं।
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दोपहर 12.30 बजे के करीब एडीएम (प्रशासन) प्रभुनाथ, सिटी मजिस्ट्रेट विवेक श्रीवास्तव, एसपी सिटी (नार्थ) गणेश शाहा और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट राहुल पांडेय के नेतृत्व में आधा दर्जन थानों की पुलिस के साथ जीडीए की टीम मानबेला पहुंची। मानचित्र के मुताबिक पोखरभिंडा से पैमाइश शुरू कर आवंटियों को कब्जा दिलाने का काम शुरू हुआ जो शाम पांच बजे तक चलता रहा। जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने बताया कि 950 आवंटियों में से 392 आवंटियों ने जमीन की रजिस्ट्री भी करा ली थी। ऐसे 34 आवंटियों को बृहस्पतिवार को कब्जा दिला दिया गया। बाकी को भी जल्द कब्जा दिला दिया जाएगा। इस संबंध मेें शुक्रवार की सुबह तक प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के साथ बैठक कर तिथि तय कर ली जाएगी। इस दौरान जीडीए के मुख्य अभियंता संजय सिंह, सहायक अभियंता अवनिंद्र सिंह, पंकज पांडेय, एसपी अरविंद, संपत्ति अधिकारी इंद्रजीत सिंह समेत प्राधिकरण के कई अधिकारी, कर्मचारी मौजूद रहे।
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रणनीति बनाकर पहुंची टीम गोरखपुर। कब्जा दिलाने के लिए जीडीए, प्रशासन और पुलिस की टीम पूरी रणनीति के साथ पहुंची। एक दिन पहले बुधवार की देर रात तक जीडीए दफ्तर में आवंटियों की जमीन मानचित्र पर चिह्ति करने समेत सभी जरूरी काम निपटाए गए। सुबह मौके पर पहुंचने के पहले करीमनगर में सभी टीम एकत्रित हुई। रणनीति के तहत पहले पुलिस की एक टुकड़ी आगे बढ़ी। उन्हें देख मानबेला किसान जैसे ही आगे बढ़कर एक प्लाट पर एकत्रित हुए कि दूसरी टुकड़ी के पुलिसकर्मियों ने उस प्लाट को ही चारों तरफ से घेर लिया। बाकी की टुकड़ी पैमाइश करने वाली टीम के साथ लगी रही।
अपने पर आई तो कब्जा दिलाने पहुंचा जीडीए गोरखपुर। मानबेला की जमीन के लिए किसानों का विरोध आठ साल पहले जितना था उतना ही वर्तमान में भी रहा। या यूं कहें तो पहले की तुलना में कुछ ज्यादा ही रहा, बावजूद इसके जीडीए ने सक्रियता दिखाते हुए आवंटियों को कब्जा दिलाना शुरू कर दिया। आवंटियों में यह चर्चा आम रही कि जैसे भारी विरोध के बीच जीडीए ने अब कब्जा दिलाना शुरू किया है वैसा आठ साल के दौरान क्यों नहीं किया गया। दरअसल कोर्ट के निर्देश के बाद भी कब्जा न दिलाने पर कुछ आवंटियों ने प्राधिकरण के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल कर दी। 23 जनवरी को इस मामले में अगली सुनवाई है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक विधि विशेषज्ञों से मिले मशविरे के बाद जीडीए, प्रशासन और पुलिस के अफसरों को यह भय था कि उनपर भी कार्रवाई हो सकती है। शायद यही वजह है कि किसानों के विरोध के बाद भी जीडीए ने आवंटियों को कब्जा दिलाना शुरू कर दिया। इसकी वीडियो रिकार्डिंग भी कराई गई। जीडीए-किसानों की रार में फंसे थे आवंटी गोरखपुर। जीडीए और मानबेला किसानों के बीच रार के चलते आठ साल से राप्तीनगर के सैकड़ों आवंटियों को अपनी ही जमीन पर कब्जा नहीं मिल पा रहा था। मानबेला, पोखरभिंडा और करीमनगर की अधिगृहीत करीब दो सौ एकड़ जमीन में से 57 एकड़ जमीन पर जीडीए ने 2009 में राप्तीनगर विस्तार आवासीय योजना शुरू की थी। करीब 950 लोगों को जमीन आवंटित की गई जिनमें से 392 आवंटी रजिस्ट्री भी करा चुके हैं। आवंटियों को अभी कब्जा मिलता कि इसी बीच मुआवजे की रकम कम होने का आरोप लगाते हुए किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया। आगे का रुख तय करेगी जीडीए की मंशा गोरखपुर। जितनी सक्रियता के साथ जीडीए ने 34 आवंटियों को कब्जा दिलाया उसी तरह के प्रयास से दूसरे आवंटियों को भी कब्जा मिल जाएगा, इसे लेकर खुद आवंटियों में भी संशय है। बाकी बचे रजिस्ट्री करा चुके 358 आवंटियों में से कुछ का कहना है कि जब तक कब्जा नहीं मिल जाता, उन्हें जीडीए पर भरोसा नहीं। उन्हें भय है कि हाईकोर्ट में अवमानना याचिका के मामले में 23 जनवरी को होने वाली सुनवाई के बाद भी जीडीए इसी सक्रियता से उन्हें भी कब्जा दिलाने और निर्माण के समय सुरक्षा मुहैया नहीं कराएगा। यही नहीं, बिना प्लाट विकसित किए ही आनन-फानन में आवंटियों को कब्जा दिला देना भी जीडीए की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है। उधर, राप्ती नगर विस्तार आवासीय योजना आवंटी संघर्ष समिति के संरक्षक रमेश चंद्र गुप्ता और महामंत्री ने जीडीए से मांग की है कि आवंटियों का निर्माण कार्य पूरा होने तक मौके पर पीएसी बल तैनात की जाए। धरनास्थल की नहीं हो सकी पैमाइश गोरखपुर। सर्किल रेट के मुताबिक मुआवजा बढ़ाए बिना राप्तीनगर आवासीय योजना के आवंटियों को कब्जा दिलाने के विरोध में मानबेला, करीमनगर और पोखरभिंडा के तीन सौ से अधिक किसान कांग्रेस नेता राणा राहुल सिंह के नेतृत्व में जहां धरने पर बैठे रहे वहां की पैमाइश नहीं हो सकी। एक के बाद एक प्लाट की पैमाइश के बाद जब जीडीए की टीम धरनास्थल वाले प्लाट पर पहुंची तो राणा राहुल और टीम के अफसरों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई। मामला गंभीर न हो. इसलिए टीम ने उस प्लाट को छोड़ दूसरे की पैमाइश की।
लाठी के बल पर आवाज दबा रहा प्रशासन: राणा राहुल गोरखपुर। किसानों के साथ धरना दे रहे राणा राहुल सिंह ने प्रशासन, पुलिस और जीडीए के अफसरों पर आरोप लगाया कि अपने हक की मांग कर रहे किसानों की आवाज ताकत के बल पर दबाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस जमीन का किसानों को मुआवजा ही नहीं मिला उसपर प्राधिकरण ने पुलिस के बल पर दूसरों को कब्जा दिला दिया। किसानों की जमीन के मुआवजे का मामला अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। किसान अपनी हक की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से सड़क से सदन तक लड़ेंगे। उधर, किसानों ने चेतावनी दी है कि प्राधिकरण ने आवंटियों को भले ही कब्जा दिला दिया है मगर वे अपनी जमीन पर निर्माण नहीं होने देंगे।
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