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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   किसानों के विरोध पर कब्जा दिलाने गई जीडीए टीम लौटी

फिर गरमाया मानबेला मामला, फोर्स और किसान आमने-सामने

Wed, 06 Dec 2017 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Wed, 06 Dec 2017 12:37 AM IST
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किसानों के विरोध पर कब्जा दिलाने गई जीडीए टीम लौटी
धरने पर बैठे किसान। - फोटो : Amar Ujala
एक दशक से लटका मानबेला की जमीन अधिग्रहण का मामला मंगलवार को फिर गरमा गया। राप्तीनगर आवासीय योजना के आवंटियों को कब्जा दिलाने करीब 10 थानों की पुलिस और पीएसी के साथ पहुंची जीडीए की टीम को किसानों के विरोध के चलते खाली हाथ लौटना पड़ा। कांग्रेसी नेता राणा राहुल सिंह की अगुवाई में मानबेला किसान, फोर्स के सामने धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि जिस जमीन के लिए पूरा मुआवजा ही नहीं मिला, उसे प्राधिकरण कैसे दूसरे को आवंटित कर सकता है। मौके पर पहले प्राधिकरण की टीम और फोर्स ने थोड़ी सख्ती करनी चाही मगर किसान अड़े रहे। उनका कहना था कि जान दे देंगे पर जमीन पर कब्जा नहीं करने देंगे। इसके बाद दोपहर 3.30 बजे के करीब फोर्स और टीम को पीछे हटना पड़ा।
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मस्जिद के लाउडस्पीकर से आवाज दे बुलाए गए किसान
सुबह से ही मानबेला में पुलिस वालों को जुटता देख किसान सतर्क हो गए थे। पुलिस के बाद जीडीए की टीम पहुंचने पर कुछ किसान नेताओं ने मस्जिद के लाउडस्पीकर से आवाज देकर दूसरे किसानों को भी सतर्क कर दिया और मौके पर जुटने का आह्वान किया। इसके बाद देखते ही देखते 100 से अधिक संख्या में किसान वहां जुट गए और विरोध शुरू कर दिया।
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मुआवजे पर ब्याज से दोबारा बिगड़ी बात
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुए समझौते के बाद मंडलीय कमेटी ने पूर्व में दिए गए मुआवजे की रकम पर ब्याज लगाने की नई शर्त जोड़ दी। इससे किसान भड़क गए। कांग्रेसी नेता राणा राहुल सिंह के नेतृत्व में किसानों का एक पक्ष अक्टूबर 2017 में मानबेला में ही धरने पर बैठ गया। इसी बीच किसानों ने जमीन के मौजूदा सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा मांगने की नई शर्त रख दी। साथ ही यह भी अधिगृहीत जमीन से स्कूल, मस्जिद और मौके पर बन चुके मकान को बाहर रखा जाए। मामला गरमाने पर मंडलीय कमेटी ने मुआवजे पर ब्याज की शर्त को खत्म कर दिया। राज्य स्तरीय कमेटी ने भी इसे अपनी स्वीकृति दे दी, मगर इसके बाद भी धरने पर बैठा किसानों का एक पक्ष तैयार नहीं हुआ। निकाय चुनाव की वजह से प्रशासन और पुलिस की सख्ती पर किसानों ने उस समय धरना खत्म कर दिया, मगर उन्होंने तब भी चेतावनी दी थी कि उन्हें मुआवजा सर्किल रेट के ही हिसाब से चाहिए, वर्ना जमीन नहीं दी जाएगी।
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मुआवजे के लिए 143 किसान ही आगे आए
अक्टूबर में किसानों का धरना खत्म होने के बाद प्राधिकरण ने बढ़ा हुआ मुआवजा वितरित करने की घोषणा की। किसानों से कहा गया कि वे तय प्रोफार्म भरकर बढ़ा हुआ मुआवजा प्राप्त कर सकते हैं। जीडीए सचिव के मुताबिक बढ़े हुए मुआवजे के लिए अब तक मात्र 143 किसानों ने ही प्रोफार्मा भरा है। इनमें से नौ किसानों को करीब एक करोड़ रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है। बढ़े हुए मुआवजे के तौर पर एक किसान को सर्वाधिक 43 लाख रुपये दिए गए हैं।

करोड़ों खर्च कर चुका है जीडीए
जीडीए के सचिव राम सिंह गौतम का कहना है कि राप्तीनगर आवासीय योजना की जमीन पर प्राधिकरण को पहले ही कब्जा मिल चुका है। वहां करोड़ों रुपये खर्च कर सड़क, नाली, बिजली के पोल, सीवर व पीने के पानी की पाइपलाइन भी बिछाई जा चुकी है। अगर कब्जा नहीं रहता तो ये सभी निर्माण कैसे कराए गए होते। आवंटियों की जमीन का सीमांकन कराने के लिए ही इंजीनियरों की टीम के साथ वह मानबेला गए थे, मगर किसानों का कहना है कि बढ़ा हुआ मुआवजा वितरित होने के बाद ही जमीन पर कब्जा दिलाया जाए। अब तक 143 किसान बढ़े हुए मुआवजे के लिए आवेदन कर चुके हैं। नौ को मुआवजा दे भी दिया गया है। बाकी किसानों को जल्द मुआवजा लेने को कहा गया है ताकि आवंटियों को कब्जा दिलाने के साथ ही मानबेला के विकास का काम शुरू किया जा सके।

हाईकोर्ट की सख्ती पर सक्रिय हुआ जीडीए
मानबेला की अधिगृहीत जमीन में से जीडीए ने वर्ष 2009 में करीब 57 हेक्टेअर में राप्ती नगर आवासीय योजना शुरू की थी। करीब 900 लोगों को इस योजना में जमीन आवंटित कराई थी। इनमें से करीब 250 आवंटियों ने रजिस्ट्री भी करा ली, मगर किसानों के विरोध की वजह से किसी भी आवंटी को कब्जा नहीं मिल सका। ऐसे में आवंटी हाईकोर्ट चले गए। छह महीने पहले कोर्ट ने जीडीए को कब्जा दिलाने का निर्देश दिया था। मियाद खत्म होने के बाद भी कब्जा न दिलाने पर चार दिसंबर 2017 को हुई हाईकोर्ट में सुनवाई में जल्द कब्जा न दिलाने पर जीडीए अफसरों पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसी के बाद हरकत में आए जीडीए उपाध्यक्ष वैभव श्रीवास्तव ने सचिव राम सिंह गौतम के नेतृत्व में कब्जा दिलाने के लिए टीम मानबेला भेजी थी।

224 एकड़ जमीन हुई थी अधिगृहीत
जीडीए ने करीब एक दशक पहले मानबेला और पोखरभिंडा की करीब 224 एकड़ जमीन अधिगृहीत की थी। इसके लिए संबंधित किसानों को मुआवजा भी दे दिया था, लेकिन बाद में किसानों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग लेकर आंदोलन शुरू कर दिया। कुछ किसान कोर्ट भी चले गए तभी से यह मामला लटका हुआ था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर करीब छह महीने पहले किसान मुआवजे की दर बढ़ाने के समझौते पर मान गए थे।


मुआवजा बढ़ाने पर पहले मान गए थे किसान
मुख्यमंत्री बनते ही योगी आदित्यनाथ ने खुद इस मामले में हस्तक्षेप कर समझौता कराया था। उन्होंने अपनी मौजूदगी में प्राधिकरण और किसानों की बैठक बुलाई थी, जिसमें किसान अधिगृहीत जमीन का मुआवजा बढ़ाने की शर्त पर मान गए थे। तय हुआ था कि किसानों को अब मानबेला और उससे सटे पोखरभिंडा की अधिगृहीत जमीन के लिए 70 लाख रुपये प्रति हेक्टेअर की दर से बढ़ा हुआ मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही यह भी कि अधिगृहीत जमीन की 10 फीसदी भूमि को प्राधिकरण विकसित कर किसानों के लिए सुरक्षित रखेगा। इस जमीन को जरूरतमंद किसान ही आवंटित करा सकेंगे।
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