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टैक्स के सेल्फ डिक्लेरेशन में भी फर्जीवाड़ा
Updated Sat, 29 Jul 2017 01:50 AM IST
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राजीव रंजन
गोरखपुर। मोहद्दीपुर में एक मकान करीब साढ़े चार हजार वर्ग फीट एरिया में बना हुआ है, लेकिन इस मकान के लिए मात्र डेढ़ हजार वर्ग फीट के हिसाब से टैक्स अदा किया जा रहा है। वहीं कई लोग तो ऐसे हैं, जिन्होंने एक मंजिल भवन संबंधी ब्योरे का सेल्फ डिक्लेरेशन (स्वकर प्रपत्र) करते हुए नगर निगम में टैक्स निर्धारित करा लिया और बाद में मकान तीन मंजिला बनाने के बाद भी टैक्स का रिन्यूअल नहीं कराया है। शहर के करीब-करीब हर इलाके में ऐसी स्थिति है। इसे देखते हुए नगर आयुक्त ने शहर के सभी मकानों का फिर से सर्वे कराने का निर्णय लिया है।
शहर में करीब 1.30 लाख मकान हैं। इससे नगर निगम को हर साल करीब करीब 15 करोड़ रुपये टैक्स मिलता है, मगर आशंका है कि टैक्स की यह प्राप्ति वास्तविकता से काफी कम है। दरअसल, नगर निगम में स्वकर असेसमेंट (सेल्फ डिक्लरेशन) का प्रावधान है। इसके तहत मकान मालिकों को खुद ही अपने मकान का पूरा ब्योरा एक प्रपत्र पर भरकर जमा करना होता है। इसमें मकान मालिक को मकान का क्षेत्रफल, कारपेट और कंस्ट्रक्शन एरिया के ब्योरे के अलावा आवासीय और व्यावसायिक विवरण भी देना होता है। इसके बाद नगर निगम के टैक्स इंस्पेक्टर इसकी जांच करते हैं और उसी के आधार पर टैक्स का निर्धारण होता है। लेकिन पार्षद, मकान मालिक और टैक्स इंस्पेक्टरों की मिलीभगत से टैक्स का निर्धारण काफी कम कर दिया जाता है। शहर के विभिन्न इलाकों में मकान का टैक्स निर्धारण करने में ऐसी ही आशंका है। इसे देखते हुए नगर आयुक्त ने शहर के सभी मकानों का फिर से सर्वे कराने का निर्णय लिया है।
- शहर केे कई मकानों का टैक्स असेसमेंट सही ढंग से नहीं किया गया है। इसके अलावा शहर के बाहरी इलाकों में रोज नए निर्माण के बावजूद उन्हें टैक्स के दायरे में नहीं लाया गया है। इससे नगर निगम को टैक्स काफी कम मिल रहा है। इसे देखते हुए पूरे शहर के मकानों का फिर से सर्वे कराने का निर्णय लिया गया है। जल्द ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
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- प्रेमप्रकाश सिंह, नगर आयुक्त
गोरखपुर। मोहद्दीपुर में एक मकान करीब साढ़े चार हजार वर्ग फीट एरिया में बना हुआ है, लेकिन इस मकान के लिए मात्र डेढ़ हजार वर्ग फीट के हिसाब से टैक्स अदा किया जा रहा है। वहीं कई लोग तो ऐसे हैं, जिन्होंने एक मंजिल भवन संबंधी ब्योरे का सेल्फ डिक्लेरेशन (स्वकर प्रपत्र) करते हुए नगर निगम में टैक्स निर्धारित करा लिया और बाद में मकान तीन मंजिला बनाने के बाद भी टैक्स का रिन्यूअल नहीं कराया है। शहर के करीब-करीब हर इलाके में ऐसी स्थिति है। इसे देखते हुए नगर आयुक्त ने शहर के सभी मकानों का फिर से सर्वे कराने का निर्णय लिया है।
शहर में करीब 1.30 लाख मकान हैं। इससे नगर निगम को हर साल करीब करीब 15 करोड़ रुपये टैक्स मिलता है, मगर आशंका है कि टैक्स की यह प्राप्ति वास्तविकता से काफी कम है। दरअसल, नगर निगम में स्वकर असेसमेंट (सेल्फ डिक्लरेशन) का प्रावधान है। इसके तहत मकान मालिकों को खुद ही अपने मकान का पूरा ब्योरा एक प्रपत्र पर भरकर जमा करना होता है। इसमें मकान मालिक को मकान का क्षेत्रफल, कारपेट और कंस्ट्रक्शन एरिया के ब्योरे के अलावा आवासीय और व्यावसायिक विवरण भी देना होता है। इसके बाद नगर निगम के टैक्स इंस्पेक्टर इसकी जांच करते हैं और उसी के आधार पर टैक्स का निर्धारण होता है। लेकिन पार्षद, मकान मालिक और टैक्स इंस्पेक्टरों की मिलीभगत से टैक्स का निर्धारण काफी कम कर दिया जाता है। शहर के विभिन्न इलाकों में मकान का टैक्स निर्धारण करने में ऐसी ही आशंका है। इसे देखते हुए नगर आयुक्त ने शहर के सभी मकानों का फिर से सर्वे कराने का निर्णय लिया है।
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- शहर केे कई मकानों का टैक्स असेसमेंट सही ढंग से नहीं किया गया है। इसके अलावा शहर के बाहरी इलाकों में रोज नए निर्माण के बावजूद उन्हें टैक्स के दायरे में नहीं लाया गया है। इससे नगर निगम को टैक्स काफी कम मिल रहा है। इसे देखते हुए पूरे शहर के मकानों का फिर से सर्वे कराने का निर्णय लिया गया है। जल्द ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
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- प्रेमप्रकाश सिंह, नगर आयुक्त