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तीन दिन शेष, अधूरे पड़े हैं आधे से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र
siddharthnagar
Updated Wed, 28 Mar 2018 11:38 PM IST
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बर्डपुर के बहादुरपुर में अधूरा पड़ा आंगनबाड़ी केंद्र।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। जिले में 200 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण की समयावधि (31 मार्च) खत्म होने में महज तीन दिन शेष हैं। बावजूद इसके अभी भी 119 केंद्रों के भवन का निर्माण नहीं हो सका है। सबसे खराब स्थिति ग्राम पंचायतों द्वारा बनाए जाने वाले केंद्रों की है। 100 के सापेक्ष महज सात का ही निर्माण हो सका, जबकि आरईडी(ग्रामीण अभियंत्रण विभाग) द्वारा 100 में से 74 केंद्रों का भवन निर्माण हो सका। अंतिम तिथि पास आते ही अफसरों की बेचैनी बढ़ गई है।
पोषण मिशन का बेहतर संचालन हो, इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को खुद का भवन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। वित्तीय वर्ष 2016-17 में कुल 200 आंगनबाड़ी केंद्र जिले में स्वीकृत हुए। इसके लिए धनराशि 2017-18 में आई। शासन ने तय किया कि वर्ष 2018 में गणतंत्र दिवस पर सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के नए भवन पर ध्वजारोहण होगा, इसके लिए दिसंबर तक निर्माण कार्य पूरा करने की हिदायत दी गई। निर्माण में धन आड़े न आए इसलिए प्रत्येक केंद्र के लिए बाल विकास विभाग से 2 लाख रुपये अवमुक्त कर दिए गए। पांच लाख रुपये मनरेगा और 1.06 लाख रुपये पंचायती राज विभाग के माध्यम से खर्च होने थे। हिदायतों के बाद दिसंबर तक निर्माण न होने पर समयसीमा 31 जनवरी और फिर 31 मार्च की गई। निर्देश था कि वित्तीय सत्र के समापन तक हर हाल में निर्माण पूरा कर केंद्रों को हैंडओवर कर लिया जाए। बावजूद अब तक महज 81 केंद्र ही पूरे हो पाए हैं। कार्य में सुस्ती के लिए ग्राम पंचायत मिट्टी व बालू की उपलब्धता न होने को कारण बता रहे हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव कुमार सिंह ने बताया कि वित्तीय सत्र 2016-17 में स्वीकृत 200 आंगनबाड़ी केंद्रों को जनवरी तक ही पूरा कराना था, लेकिन बाद में 31 मार्च की डेडलाइन तय की गई थी। अब तक सिर्फ 81 भवन ही पूरे होने की रिपोर्ट मिली है। सत्यापन कराकर हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। कुछ भवनों का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है। इसे भी जल्द पूरा कराया जाएगा। समय से निर्माण न कराने वालों से जवाब तलब करते हुए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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बालू-मिट्टी और मजदूर न मिलने से हुई देरी
बर्डपुर ब्लॉक के परसा टोला बहादुरपुर, रामनगर व नागचौरी में ग्राम पंचायत के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण जारी है। अभी छत लगाने के बाद फिनिशिंग का पूरा काम होना है। इसमें कम से कम एक माह का समय लगना तय है। समय से निर्माण पूरा न हो पाने के बाबत परसा टोला बहादुरपुर के प्रधान रामनारायण चौधरी का कहना है कि निर्माण जनवरी तक पूरा करना तो था, मगर कैसे करते। खनन पर पाबंदी के चलते मिट्टी-बालू उपलब्ध ही नहीं हो रहा था। मजदूर भी नहीं मिल रहे थे। अब काम को गति दी गई है। जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
नौ साल में भी पूरे नहीं हुए 274 आंगनबाड़ी केंद्र
कुपोषण का खात्मा हमेशा से सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में रहा है। सरकारें इस पर जितना गंभीर रहीं, आंगनबाड़ी केंद्रों का भवन बनाने वाली कार्यदाई संस्थाओं का रुख उतना ही उदासीन रहा। आलम यह है कि जिले में 274 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण नौ वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट प्रोग्राम (एमएसडीपी) के तहत वर्ष 2009-10 में जिले में 676 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण की स्वीकृति मिली थी। कार्यदाई संस्था यूपीपीसीएल को नियुक्त करते हुए धनराशि भी अवमुक्त कर दी गई। लंबा अरसा बीतने के बाद भी इनमें 274 केंद्रों का निर्माण नहीं हुआ है। संस्था ने 402 भवनों के हैंडओवर का रिकार्ड उपलब्ध कराया गया है। गौर फरमाने वाली बात है कि जो भवन बनाए गए हैं, देख-रेख के अभाव में उनमें से कइयों की हालत खस्ता हो चुकी है। अधिकांश भवन खंडहर के रूप में तब्दील हो रहे हैं।
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पोषण मिशन का बेहतर संचालन हो, इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों को खुद का भवन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। वित्तीय वर्ष 2016-17 में कुल 200 आंगनबाड़ी केंद्र जिले में स्वीकृत हुए। इसके लिए धनराशि 2017-18 में आई। शासन ने तय किया कि वर्ष 2018 में गणतंत्र दिवस पर सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के नए भवन पर ध्वजारोहण होगा, इसके लिए दिसंबर तक निर्माण कार्य पूरा करने की हिदायत दी गई। निर्माण में धन आड़े न आए इसलिए प्रत्येक केंद्र के लिए बाल विकास विभाग से 2 लाख रुपये अवमुक्त कर दिए गए। पांच लाख रुपये मनरेगा और 1.06 लाख रुपये पंचायती राज विभाग के माध्यम से खर्च होने थे। हिदायतों के बाद दिसंबर तक निर्माण न होने पर समयसीमा 31 जनवरी और फिर 31 मार्च की गई। निर्देश था कि वित्तीय सत्र के समापन तक हर हाल में निर्माण पूरा कर केंद्रों को हैंडओवर कर लिया जाए। बावजूद अब तक महज 81 केंद्र ही पूरे हो पाए हैं। कार्य में सुस्ती के लिए ग्राम पंचायत मिट्टी व बालू की उपलब्धता न होने को कारण बता रहे हैं।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव कुमार सिंह ने बताया कि वित्तीय सत्र 2016-17 में स्वीकृत 200 आंगनबाड़ी केंद्रों को जनवरी तक ही पूरा कराना था, लेकिन बाद में 31 मार्च की डेडलाइन तय की गई थी। अब तक सिर्फ 81 भवन ही पूरे होने की रिपोर्ट मिली है। सत्यापन कराकर हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। कुछ भवनों का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच गया है। इसे भी जल्द पूरा कराया जाएगा। समय से निर्माण न कराने वालों से जवाब तलब करते हुए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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बालू-मिट्टी और मजदूर न मिलने से हुई देरी
बर्डपुर ब्लॉक के परसा टोला बहादुरपुर, रामनगर व नागचौरी में ग्राम पंचायत के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण जारी है। अभी छत लगाने के बाद फिनिशिंग का पूरा काम होना है। इसमें कम से कम एक माह का समय लगना तय है। समय से निर्माण पूरा न हो पाने के बाबत परसा टोला बहादुरपुर के प्रधान रामनारायण चौधरी का कहना है कि निर्माण जनवरी तक पूरा करना तो था, मगर कैसे करते। खनन पर पाबंदी के चलते मिट्टी-बालू उपलब्ध ही नहीं हो रहा था। मजदूर भी नहीं मिल रहे थे। अब काम को गति दी गई है। जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
नौ साल में भी पूरे नहीं हुए 274 आंगनबाड़ी केंद्र
कुपोषण का खात्मा हमेशा से सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में रहा है। सरकारें इस पर जितना गंभीर रहीं, आंगनबाड़ी केंद्रों का भवन बनाने वाली कार्यदाई संस्थाओं का रुख उतना ही उदासीन रहा। आलम यह है कि जिले में 274 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण नौ वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट प्रोग्राम (एमएसडीपी) के तहत वर्ष 2009-10 में जिले में 676 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण की स्वीकृति मिली थी। कार्यदाई संस्था यूपीपीसीएल को नियुक्त करते हुए धनराशि भी अवमुक्त कर दी गई। लंबा अरसा बीतने के बाद भी इनमें 274 केंद्रों का निर्माण नहीं हुआ है। संस्था ने 402 भवनों के हैंडओवर का रिकार्ड उपलब्ध कराया गया है। गौर फरमाने वाली बात है कि जो भवन बनाए गए हैं, देख-रेख के अभाव में उनमें से कइयों की हालत खस्ता हो चुकी है। अधिकांश भवन खंडहर के रूप में तब्दील हो रहे हैं।