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मोदी मैजिक से दीयों के जगमगाने की आस
आशुतोष मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Mon, 16 Oct 2017 01:37 AM IST
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दीया बनाता कुम्हार।
- फोटो : Amar Ujala
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इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से की अपील का असर कहें या पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता का प्रभाव लेकिन यह सच है कि दिवाली के मौके पर पूर्व के वर्षों के मुकाबले कुम्हारों के चार की रफ्तार इस दफा ज्यादा तेज है। माटी के प्रेम में गढ़े तमाम लोग न सिर्फ दीवाली पर दीये की जगमग की तैयारी कर रहे हैं, बल्कि इस तैयारी से इस साल कुम्हारों के पास दीपक बनाने के एडवांस ऑर्डर भी बुक हुए हैं।
रविवार को कुम्हार टोला में दीयों को अंतिम रूप देने में जुटे मोतीलाल प्रजापति ने इस बात की तस्दीक की कि पिछली दिवाली के मुकाबले इस दफा उनके उत्पाद के तलबगार बढ़े हैं। एडवांस नकदी लेकर तय वक्त पर दीये की सप्लाई देने का वादा वह कर चुके हैं। कुम्हारी के काम में लगे सोनू प्रजापति ने भी इस साल कारोबारी उम्मीदों के दीपक ज्यादा मात्रा में जलने की बात स्वीकारी। कहा कि स्वच्छ भारत अभियान, गैस सब्सिडी छोड़ने के पीएम के आह्वान पर भी लोग आगे आए थे। दीये से दिवाली मनाने के आह्वान को भी देशभर में समर्थन मिलेगा।
कुछ ऐसा ही नजरिया दीये बनाने में लगे टिंकू प्रजापति, दिनेश चंद्र प्रजापति का भी है। हालांकि कुछ शहरी इस बदलाव के पीछे पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ी जागरूकता को भी अहम कारण बता रहे हैं तो कई का मानना है कि चीन के उत्पादों से बढ़ता मोहभंग में बिजली की झालरों की जगमग से रुझान हटाकर दीये की दमक की ओर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
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पंडालों से भी होगा आह्वान
शहर में सजने वाले लक्ष्मी पूजा पंडालों से समितियां इस बार भक्तों से दीपोत्सव के दौरान शाम को घर से मिट्टी के दीये लाने का आह्वान करेंगी। किसी समिति की तैयारी पंडाल में पहुंचने वाले भक्तों से पांच दीये मंगाने की है तो कहीं 11 दीयों के साथ भक्तों के पंडाल पहुंचने की अपील की जाएगी। समितियों की तैयारियों पर ध्यान दें तो पंडालों पर धनतेरस की शाम से ही मिट्टी के दीयों की जगमग नजर आएगी।
कई स्वयंसेवी संस्थाएं भी आगे आईं
इस दिवाली पर शहर की कई स्वयंसेवी संस्थाएं माटी के दीयों से दीपावली की खुशियों में रोशनी भरने की तैयारी में हैं। गोरखनाथ मंदिर के भीम सरोवर पर 17 की शाम को भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (भाई) की ओर से ‘एक दीया शहीदों के नाम’ कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें लोगों से शहीदों के सम्मान में दीपोत्सव पर एक दीया लेकर आने की अपील होगी। सूरजकुंड विकास समिति भी इस तरह का आयोजन करेगी।
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रविवार को कुम्हार टोला में दीयों को अंतिम रूप देने में जुटे मोतीलाल प्रजापति ने इस बात की तस्दीक की कि पिछली दिवाली के मुकाबले इस दफा उनके उत्पाद के तलबगार बढ़े हैं। एडवांस नकदी लेकर तय वक्त पर दीये की सप्लाई देने का वादा वह कर चुके हैं। कुम्हारी के काम में लगे सोनू प्रजापति ने भी इस साल कारोबारी उम्मीदों के दीपक ज्यादा मात्रा में जलने की बात स्वीकारी। कहा कि स्वच्छ भारत अभियान, गैस सब्सिडी छोड़ने के पीएम के आह्वान पर भी लोग आगे आए थे। दीये से दिवाली मनाने के आह्वान को भी देशभर में समर्थन मिलेगा।
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कुछ ऐसा ही नजरिया दीये बनाने में लगे टिंकू प्रजापति, दिनेश चंद्र प्रजापति का भी है। हालांकि कुछ शहरी इस बदलाव के पीछे पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ी जागरूकता को भी अहम कारण बता रहे हैं तो कई का मानना है कि चीन के उत्पादों से बढ़ता मोहभंग में बिजली की झालरों की जगमग से रुझान हटाकर दीये की दमक की ओर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
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पंडालों से भी होगा आह्वान
शहर में सजने वाले लक्ष्मी पूजा पंडालों से समितियां इस बार भक्तों से दीपोत्सव के दौरान शाम को घर से मिट्टी के दीये लाने का आह्वान करेंगी। किसी समिति की तैयारी पंडाल में पहुंचने वाले भक्तों से पांच दीये मंगाने की है तो कहीं 11 दीयों के साथ भक्तों के पंडाल पहुंचने की अपील की जाएगी। समितियों की तैयारियों पर ध्यान दें तो पंडालों पर धनतेरस की शाम से ही मिट्टी के दीयों की जगमग नजर आएगी।
कई स्वयंसेवी संस्थाएं भी आगे आईं
इस दिवाली पर शहर की कई स्वयंसेवी संस्थाएं माटी के दीयों से दीपावली की खुशियों में रोशनी भरने की तैयारी में हैं। गोरखनाथ मंदिर के भीम सरोवर पर 17 की शाम को भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (भाई) की ओर से ‘एक दीया शहीदों के नाम’ कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें लोगों से शहीदों के सम्मान में दीपोत्सव पर एक दीया लेकर आने की अपील होगी। सूरजकुंड विकास समिति भी इस तरह का आयोजन करेगी।