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कैंसर का इलाज अब गोरखपुर में
Updated Sun, 23 Jul 2017 09:36 PM IST
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कार्यशाला का उद्घाटन करतीं डॉक्टर।
- फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर।
गोरखपुर ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनकोलॉजिकल सोसायटी और हनुमान पोद्दार कैंसर अस्पताल के सहयोग से रविवार को गीता वाटिका स्थित अस्पताल परिसर में सर्वाइकल कैंसर के कारण और बचाव पर कार्यशाला हुई। महिला रोग विशेषज्ञों ने शहर की करीब 70 गाइनी डॉक्टरों को गर्भाशय से जुड़ी बीमारियों, स्तन कैंसर, बच्चेदानी के कैंसर, शरीर में गांठ और मुंह के कैंसर के लक्षणों से अवगत कराया और मरीजों में कैंसर के लक्षण मिलने पर उन्हें उचित इलाज की सलाह देने को प्रेरित किया।
लखनऊ से आए डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि विश्व में हर वर्ष 1.30 करोड़ लोग कैंसर से पीड़ित होते हैं। इनमें प्रतिवर्ष 60 लाख लोगों में भारतीय होते हैं, जबकि नौ से 10 लाख लोगों की मौत हो जाती हैै। उन्होंने बताया कि शरीर में गांठ का तेजी से बढ़ना, घाव या छाला, शौच, पेशाब करते वक्त खून आना, एक माह तक खांसी आने से फेफड़े का कैंसर, आवाज भारी होना कैंसर के लक्षण है। दो सप्ताह से एक माह में अगर यह ठीक नहीं होता तो कैंसर हो सकता है।
दिल्ली से आए डॉ. शशांक ने कहा कि भूख न लगना, वजन कम होना भी कैंसर का लक्षण है। अगर कैंसर की शिकायत हो तो गोरखपुर में ही सिकाई और दवाई से कीमोथेरेपी कर इलाज कराया जा सकता है। अमूमन लोग कैंसर के इलाज के लिए लखनऊ, बनारस और दिल्ली जाते हैं, लेकिन उन्हें अब दूर जाने की आवश्यकता नहीं है। गोरखपुर में ही कैंसर का इलाज हो सकता है। इस मौके पर डॉ. सुरहिता करीम, एचआर माली, डॉ. एके चतुर्वेदी, डॉ. राधा जीना, डॉ. दीप्ती चतुर्वेदी, डॉ. निशांत आब्दी, डॉ. मीनाक्षी, डॉ. मेजर एमके बेग आदि उपस्थित रहे।
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इन डॉक्टरों ने किया जागरूक
कार्यशाला में डॉ. पूनम, डॉ. छवि सरकारी, डॉ. तनु वर्मा, डॉ. बबिता शुक्ला और डॉ. गीता गुप्ता ने कैंसर के लक्षणों और बचाव से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि महिलाओं को मासिक धर्म में अनियमित रक्त आना, सफेद बदबूदार पानी भी कैंसर के लक्षण हैं।
गरीब कैंसर पीड़ितों को आर्थिक मदद
कार्यशाला में बताया गया कि गरीब कैंसर पीड़ितों का प्रधानमंत्री राहत कोष, मुख्यमंत्री राहत कोष और विधायक निधि से नि:शुल्क इलाज कराने का प्रावधान है। पीड़ित उनके पास आकर अनुमानित बजट बनाकर अपने विधायक से मंजूर करा सकते हैं, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधक शासन को भेज देता है। इन सबके लिए कैंसर के शुरुआती दिनों में ही मरीज का अस्पताल पहुंचना अनिवार्य है।
केस खराब करने से बचें डॉक्टर
गायनकोलॉजिस्ट और सर्जन अगर तो कैंसर का सफल ऑपरेशन कर सकते हैं तो ही आपरेशन करें, अन्यथा केस खराब करने से बचें। बिना देरी के कैंसर पीड़ित को गाइनी के स्पेशलिस्ट सर्जन के पास भेजें। अक्सर देखा जाता है कि गायनकोलॉजिस्ट और सर्जन के ऑपरेशन करने के बाद 60 से 70 फीसदी में कैंसर दोबारा होने की आशंका होती है, लेकिन स्पेशलिस्ट सर्जन के ऑपरेशन के बाद 5 सेे 10 फीसदी ही आशंका रह जाती है।
गोरखपुर ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनकोलॉजिकल सोसायटी और हनुमान पोद्दार कैंसर अस्पताल के सहयोग से रविवार को गीता वाटिका स्थित अस्पताल परिसर में सर्वाइकल कैंसर के कारण और बचाव पर कार्यशाला हुई। महिला रोग विशेषज्ञों ने शहर की करीब 70 गाइनी डॉक्टरों को गर्भाशय से जुड़ी बीमारियों, स्तन कैंसर, बच्चेदानी के कैंसर, शरीर में गांठ और मुंह के कैंसर के लक्षणों से अवगत कराया और मरीजों में कैंसर के लक्षण मिलने पर उन्हें उचित इलाज की सलाह देने को प्रेरित किया।
लखनऊ से आए डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि विश्व में हर वर्ष 1.30 करोड़ लोग कैंसर से पीड़ित होते हैं। इनमें प्रतिवर्ष 60 लाख लोगों में भारतीय होते हैं, जबकि नौ से 10 लाख लोगों की मौत हो जाती हैै। उन्होंने बताया कि शरीर में गांठ का तेजी से बढ़ना, घाव या छाला, शौच, पेशाब करते वक्त खून आना, एक माह तक खांसी आने से फेफड़े का कैंसर, आवाज भारी होना कैंसर के लक्षण है। दो सप्ताह से एक माह में अगर यह ठीक नहीं होता तो कैंसर हो सकता है।
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दिल्ली से आए डॉ. शशांक ने कहा कि भूख न लगना, वजन कम होना भी कैंसर का लक्षण है। अगर कैंसर की शिकायत हो तो गोरखपुर में ही सिकाई और दवाई से कीमोथेरेपी कर इलाज कराया जा सकता है। अमूमन लोग कैंसर के इलाज के लिए लखनऊ, बनारस और दिल्ली जाते हैं, लेकिन उन्हें अब दूर जाने की आवश्यकता नहीं है। गोरखपुर में ही कैंसर का इलाज हो सकता है। इस मौके पर डॉ. सुरहिता करीम, एचआर माली, डॉ. एके चतुर्वेदी, डॉ. राधा जीना, डॉ. दीप्ती चतुर्वेदी, डॉ. निशांत आब्दी, डॉ. मीनाक्षी, डॉ. मेजर एमके बेग आदि उपस्थित रहे।
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इन डॉक्टरों ने किया जागरूक
कार्यशाला में डॉ. पूनम, डॉ. छवि सरकारी, डॉ. तनु वर्मा, डॉ. बबिता शुक्ला और डॉ. गीता गुप्ता ने कैंसर के लक्षणों और बचाव से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि महिलाओं को मासिक धर्म में अनियमित रक्त आना, सफेद बदबूदार पानी भी कैंसर के लक्षण हैं।
गरीब कैंसर पीड़ितों को आर्थिक मदद
कार्यशाला में बताया गया कि गरीब कैंसर पीड़ितों का प्रधानमंत्री राहत कोष, मुख्यमंत्री राहत कोष और विधायक निधि से नि:शुल्क इलाज कराने का प्रावधान है। पीड़ित उनके पास आकर अनुमानित बजट बनाकर अपने विधायक से मंजूर करा सकते हैं, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधक शासन को भेज देता है। इन सबके लिए कैंसर के शुरुआती दिनों में ही मरीज का अस्पताल पहुंचना अनिवार्य है।
केस खराब करने से बचें डॉक्टर
गायनकोलॉजिस्ट और सर्जन अगर तो कैंसर का सफल ऑपरेशन कर सकते हैं तो ही आपरेशन करें, अन्यथा केस खराब करने से बचें। बिना देरी के कैंसर पीड़ित को गाइनी के स्पेशलिस्ट सर्जन के पास भेजें। अक्सर देखा जाता है कि गायनकोलॉजिस्ट और सर्जन के ऑपरेशन करने के बाद 60 से 70 फीसदी में कैंसर दोबारा होने की आशंका होती है, लेकिन स्पेशलिस्ट सर्जन के ऑपरेशन के बाद 5 सेे 10 फीसदी ही आशंका रह जाती है।